छाया डबास के इंस्टाग्राम पेज बातें का उद्देश्य लोगों में बात-चीत शुरू कराना है

Published by
Kriti Jain

आज कल की तेज़ दौड़ती हुई ज़िन्दगी में जहाँ हर कोई जल्दी में है, हम सबसे ज़्यादा क्या मिस करते हैं? अपने करीबी दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ वो खुले दिल से बातें करना? या एक दूसरे से अपने मन की बातों के वो विशेष लम्हें? दिल्ली यूनिवर्सिटी की एलुम्ना छाया डबास, गहरी बात-चीत के सिलसिले को फिर से चालु करने के मिशन पर हैं जो रोजमर्रा की जिंदगी में कहीं खो गया है।

‘बातें’- बात-चीत का खोया हुआ सिलसिला दोबारा शुरू करना

छाया का इंस्टाग्राम पेज “बातें”, जिसका अर्थ है वार्तालाप, आर्टिस्टिक कोलैबोरेशन, कवितायें, पिक्चर स्टोरीज़, आभास, इत्यादि चीज़ें दर्शाता है.

बातें- एक कॉन्सेप्ट और एक माध्यम के रूप में – पीछे रह गया है। आप और हम, जो आज की तारीख में सिर्फ डेडलाइन्स और टाइमलाईन्स के पीछे भाग रहे हैं, रुकना तो जैसे भूल ही गए हैं। ‘बातें’ उन वार्तालापों को फिर से शुरू करने के लिए आया है,” कहती हैं २२ वर्षीय छाया.

“टेक्नोलॉजी समान विचारधारा वाले लोगों और विचारों से जुड़ने और सीखने में मदद करती है। एक लेखिका के तौर पर, मेरे विचार पूरे विश्व से आते हैं। टेक्नोलॉजी कलाकारों को उनकी जरूरतों के अनुसार ले जाती है।”- छाया

“वार्तालाप हमारे जीवन को थोड़ा और यादगार बनाते हैं। आप अभी भी एक हाथ से लिखी हुई किसी चिट्ठी को किसी चैट से ज़्यादा संभल कर रखेंगे। और यही बात पोस्ट कार्ड्स और पुरानी किताबों के लिए भी कही जा सकती है,” उन्होंने कहा

छाया की जर्नी

अपने बचपन की एक झलक दिखाते हुए, छाया ने बताया कि उनकी परवरिश एक इच्छुक परिवार में हुई है और यही एक महत्वपूर्ण कारण है कि उनका रुझान शब्दों की ओर है। इसलिए कहानियों की खोज और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की ज़रूरत उन्हें बहुत ही कम उम्र में समझ आ गई थी।

“मेरे दादाजी एक प्रकाशित लेखक हैं, लिंग्विस्टिक्स में पीएच.डी. होल्डर, एक पूर्व प्रोफेसर और एक किसान के बेटे हैं। मेरे पिताजी को भी शब्दों और पुस्तकों की लगन है और मेरी दादी और मेरी माँ पूर्व शिक्षक रह चुकी हैं। इसके अलावा, मेरे नाना-नानी पार्टीशन के समय के सर्वाइवर हैं।”

ये छाया के कॉलेज के वर्षों की बात है कि उन्होंने लेखन को अपने करियर के रूप में स्वीकार करने का निर्णय लिया था।

“जब मैं अपने कॉलेज के दूसरे वर्ष में थी, मैंने अपने शहर को और अधिक एक्स्प्लोर करने के लिए, अजनबियों और यहाँ तक ​​की ज्ञात प्रेरणाओं के साथ अधिक बातचीत करने के लिए खुद को स्वतंत्र पाया। इसलिए, कविताओं की एक सीरीज़ से मेरी डायरी भर गई। और यही एक इंस्टाग्राम ब्लॉग के रूप में अनुवादित हुई, जिसका नाम मैंने ‘बातें’ रखा,” वह कहती हैं।

“बातें काफी अच्छी गति से बढ़ रहा है। प्रशंसा से फीचर्स तक, यह अपनी छाप और जगह बना रहा है और हम आशा करते हैं कि यह बढ़ता रहे और लोगों के बीच बातें होती रहें,” वह चाहती हैं.

