कोरोना की वैक्सीनशन ड्राइव साल के शुरवात से ही अलग-अलग चरणों में चल रही है। अभी इस पे हुए रिसर्च के हिसाब से ये बात सामने आई की मर्दों के मुकाबले महिलाओं ने बहुत काम वैक्सीन के शॉट्स लिए हैं। कोरोना की वजह से हर सेक्टर में बढ़ते जा रहे जेंडर गैप का वैक्सीनशन ड्राइव पे भी पूरा असर दिखा है। अप्रैल से पहले और अप्रैल के बाद हुए इस सर्वे में ये सारी बातें सामने आई है।

क्या कहता है वैक्सीनशन ड्राइव का सर्वे?

सर्वे के मुताबिक अप्रैल 10 को महिलाओं के मुकाबले करीब 2 प्रतिशत ज़्यादा मर्दों ने वैक्सीन लगवाई थी। इस गैप में बढ़ोतरी देखते हुए दो हफ्ते बाद करीब 12 प्रतिशत ज़्यादा मर्दों ने महिलाओं की तुलना में वैक्सीन लिया। मई के पहले हफ्ते में 24 प्रतिशत ज़्यादा मर्दों ने वैक्सीनशन ड्राइव में हिस्सा लिया। ये डिवीज़न अब 15 प्रतिशत पे खड़ा है। ये सारे कैलकुलेशन डेली वैक्सीन दोसेस के मूविंग एवरेज के बेसिस पे किए गए हैं।

वैक्सीन में सेक्स रेश्यो है काफी अलग

भारत में वैसे भी सेक्स रेश्यो की बहुत ख़राब हालत है। ऐसे में महिलाओं को उनके हक़ की वैक्सीन भी ना मिलना बहुत गलत है। वैक्सीनशन ड्राइव में इस कदर जेंडर स्टेटिस्टिक्स शामिल है की शुरुवात से ही महिलाओं को मर्दों की तुलना में 6 प्रतिशत कम वैक्सीन मिला है। डेटा के मुताबिक सभी राज्यों ने जेंडर के हिसाब से वैक्सीन में क्लैरिटी नहीं दिखाई है जिस कारण महिलाओं को वैक्सीन डोज़ सही से नहीं मिल रहे हैं।

क्यों हो रहा है ऐसा?

इसके कई कारण है जिनमें से प्रमुख है हेल्थलाइन वर्कर्स को प्रायोरिटी देना जिनमें सबसे ज़्यादा मर्द है। शोध बताते हैं की रूरल इंडिया में 10 में से 3 और अर्बन इंडिया में 10 में से 4 महिलाएं ही केवल इंटरनेट चलाना जानती हैं जिसके कारण कोविन पोर्टल में रजिस्टर करने में उन्हें दिक्कत हो रही है।

पैट्रिआर्की का भी है योगदान

एक रिसर्च में ये बात सामने आई है की भारत में सिर्फ 35 प्रतिशत महिलाएं ही अब वर्क फ़ोर्स का हिस्सा है। कई महिलाएं अब घर में हैं और इस वजह से उन्हें वैक्सीन की हक़दार मन नहीं जा रहा है। कई होममेकर्स के लिए ऐसे में वैक्सीन लेने की समस्या बहुत बढ़ गई है। अगर जल्द भी इसका कुछ सलूशन नहीं निकाला गया तो बहुत मुश्किल हो जाएगी।

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