एक ब्लेड की मदद से युवा लड़कियों के बाहरी जननांगों (external genitalia) को हटा देना फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (Female genital mutilation) कहलाता है। एफजीएम में लड़कियों का लेबिया (labia) और क्लिटोरिस (clitoris) हटाया जाता है। यह सब करने का कोई मेडिकल कारण नहीं होता है, न ही ऐसा करना स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। आइए यहाँ जानते हैं फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन से जुड़ी 5 जरूरी बातें।

1. फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन के पक्ष में रहने वाले लोगों का मानना होता है कि लड़कियों के बाहरी जननांगों को हटाकर वो अपने काम पर ज्यादा ध्यान दे पाती हैं। साथ ही, फिर यह लड़कियां  लड़कों के बारे में भी सोचना बंद कर देती हैं। और जिन लड़कियों के बाहरी जननांगों को नहीं हटाया जाता है वो लड़कियां अपनी सेक्शुअल भावनाओं पर काबू नहीं कर पाती हैं, व गलत काम कर बैठती हैं।

2. फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन की यह प्रथा अफ्रीका, यूरोप, ब्रिटेन, फ्रांस, उत्तरी अमेरिका के कई भागों में होती है।

3. गर्मियों में यूरोप, अमेरिका और अन्य क्षेत्रों से हजारों की संख्या में लड़कियों को एफजीएम (फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन) के लिए अफ्रीका में लाया जाता है। यहाँ तक की, स्कूल की छुट्‍टियों को ‘कटिंग सीजन’ के नाम से भी जाना जाता है। रिपोर्टस के मुताबिक प्रति वर्ष दुनिया में तीस लाख लड़कियां एफजीएम की शिकार होती हैं।

4. वेबदुनिया हिंदी के अनुसार अफ्रीका के कई देशों में इस प्रथा को अवैध करार दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद भी इस प्रथा के समर्थकों, प्रचारकों का कहना है कि इस बात की कोई उम्मीद नहीं है कि पश्चिमी देशों के नेता उन्हें ऐसा करने से रोक सकेंगे। इसी के साथ, केन्या की कीसी जनजाति के एक सांस्कृतिक नेता डिक्सियन किबाजेंडिया का कहना है कि अगर हम इस प्रथा को बंद कर देते हैं तो हम पश्चिम के गुलाम बन जाएंगे। अफ्रीका में संस्कृति ही सब कुछ है अगर आप संस्कृति से दूर हो जाते हैं तो आप अपने समुदाय के भी नहीं रहते हैं। भले ही इसके चलते लाखों लड़कियों को भयानक शारीरिक और मानसिक पीड़ा ही क्यों ना उठानी पड़े।

5. केन्या की एंटी एफजीएम प्रचारक एस्टर ओगेटो का कहना है कि लड़कियां चाहे कहीं भी रह रही हों, समुदाय के नेता उनके परिवार पर इतना दबाव डालते हैं कि उन्हें दबाव में झुकना ही पड़ता है। एफजीएम न होने पर लड़कियों और परिजनों को समाज से बाहर किए जाने का खतरा होता है और उन्हें बहुत बुरा भला कहा जाता है। एफजीएम की यह प्रथा बेहद गलत और दर्दनाक है। इसे किसी भी तरह से बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।

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