25 वर्ष की पहलवान पूजा ढांडा के पुरस्कार चयन समिति द्वारा अर्जुन पुरस्कार के लिए चुने जाने के बाद, उसे सोमवार को भारत की विश्व चैंपियनशिप टीम में रखा गया है। पूजा ओलंपिक श्रेणियों में बर्थ बुक करने में असफल रही, इस प्रकार वह 14 से 22 सितंबर तक कजाकिस्तान के नूर सुल्तान में होने वाली विश्व चैंपियनशिप टीम में अपने सपनों को पूरा करने के उद्देश्य से वहाँ खेलेंगी। यह पहला ओलंपिक क्वालीफाइंग इवेंट है और पूजा मजबूत दावेदारों में से एक है। इस बीच, एक और स्टार पहलवान नवजोत कौर भी टीम का हिस्सा बनीं।

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 पूजा ने मैट पर खड़े होते ही चैंपियनशिप में अपना स्थान सुरक्षित कर लिया क्योंकि सोमवार को लखनऊ में ट्रेल्स में उन्हें चुनौती देने के लिए कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं था।

सफलता हासिल करने से पहले, प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए पूजा का सफर परेशानी भरा रहा, लेकिन हरियाणा की लड़की ने हार नहीं मानी। कठोर परिश्रम और लगन के साथ वह अपने घुटने की चोट से उबरने में  कामयाब रही, उससे उन्हें ठीक होने में लंबा समय लगा। पूजा ने अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में वापसी की और 57 किग्रा वर्ग में गोल्ड कोस्ट में 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में सिल्वर मैडल जीता। उन्होंने बुडापेस्ट में विश्व चैंपियनशिप में ऊर्जा और प्रदर्शन के समान स्तर पर प्रदर्शन किया, जहां उन्होंने उसी भार वर्ग में ब्रोंज मैडल जीता।

पिछले अक्टूबर में पूजा ने एक इलाइट क्लब में प्रवेश किया क्योंकि वह कुश्ती विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीतने वाली केवल चौथी भारतीय महिला गेंदबाज बनीं। पूजा से पहले विश्व चैम्पियनशिप में जीतने वाले अन्य तीन खिलाड़ी अलका तोमर (2006), गीता फोगट (2012) और बबीता फोगट (2012) हैं।

पूजा के पिता हिसार में हरियाणा पशुपालन विभाग में ड्राइवर के रूप में काम करते हैं। शुरुआत में, पूजा ने जूडो में ट्रेनिंग ली थी । बाद में उन्होंने 2004 में हिसार के महावीर स्टेडियम में कुश्ती कोच सुबाष चंदर सोनी के यहाँ ट्रेनिंग ली ।

“मैं अभी एक नेशनल कैंप के लिए लखनऊ में हूँ। मैं ट्रेनिंग ले रही थी और मेरे कोच ने कहा… पूजा… तेरा नाम अर्जुन अवार्ड के लिए दिया गया है। खबर सुनते ही मैं बहुत खुश और उत्साहित हुई। यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी। मैं अपने माता-पिता को बताना चाहती थी , लेकिन इस बात की ठीक से पुष्टि होने का इंतजार कर रही थी। ”पूजा ने कहा, जो अब बहुत खुश है।

पाँच मिनट बाद, मुझे बजरंग (पुनिया) से मेरी अर्जुन पुरस्कार की सिफारिश के बारे में बधाई मिली। उन्होंने मुझे एक लिस्ट भेजी थी जिसमे  पुरस्कार के लिए चुने जाने लवाले लोगो के नाम थे। मैंने तुरंत अपने माता-पिता को फोन किया और उनका आशीर्वाद मांगा। यह मेरे लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। ”

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