आजकल की भागती-दौड़ती ज़िंदगी में, ज़िंदगी के लिए वक़्त किसके पास है? जवाब आप भी जानते हैं, और हम भी। आज शायद ही कोई हो जो खाने को 36 बार चबा के खाता हो, शायद ही कोई हो जो बिलकुल जंक फ़ूड ना खाता हो, और शायद ही कोई हो जो दादी-नानी की बनाई हुई उन पिन्नियों को खाने से पहले अपने फिगर के बारे में ना सोचे।

image

ऐसी ज़िंदगी में, हम खाना तो खाते हैं, लेकिन यह वो खाना नहीं है जो आज से 50-100 साल पहले हुआ करता था, और ना ही ये उतना शुद्ध है। पहले के समय में, पॉल्यूशन नहीं था, सब्ज़ी-फलों को जल्दी मार्केट में लाने के लिए व अच्छा दिखाने के लिए उनमें केमिकल नहीं डाले जाते थे, और इन सब के चलते मिट्टी व उनमें उगने वाले सब्ज़ी-फल, शुध्द व विटामिन से भरपूर होते थे।

लेकिन आजकल, हर सब्ज़ी को बड़ा दिखाने के लिए केमिकल डाला जाता है। हर फल को ‘गारंटी’ से मीठा बनाने के लिए इंजेक्शन लगाए जाते हैं। ऐसे में, हमारे उस शरीर का क्या जिसे जीने व अच्छे से काम करने के लिए विटामिनों की ज़रूरत है?

ऐसे में, काम आते हैं सप्प्लीमेंट्स। सप्पलीमेंट टेबलेट, कैप्सूल, पाउडर, ड्रिंक, बार आदि के रूप में होता है। इसमें विटामिन होते हैं, जैसे कि विटामिन ए, विटामिन डी आदि। उसके अलावा, इसमें मिनरल, बोटेनिकल्स, अमीनो एसिड, एन्ज़ायम, ओमेगा-3 आदि होते हैं।

  • जानें कि न्यूट्रिशनिस्ट का क्या कहना है?

न्यूट्रिशनिस्ट पूजा मखीजा का कहना है कि “मैं सप्प्लीमेंट्स लेने की सलाह देती हूँ क्योंकि हमें जितना न्यूट्रिशन अपने खाने की प्लेट से मिलना चाहिए, उतना हमें मिल नहीं पा रहा व इसका कारण यह है कि मिट्टी में ही अब इतना न्यूट्रिशन नहीं बचा है। हमारे शरीर को विटामन व मिनरल काफ़ी कम चाहिए होते हैं, इसलिए आपको कितने सप्प्लीमेंट्स  लेने चाहिए यह आपको आपके डॉक्टर/न्यूट्रिशनिस्ट से पता चलेगा। सप्प्लीमेंट्स अनावश्यक नहीं हैं, लेकिन मैं ये भी नहीं कहूँगी कि अपने खाने को रिप्लेस करके आप सप्पलीमेंट खाएं। यह सप्पलीमेंट है और इन्हे सप्पलीमेंट के रूप में ही लिया जाना चाहिए।”

तो बताइये, कब आप सप्प्लीमेंट्स की ओर बढ़कर इस भागती-दौड़ती जिंगदी में ‘असल’ में जीना शुरू करेंगे?

Email us at connect@shethepeople.tv