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कैंसर के साथ छाया की लड़ाई

“मुझे 13 साल की उम्र में ईविंग सार्कोमा नामक एक अजीब सा ट्यूमर डायग्नोज़ हुआ था” वह बताती हैं। वह कहती हैं कि इस बीमारी के खिलाफ उनकी लड़ाई ने उन्हें और अधिक ध्यान केंद्रित किया और किसी भी लड़ाई से लड़ने के लिए अधिक तैयार किया।

हालांकि, उनका कहना है कि उनके जीवन का कठिन दौर उन्हें लिखने से रोक नहीं पाया।

“लंबे समय तक चला वो इलाज एक बुरे सपने की तरह था जिसे मैं भूलना चाहूंगी, इस अनुभव ने मुझे एक मज़बूत व्यक्ति बना दिया जैसी कि मैं पहले थी। मैंने पाया कि मैं पहले के मुकाबले अपने विचार ज़्यादा लिखने लगी थी। निश्चित रूप से, मैं ज़िन्दगी में अपने छोटे सुखों और चमत्कारों से परिपूर्ण दुनिया की सराहना पहले से ज़्यादा करने लगी थी,” वह बताती हैं.

टेक्नोलॉजी और लेखन- सशक्तिकरण का एकदम सही मिलान

छाया को लेखन की क्रिया काफी एम्पॉवरिंग लगती है। किंग्स कॉलेज, लंदन में डिजिटल कल्चर और सोसाइटी में अपनी मास्टर की डिग्री हासिल करने की उत्सुक छाया, को इस बात पर बहुत विश्वास है कि लेखन और टेक्नोलॉजी का मिश्रण दुनिया में एक बेमिसाल बदलाव ला सकता है।

“टेक्नोलॉजी ने ‘बातें’ के बढ़ने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मैंने कनेक्टिविटी की सहूलियत के कारण पूरे विश्व में कलाकारों से कलैबोरेट किया है। टेक्नोलॉजी समान विचारधारा वाले लोगों और सामान विचारधाराओं से सीखने से जुड़ने में सहायता करती है। एक लेखक के रूप में, मेरे विचार पूरे विश्व से आते हैं। टेक्नोलॉजी कलाकारों को उनकी जरूरतों के अनुसार भूगोल को ज़्यादा ज़ाहिर करने में मदद करती है,” उन्होंने कहा

लेखन के साथ अपने संबंध के बारे में बताते हुए छाया ने कहा कि लेखन उन जवाबों पर सवाल उठाने में मदद करती है जो हमें इतने सालों में दिए गए हैं और इस दुनिया के बारे में उनके चिंतन को स्पष्ट करती है। इसके अलावा, वह अपने कम मगर वफादार दर्शकों के साथ दुनिया को देखने का अपना नज़रिया बाँट सकती हैं।

पढ़िए :“इनोवेशन एन्त्रेप्रेंयूर्शिप का दिल है” – सुरभि देवरा

कोशिशें और आपत्तियॉँ

उनकी जर्नी में अपनी अलग चुनौतियाँ और परेशानियाँ रही हैं मगर समय के साथ उन्होंने उन पर पार पाना सीख लिया है।

“मेरी मुख्य चुनौती यह है कि मैं कभी भी अपना मकसद और ऑरिजिनेलिटी ना खो दूँ, जिनके लिए मैं और ‘बातें’ काम करते हैं। हर किसी के जीवन में आलोचक होते हैं, चाहे वे जो भी करते हों। इसका समाधान ये है कि इसे पॉज़िटिव ढंग से लेना चाहिए और अपनी खुद की नज़रों में सुधार करते हुए अपने लक्ष्य के प्रति काम करना चाहिए।”

युवा एन्त्रेप्रेंयूर्स के लिए उनकी सलाह

युवा एंट्रेप्रेन्योर्स के लिए उनकी सलाह यह है कि चाहे कोई किसी भी क्षेत्र में काम करता हो, उन्हें क्वालिटी, कंट्रीब्यूशन, क्रिएटिविटी और सत्यता पर ध्यान देना चाहिए।

“हमेशा अपने लेखन में एक निजी स्पर्श जोड़ें, उसको अपने ढंग से प्रस्तुत करें और ऐसा बनाएं कि वो सबके लिए हो,” उन्होंने सुझाव दिया

“लेखन उन जवाबों पर सवाल उठाने में मदद करती है जो हमें इतने सालों में दिए गए हैं और इस दुनिया के बारे में मेरे चिंतन को स्पष्ट करती है। इसके अलावा, मैं अपने कम मगर वफादार दर्शकों के साथ दुनिया को देखने का अपना नजरिया बाँट सकती हूँ।”

भविष्य योजनाएँ

‘बातें’ को बुलंदियों तक पहुँचाने के अलावा, छाया की आकांक्षा है कि वे विज़ुअल स्टोरीटेलिंग और पॉडकास्ट सीरीज को एक्स्प्लोर करें। इन दिनों वह अपनी कविता संकलन पर काम कर रही हैं और किसी दिन कैंसर के बारे में एक अध्याय लिखना चाहती हैं, क्यूंकि वे खुद उससे गुज़र चुकी हैं।

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