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काम और जीवन के बीच संतुलन बनाना क्यों ज़रूरी है?

Published by
Udisha Shrivastav

बहुत लोगों के लिए, खासकर वो जो अपनी पेशेवर ज़िंदगी को काफी गंभीरता से लेते हैं, काम और जीवन अलग-अलग चीज़ें नहीं होतीं। वे अपने काम में ही अपनी ख़ुशी और सफलता ढूंढ़ते हैं। हम यह नहीं कह सकते कि यह ज़रूरी नहीं है लेकिन हर चीज़ का अपना एक स्थान होता है। और इस सन्दर्भ में काम जीवन का सिर्फ एक हिस्सा है। इसलिए हमे इन दोनों को साथ में संतुलित करना ज़रूरी है। आईये ऐसा करने के पांच कारण देखते हैं।

अनुशासित जीवन का उदय

अगर आप अपने काम और अपनी व्यक्तिगत ज़िंदगी को साथ में बखूबी संभल लेते हैं तो आपका जीवन काफी अनुशासित हो सकता है। महिलाएं इस तरह से एक अच्छी समय प्रबंधक बन सकती हैं। वे अपने व्यस्तता भरे जीवन को समय के आधार पर बाँट सकती हैं। इतना ही नहीं, अनुशासित जीवन की कामना हर व्यक्ति करता है और एक अच्छे काम और व्यक्तिगत जीवन का मिश्रण आपको यह मौका दे सकता है।

तनाव और क्रोध से दूर

आपने यह अक्सर महसूस किया होगा कि जब आपका कोई ज़रूरी काम रुक जाता है, तब आप भारी रूप से तनावग्रस्त और क्रोधी महसूस करते हैं। यह तनाव उस दवाब की वजह से आता है जिसकी वजह से आप अपना सौ प्रतिशत योगदान अपने काम और अपने व्यक्तिगत जीवन में नहीं दे पाते। एक संतुलित दिनचर्या आपको इस तकलीफ से दूर रखती है।

जीवन को रोचक बनायें

आज कल लोग हसीं मज़ाक तो करते दिखते हैं लेकिन वे स्वभाव से इतने खुश मिज़ाज़ और रोचक नहीं लगते। निश्चित रूप से इसका कारण यही है कि वे अपने जीवन में संतुलन नहीं ला पा रहे हैं। हमेशा वे काम के भोझ में दबे रहते हैं। लेकिन अगर काम और व्यक्तिगत ज़िंदगी के बीच आपने एक अच्छी तालमेल बैठा रखी है, तो आपको निश्चिन्त रहना चाहिए। आप काफी खुश रहेंगे और आपका यह स्वभाव आपको स्वयं ही रोचक बना देगा।

अपने शौक भी पूरे करें

बहुत लोगों को ट्रेवल करना पसंद है लेकिन वे काम की वजह से समय नहीं निकाल पाते। बहुत लोगों को लिखना पसन्द है, उनका भी शायद यही हाल होगा। लेकिन बात यह है कि जब आप अपनी प्रतिभा को और अपनी रूचि को भरपूर समय नहीं देते हैं, तब वह समय के साथ-साथ खुद ही आपके अंदर से निकल जाती है। एक वक़्त पर तो आप खुद ही उस कार्य को करने का आत्म विश्वास खो देते हैं। लेकिन हमे यह याद रखना ज़रूरी है कि काम हर व्यक्ति के पास होता है। लेकिन शहेंशाह वही होता है जो अपने काम और व्यक्तिगत ज़िंदगी के साथ अपने शौकों को भी पूरा कर सकता है।

जीवन का भरपूर आनंद

ऐसा लगता है कि हम सभी ज़िंदा और शान से रहने के लिए ज्यादा और जीवन का आनंद लेने के लिए कम जीते हैं। जीवन का आनंद लेने के आपको कुछ अलग से करने की ज़रूरत नहीं है। यदि आप अपने कार्य को अच्छे से करें, तो वह भी काफी आनंददायक हो सकता है।

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