नींद हमारे जीवन में एक बहुत ज़रूरी रोल प्ले करती है। हर दिन चैन से 8 घंटे की नींद पूरी करना हमरी मेन्टल और फिजिकल हेल्थ के लिए बहुत ज़रूरी है। 8 घंटे की शांती भरी नींद हमे एक रिलैक्स्ड स्टेट ऑफ़ माइंड देती है। एक रीलैक्स्ड और हेअल्थी बॉडी के लिए हमे रोज़ प्रॉपर पोस्चर में प्रॉपर नींद लेनी चाहिए। तकरीबन सभी लोग अपना जीवन मटेरिअलिस्टिक चीज़ों के पीछे भागत हुए बिता देते हैं, रोज़ की भागदौड़ में तकरीबन सभी लोग अपने जीवन की अनमोल नींद को भी गवा बैठते हैं। इससे समझौता करते रहते हैं जो की गलत है। रिपोर्ट्स के अनुसार,  कम सोना या बिलकुल न सोना तो नुकसानदेह है ही पर ज़्यादा सोने के भी ढेरों नुक्सान है। आज वर्ल्ड स्लीप डे पर हम जानेंगे कम सोने और ज़्यादा देर तक सोने के नुक्सान।

आइये सबसे पहले जानते हैं ओवर -स्लीपिंग के नुक्सान

  • कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट
  • डिप्रेशन
  • इन्क्रीज़ड इनफ्लेम्मेषण
  • इन्क्रीज़ड पेन
  • इम्पेयर्ड फर्टिलिटी
  • मोटापे का ज़्यादा खतरा
  • डाइबिटीज़ का ज़्यादा खतरा
  • हार्ट डिसीज़ का ज़्यादा खतरा
  • स्ट्रोक का ज़्यादा खतरा

नींद ब्रेन में एक इम्पोर्टेन्ट रोल प्ले करती है, क्योंकि ब्रेन वेस्ट बायप्रोडक्ट्स को साफ करता है, न्यूरोट्रांसमीटर को बैलेंस करता है और दिमाग को आराम देने की प्रक्रिया करता है। दोनों ही शार्ट और लॉन्ग एक्सट्रीम्स पर, मूड और मेन्टल हेल्थ पर नींद का प्रभाव पड़ सकता है।

स्लीपलेसनेस  के इफेक्ट्स

समय पर नींद न पूरे करने भी हमे बहुत सारे हेल्थ डिसऑर्डर्स का सामना करना पड़ता है। आइये जानते हैं स्लीपलेसनेस के इफेक्ट्स:

  • हार्ट डिज़ीज़
  • हार्ट अटैक
  • हार्ट फेलियर
  • इर्रेग्युलर हार्टबीट
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • स्ट्रोक
  • डाइबीटीज़

कुछ एस्टिमेट्स के अनुसार, इन्सोमनिआ से पीड़ित 90% लोग से पीड़ित होते हैं क्योंकि वो समय पर नहीं सोते और नींद पूरी नहीं करते । समय के साथ, नींद की कमी और नींद संबंधी डिसऑर्डर्स, डिप्रेशन के सिम्पटम्स में बढ़ावा दे सकते हैं। 2005 के नींद में अमेरिका के सर्वे में, जिन लोगों को डिप्रेशन या स्ट्रेस में पाए गए थे, उनके रात में छह घंटे से कम सोने की संभावना थी।

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