Speaking Up For Yourself: अपने अधिकारों के लिए बोलना गलत क्यों नहीं है

Speaking Up For Yourself: अपने अधिकारों के लिए बोलना गलत क्यों नहीं है Speaking Up For Yourself: अपने अधिकारों के लिए बोलना गलत क्यों नहीं है

Monika Pundir

03 Jun 2022

अपने अधिकारों के लिए बोलना गलत क्यों नहीं है?

यदि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है तो उसे समाज में रहते हुए अपने विचारों की स्वतंत्रता, स्वयं की रक्षा एवं व्यक्तिगत बातों के लिए भारतीय संविधान द्वारा मानव अधिकार प्राप्त हैं।

प्रत्येक व्यक्ति जिसका आत्मसम्मान मरा नहीं है, जीवित है, वह अपने अधिकारों पर प्रहार कभी सहन नहीं कर सकता और यह सही भी है। अपने अधिकारों का विओलेट होता देखकर भी मूक रहने वाले व्यक्ति एक बुद्धिहीन पशु के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं।

अपने अधिकारों के लिए लड़ना गलत नहीं है क्योंकि यदि यह सत्य होता तो कुरुक्षेत्र की भूमि में महाभारत के शंखनाद का कहीं व्याख्यान ना होता। श्री कृष्ण पांडवों के पक्ष में ना होकर कौरवों का साथ देते, परंतु ऐसा नहीं हुआ। अपने अधिकारों के लिए पांडवों ने युद्ध लड़ा और जीते भी अर्थात जब तक व्यक्ति अपने अधिकारों के लिए लड़ेगा नहीं तब तक उसे यह अधिकार प्राप्त नहीं हो सकते।

अपने अधिकारों के हनन का दृश्य यदि आप शांति से देखेंगे तो आप एक शोषणयुक्त समाज के निर्माताओं में से एक होंगे। परंतु यदि आप एक शोषणपूर्ण समाज का निर्माण नहीं करना चाहते हैं तो अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बने और उनकी रक्षा के लिए प्रखर विरोधी भी। क्योंकि-

            "राम सहायक उनके होते

           जो होते आप सहायक।"

पुरातन काल से वर्तमान काल तक अधिकारों हेतु अनेक मुहिम छेड़ी गई जिन्हें आज भी ससम्मान याद किया जाता है, चाहे वह परतंत्र भारत में स्वतंत्र सेनानियों का स्वतंत्रता के अधिकार के लिए युद्ध हो, ऑर्थोडॉक्स समाज व अशिक्षित समाज के समक्ष सावित्रीबाई फुले द्वारा महिला शिक्षा अधिकारों का युद्ध हो अंत में निष्कर्ष यही होता है कि बिना लड़े कभी भी विजय प्राप्त नहीं की जा सकती।

उसी प्रकार अपने अधिकारों के लिए दूसरे के सहारे से हट कर खुद को समाज या व्यक्तिगत विचारों के लिए युद्ध करना होगा।

अंतत: अपने अधिकारों के लिए लड़ना गलत नहीं है क्योंकि यह अधिकार हमें संविधान ने दिया है। शोषणकर्ता के ही समान अपराधी शोषण सहन करने वाला व्यक्ति भी होता है इसलिए अपने साथ हो रहे शोषण व मानवाधिकारों के हनन के प्रखर विरोधी बन उनसे निडरता के साथ लड़े क्योंकि अपने अधिकारों के लिए लड़ना गलत नहीं है।

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