कोरोना डेल्टा स्ट्रेन पिछले 6 महीनों में 60 से ज्यादा देशों में अपने पैर पसार चुका है। इसके कारण ऑस्ट्रेलिया से यूएसए तक का सफर करने में लोगों को काफी समस्या हो रही है। डेल्टा वेरियन के कारण इनफेक्शंस में अचानक तेजी आई है जिसके कारण यूके गवर्नमेंट को इस महीने सब कुछ खोलने के प्लांस पर दोबारा सोचने की जरूरत होगी।

कोरोना डेल्टा स्ट्रेन

भारत में कोरोना वायरस के जिस वेरिएंट में पहले से ही इनफेक्शंस को बढ़ा दिया था डॉक्टर से उस पर जाना चाहते हैं कि क्या यह और खतरनाक हो सकता है ?

कोरोना के डेल्टा स्ट्रेन से संक्रमण दर बढ़ने  की आशंका लगाई जा रही है। इस वैरीअंट से वैक्सीन का प्रभाव भी शरीर पर कम देखने को मिल सकता है। इन्हीं कारणों से कोरोना के इस डेल्टा वेरिएंट को ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है।

चेन्नई के अपोलो हॉस्पिटल के एक फिजीशियन अब्दुल ग़ाफ़ुर ने कहा कि हमें डेल्टा वैरीअंट के ऊपर ज्यादा रिसर्च करने की जरूरत है व देखने की जरूरत है कि क्या इस पर हुई सभी रिसर्च सही है या नहीं।

ये  वैरीअंट ज्यादा खतरनाक क्यों  ?

कोरोना डेल्टा स्ट्रेन को ज्यादा खतरनाक इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इससे मरीज को सुनाई देने में परेशानी, गैस्ट्रिक दिक्कतें और ब्लड क्लॉट्स के कारण गैंग्रीन होने का भी खतरा माना जा रहा है।

गफूर ने कहा कि पिछले साल हमने यह सीखा कि यह वायरस हमारा नया शत्रु है पर यह इस साल बदलकर और भयावह हो चुका है।

अभी तक कोरोना मरीजों में पेट दर्द, नजला, उल्टी, भूख खत्म होना, सुनने में दिक्कत, और जोड़ों में दर्द की समस्या देखने को मिलती थी लेकिन कई सारे अन्य मरीजों में इन से काफी अलग लक्षण देखने को मिलते हैं।

कई मरीजों में ब्लड क्लॉट्स जैसी समस्या देखने को मिलती है जिससे गैंग्रीन हो सकता है।

हालांकि अभी भी कोरोना डेल्टा स्ट्रेन पर काफी रिसर्च होना बाकी है जिसके बाद हमें इससे निपटने के उपाय पता चलेंगे।

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