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हम बलात्कार के बारे में क्या बात करते हैं और क्या नहीं करते: सौहाला अब्दुलली

Published by
Aastha Sethi

सौहाला अब्दुलली पहली भारतीय सर्वाइवर है जो बलात्कार के बारें में सार्वजनिक बात करती है. अब्दुलली का किशोरावस्था में बलात्कार हुआ था. अब्दुलली ने एक महिला पत्रिका में अपनई कहानी साझा थी था जो तीस साल बाद, निर्भया २०१२ के समय, काफी वायरल हुई थी. वह बोस्टन में बलात्कार संकट केंद्र की प्रमुख है. दुनिया भर के सर्वाइवर और खुद के अनुभव द्वारा उन्होंने अपनी नवीनतम पुस्तक – ‘व्हाट वी टॉक अबाउट व्हेन वी टॉक अबाउट रेप’ लिखी है.

#MeToo के चलते, अब्दुलली, सबके बारे में उचित प्रश्न पूछती है जिसके मारें में बात करते है या नहीं.
मुंबई में जन्मी, अब्दुलली ने ब्रांडिस यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र व सोशियोलॉजी में बी.ए. और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एम. ए. इन कम्युनिकेशन्स की है. फ़िलहाल व नई यॉर्क में सपरिवार रहती है.

हमने अब्दुलली से उनकी पुस्तक- ‘व्हाट वी टॉक अबाउट जब वी टॉक अबाउट रेप’, और उन सब विषयों पर बात की जो अक्सर हम नहीं करते.

‘व्हाट वी टॉक अबाउट व्हेन वी टॉक अबाउट रेप’

अपनी पुस्तक के माध्यम से, अब्दुलली ने काफी ज़रूरी प्रश्न पर बात की है. उन्होंने पुस्तक क बारें में बताया कि किताब पिछले कुछ सालों के विचारों का नतीज़ा है. “मुझे मालूम है, कुछ किस्सों के बारें में लिखना असंभव लगता है, क्यूंकि मेरा बलात्कार मेरे जीवन में सबसे बड़ी घटना नहीं है. मैंने इस मुद्दे विचार किया और काम किया. दुनिया में कई कहानियाँ है.” अब्दुलली

बलात्कार पर पर्याप्त बात नहीं होती

अब्दुलली का मानना ​​है कि हमारे समाज में बलात्कार के बारे में ही बात करना गलत मन जाता हैं. 1983 में, महिला पत्रिका मनुशी में अब्दुलली ने अपना किस्सा प्रकाशित किया जिससे काफी हलचल हुई थी.
भारत के बारे में, अब्दुलली का कहना है कि भारत में महिलाएं, शिक्षित मध्यम वर्ग में भी शर्म के चलते सार्वजनिक रूप से बलात्कार रिपोर्ट नहीं करती है.

“समाज की सोच अलग अलग है. कुछ का मानना ​​है कि विवाह में कन्सेंट कोई मुद्दा नहीं. कुछ सोचते हैं कि सेक्स वर्कर्स के साथ बलात्कार नहीं हो सकता. यदि आप कुंवारी हैं तो बलात्कार बुरा है, वही कुछ सोचते हैं कि यह बुरा नहीं है” – अब्दुलली

हम अभी तक कन्सेंट का अर्थ नहीं समझ पाए, और वही अब्दुलली का कहना है कि वह इस धारणा से असहमत हैं कि सभी समाज एक जैसे हैं। विभ्भिन समाजों में कन्सेंट के लिए अलग-अलग भावना है.

“हम ज़िन्दगी में आगे बढ़ने वाली महिलाओं को भी जज करते है, और न बढ़ पाने वाली को भी”

ट्रामा पर भी कई गलत धारणाएं हैं. अब्दुलली का मानना ​​है कि सर्वाइवर के सर पर तलवार रख दी जाती है.”हम उन लोगो को बांध कर रखना चाहते है”

दुनिया भर में, चाहे वह आयरलैंड में महिलाएं हैं, जो हैशटैग #ThisIsNotConsent के साथ फोटो पोस्ट कर आयरलैंड के सिस्टम पर गुस्सा हो या राष्ट्रपति ट्रम्प की फोर्ड पर टिप्पणी हो, अब्दुलली का मन है की “सर्वाइवर पूरा बोझ डाल देना बकवास है!”

बलात्कार जेंडर स्पेसिफ़िक नहीं

उनका कहना है कि बलात्कार जेंडर स्पेसिफ़िक नहीं है. उन्होंने अपनी पुस्तक में एक पुरुष की आपबीती का उल्लेख भी किया है. “पुरुषों के के साथ बलात्कार पर भी बातचीत नहीं होती. यह, कई अन्य चीजों में से एक है जिसके बारे में हम बात नहीं करते”

बलात्कार और शक्ति

पुस्तक में अब्दुलली ने बलात्कार और शक्ति के बीच संबंधों पर भी चर्चा की. “यह हमेशा शक्ति के बारे में है. पर हमेशा सिर्फ और सिर्फ शक्ति के बारें में नहीं”

पुरुषों के लिए यह पुस्तक और भी महत्वपूर्ण है, वह कहती है, “हर किसी के लिए किताब महत्वपूर्ण है”, यह समाज के हर वर्ग के लिए है. पुस्तक के पहले ड्राफ्ट पर अब्दुलली ने लगभग छह महीने का समय लिया, जो तीन दशक का परिणाम है. “6 महीने पहले ड्राफ्ट पर, फिर कुछ महीने संपादन पर, अलग-अलग देशों के संपादक द्वारा” अब्दुलली

लेखन प्रक्रिया

“लोगों की कहानियों ने पुस्तक की सरंचना में काफी योगदान दिया, जो सब बातचीत का परिणाम है”

पुस्तक अब्दुलली की दुनिया भर के सर्वाइवर से बातचीत का समूह है. व्यक्तिगत कहानियां ज़्यादा बेहतर उल्लेख करता है. तो, इस लेखन प्रक्रिया को कैसे किया गया है? “यह शानदार था!” वह याद करती है कि हर व्यक्ति से की हुई बातचीत मददगार थी”

“यदि अधिकार कागज पर मौजूद नहीं, तो बदलाव के लिए क्या उम्मीद?” – अब्दुलली

आखिरकार, हमने उनसे पूछा कि 2012 निर्भया बलात्कार ने देश की चुप्पी तोड़ी थी, पर इस साल कथुआ बलात्कार के मामले में मानवता के अस्तित्व पर सवाल आ गया था. तीस साल पहले और आज भी कुछ नहीं बदला. तो, सबसे तात्कालिक परिवर्तन क्या है कि हमारे देश में आना ज़रूरी है? जिससे पुरुष की मानसिकता बदल जाए?

उनका जवाब, “मैं किसी एक बदलाव के बारे में नहीं सोच रही जो सब बदल देगा. मुझे लगता है कि लॉ द्वारा समानता सुनिश्चित करने के साथ है ही बदलाव आएगा.”

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