Categories: ब्लॉग

जानिये क्यों ख़ास है संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत आजकल के समय में

Published by
Ayushi Jain

संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है।  कहा जाता है की गणेश जी विग्नहर्ता है और हर काम की शुरुआत से पहले उनकी पूजा करने से कार्य में विघ्न नहीं पड़ता। इस बार ये व्रत 5 अक्टूबर को तृतीया युक्त संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत है। गणेश जी का व्रत करने वाले यह ध्यान रखें कि कृष्ण पक्ष में चतुर्थी रात में चंद्रोदय के समय रहनी चाहिए और शुक्लपक्ष में मध्याह्न में। इसमें उदया तिथि नहीं ली जाती है। हां, तृतीया के साथ चतुर्थी ले सकते हैं, लेकिन चतुर्थी के साथ पंचमी तिथि नहीं होनी चाहिए। समस्त देवी-देवताओं में प्रथम पूज्य गणेश जी की लीलाएं अत्यंत प्रसिद्ध हैं। उन्होंने ही माता-पिता को सर्वाधिक प्रतिष्ठा प्रदान की।

दूर्वा गणेश जी को उसी तरह प्रिय है, जिस तरह से शिवजी को बेलपत्र और नारायण को तुलसी। गणेश विवेक हैं। सभी दवों में बुद्धिमान भी  हैं। असल में जिसके पास विवेक होगा, उसी को सनातन धर्म के अनुसार आदिशक्ति दुर्गा, सूर्य, शिव और श्री हरि आदि पंचदेवों की अक्षुण्ण ऊर्जा प्राप्त होगी। गणेश हैं, तभी तो सृष्टि रची जा सकी। ब्रह्मा जी ने सृष्टि रचने से पहले उनकी पूजा की। विघ्न का डर तो रहा ही होगा, पर सकारात्मक ऊर्जा, विवेक संपन्नता की इच्छा भी रही होगी। इसलिए जहां गणेश हैं, वहीं समस्त देवी-देवता विराजमान हैं।

और पढ़ें: जानिए प्रदोष व्रत या त्रयोदशी व्रत करने की विधि और उसकी महिमा के बारे में

गणेश चतुर्थी व्रत की विधि

लाल रंग के वस्त्र गणेश जी को पहनकर उन्हें बेलपत्र, अपामार्ग, शमीपत्र, दूर्वा अपर्ण करना चाहिए। धन की अच्छी स्थिति होने पर 21 लड्डू , 21 दूब, जामुन आदि के साथ फल, पंचमेवा, पान आदि तो होना ही चाहिए। 10 लड्डूओं का दान करना चाहिए। आरती आदि करके ‘गणेश्वरगणाध्यक्ष गौरीपुत्र गजानन। व्रतं संपूर्णता यातु त्वत्प्रसादादिभानन।।’ श्लोक का उच्चारण करते हुए प्रार्थना करें। गणेश चतुर्थी का व्रत करने वाले को उदय हुए चंद्रमा, श्री गणेश और चतुर्थी माता को गंध, अक्षत आदि के साथ अध्र्य अवश्य देना चाहिए। इसके बाद मीठा भोजन कर सकते हैं। नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।

गणेश चतुर्थी व्रत का महत्व-

इस श्रावण कृष्ण चतुर्थी व्रत के बारे में कहा जाता है कि माता पार्वती जब शिव जी को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या कर रही थीं और  शिवजी प्रस्न्न नहीं हो रहे थे, तब उन्होंने यह व्रत किया। व्रत करने के पश्चात उनका शिव से विवाह संपन्न हुआ। हनुमान ने सीता की खोज में जाने पर यह व्रत किया। रावण को जब राजा बलि ने पकड़ कर कैद कर लिया, तब रावण ने यह व्रत किया था। गौतम की पत्नी अहिल्या ने भी इस व्रत को किया था। इस व्रत को करने से सभी मुश्किलें ताल जाती हैं।

और पढ़ें: कोरोनावॉरियर्स सीमा पर लड़ रहे जवानों से कम नहीं है

Recent Posts

Dear society …क्यों एक लड़का – लड़की कभी बेस्ट फ्रेंड्स नहीं हो सकते ?

“लड़का और लड़की के बीच कभी mutual understanding, बातचीत और एक हैल्थी फ्रेंडशिप का रिश्ता…

11 mins ago

पीवी सिंधु की डाइट: जानिये भारत के ओलंपिक मेडल कंटेस्टेंट सिंधु के मेन्यू में क्या है?

सिंधु की डाइट मुख्य रूप से वजन कंट्रोल में रखने के लिए, हाइड्रेशन और प्रोटीन…

25 mins ago

टोक्यो ओलंपिक: पीवी सिंधु का सामना आज सेमीफाइनल में चीनी ताइपे की Tai Tzu Ying से होगा

आज के मैच में जो भी जीतेगा उसका सामना आज दोपहर 2:30 बजे चीन के…

1 hour ago

COVID के समय में दोस्ती पर आधारित फिल्म बालकनी बडीज इस दिन होगी रिलीज

एक्टर अनमोल पाराशर और आयशा अहमद के साथ बालकनी बडीज में दिखाई देंगे। इस फिल्म…

1 hour ago

COVID-19 डेल्टा वैरिएंट है चिकनपॉक्स जितना खतरनाक, US की एक रिपोर्ट के मुताबित

यूनाइटेड स्टेट्स के सेंटर फॉर डिजीज कण्ट्रोल की एक स्टडी में ऐसा सामने आया कि…

1 hour ago

किसान मजदूर की बेटी ने CBSE कक्षा 12 के रिजल्ट में लाये पूरे 100 प्रतिशत नंबर, IAS बनकर करना चाहती है देश सेवा

उत्तर प्रदेश के बडेरा गांव की एक मज़दूर वर्कर की बेटी अनुसूया (Ansuiya) ने केंद्रीय…

2 hours ago

This website uses cookies.