Stop Misogynistic Sarcasms : लड़कियों से यह बातें कहना रोकना होगा

Stop Misogynistic Sarcasms : लड़कियों से यह बातें कहना रोकना होगा Stop Misogynistic Sarcasms : लड़कियों से यह बातें कहना रोकना होगा

Sanjana

31 May 2022

हम इस बात से बिल्कुल परिचित हैं कि हमारा पुरुष प्रधान समाज लड़कियों के कैरेक्टर पर अक्सर उंगली उठाता है। उनके कपड़े, उनके रहने का तरीका, चलना, उनका बैठना, आदि जैसी चीजों को देखकर उनके कैरेक्टर को जज करना तो जैसे आम बात बन गई है। लेकिन यह स्थिति भयावह तो तब हो जाती है जब एक औरत ही औरत के खिलाफ हो जाती है। महिलाएं भी दूसरी महिलाओं के कैरेक्टर को जज कर देती हैं।

लडकियों को जज करने वाले Misogynistic Sarcasms :

1. कभी हंसते हुए नहीं देखा, एटीट्यूड बहुत है उसमें

अक्सर जब कोई किसी लड़की को ज्यादा मुस्कुराते हुए नहीं देखता तो वह आसानी से कह देता है कि उसमें बहुत एटीट्यूड है। लेकिन ऐसा भी तो हो सकता है कि शायद उसका स्वभाव ही ऐसा हो। लेकिन लोगों को तो बस मौका चाहिए बातें बनाने का।

2. देखो तैयार कैसे हुई है? यही तो तरीके हैं इनके अटेंशन पाने के

जब कोई महिला खुद को खुश रखने के लिए अपनी मर्जी के छोटे या अलग तरह के कपड़े पहनती है। और अच्छे से बाल और मेकअप करके निकलती है तो दूसरी महिलाएं जो उस तरह नहीं रहती उसे गलत कैरेक्टर की लड़की कहती है। जबकि यह उनका अधिकार है कि वह अपनी मर्जी से रहे।

3. इतने मेल फ्रैंड्स की क्या ज़रूरत है? यह सही नहीं है

हमारे समाज में आज भी जब किसी लड़के और लड़की को एक साथ देख लिया जाता है तो उसे गलत नजरों से ही जज करते हैं। लड़के और लड़की के बीच में दोस्ती का रिश्ता तो जैसे लोगों को समझ ही नहीं आता। किसी लड़की के मेल फ्रेंड्स होने पर लोग सवाल उठाने लगते हैं कि यह सही नहीं है।

4. रात को बाहर जाओगी तो ऐसा ही होगा न

लोग अपने लड़कों को घर में रखने की वजह अपनी लड़कियों से कहते हैं कि तुम बाहर मत निकलो। अगर रात को घर से बाहर निकलने पर किसी लड़की का रेप हो जाता है तो सवाल लड़के से नहीं बल्कि उसी लड़की से पूछा जाता है। कि तुम बाहर क्यों निकले इतनी रात को? तुम्हें नहीं पता कि रात को बाहर जाने से ऐसा ही होता है।

5. बॉस के साथ सोने से प्रमोशन आसान हो जाता है

ऑफिस में वर्किंग विमेन को जब प्रमोशन मिलता है तो लोग अलग-अलग तरह की बातें बनाते हैं। जैसे कि बॉस के साथ सोने से प्रमोशन तो आसान हो ही जाता है ना। वे यह बात बहुत आसानी से कह देते हैं। उसकी मेहनत को जज करने की बजाय उसके कैरेक्टर पर सवाल उठाने लगते हैं।

हमें किसी और को रोकने या समझाने से पहले महिलाओं की सोच को बदलना होगा। उन्हें रोकना होगा और समझाना होगा कि एक महिला अपनी आजादी से सब कुछ कर सकती है। ऐसा करने पर उसे जज करना महिलाओं को पीछे खींचने के बराबर है। हमें एक दूसरे का सपोर्ट बनना चाहिए ना की रुकावट। 

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