कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जिनको देखकर ऐसा लगता है कि वो हम हैं और हम में वो। उनमे से एक थे इरफान खान। उनकी जैसे कलाकार जल्दी नही मिलते। आज मुम्बई में उनका कोलन इन्फेक्शन से 54 साल की उम्र में देहावसान हो गया पर हमारे दिलों में वो हमेशा ज़िंदा रहेंगे।

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30 सालों के इस करियर में उन्होंने जो बेंचमार्क स्थापित किया है उस तक पहुचने के लिए किसी को भी कई साल लग जाएंगे।उन्होंने कई किरदार में जान फूंक दी है और ऐसे किरदार जो महिलाओं को जैसी हैं वैसी रहने की आज़ादी दे, सपोर्टिव पति, प्यारे पिता और आज़ाद खयालात वाले पार्टनर.

आइये देखे उनके सबसे सशक्त किरदारों की सूची।

अशोक गांगुली (द नेमसेक)

मीरा नायर की नेमसेक में इरफान खान ने अशोक का किरदार निभाया था जो कि फर्स्ट जनरेशन बंगाली-यूनाइटेड स्टेट्स इमिग्रेंट था। भले ही वो एक स्ट्रिक्ट पिता थे पर एक प्यारा पति थे जो अपनी पत्नी आशिमा को नए देश के नए तौर तरीकों से अवगत कराता है। वो अपने पहले बच्चे की भी देखभाल करी जब उसकी पत्नी दूसरी बार प्रेग्नेंट हुई। इतना नाज़ुक रिश्ता दिखाया गया है आशिमा और अशोक के बीच कि उनकी केमिस्ट्री देखते ही उनसे प्यार हो जाये। इसकी ज़्यादा चर्चा कभी हुई नहीं पर फिर भी तब्बू और इरफान की इससे जोड़ी ने बहुतों का मन मोह लिया।

राणा चौधरी (पीकू)

इरफान खान, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण स्टारर पीकू एक इंडिपेंडेंट लड़की के रिलेशनशिप्स के इर्द गिर्द घूमती है। ये फ़िल्म खूबसूरती से ये दर्शाती है कि इंडिपेंडेंट लड़कियां भी अपनी फैमिली को प्रियोरिटाइज़ करती हैं। इरफ़ान राणा चौधरी एक टैक्सी बिज़नेस के मालिक का किरदार निभाते हैं जो कि फालतू का हेरोइस्म दिखाए बिना बाप बेटी को एक दूसरे के पास ले आता है बिना एक्ट्रेस से ऑडियंस का ध्यान हटाये। वो पीकू के डरों को भी दूर करने का काम करता है। एक सीन में वो पीकू को गाड़ी चलाने को कहता है और ये भी कहता है कि गाड़ी चलाने से महिलाएं लिबरेट होती हैं।

चम्पक(अंग्रेज़ी मीडियम)

राधिका मदान के साथ ये फ़िल्म एक प्यारी सी कहानी है एक बेटी और पिता के खूबसूरत रिश्ते की। अंग्रेज़ी मीडियम में इरफान ने निभाया है एक बहुत प्यार करने वाले पिता का किरदार जो कि सिंगल पैरेंट है, जो अपनी बच्ची की खुशी के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

योगी(करीब करीब सिंगल)

पार्वती और इरफान की ये लव स्टोरी घिसी पिटी कहानियों से हट के है। पार्वती का किरदार जया एक स्टेबल, इनडिपेंडेंट और एक सोशल लाइफ वाली महिला का किरदार निभाती हैं। पर उसे प्यार में सुकून की तलाश रहती है और अपने पति (जो कि अब नहीं रहे) के लिए फीलिंग्स से उबरने की कोशिश कर रही है। इरफान का किरदार योगी बहुत ही मस्तमौला और मज़ाकिया है। योगी जया की लाइफ अपने हाथों में नही लेता बल्कि उसे ही उसकी लाइफ कंट्रोल करने का गुण सिखाता है। नासमझ और बिना सोचे समझे काम करने वाले योगी जैसे भले ही आप अपने लाइफ पार्टनर के रूप में ना चाहें पर ऐसे लोग आपकी लाइफ में हो तो आपको उनसे प्यार तो हो ही जायेगा।

साजन फ़र्नान्डिस (द लंचबॉक्स)

ये कहानी है इला जो कि एक शादीशुदा महिला है और साजन जो कि एक विडोवर है और रिटायरमेंट ऐज के करीब है। अपने पति का प्यार पाने के लिए इला रोज़ अलग अलग खाना बनाके लंचबॉक्स में भेजती थी जो हमेशा साजन के डेस्क पर पहुँच जाता था। ऐसे उनकी बातें शुरू हुई लेटर्स के द्वारा। जनरेशन गैप होने के बावजूद एक कनेक्शन बनता है जो कि बढ़ता ही जाता है बिना मिले। जब इला को पता चलता है कि उसका पति उसको चीट कर रहा है तो उसे सपोर्ट और हिम्मत साजन से मिलती है और वो उसको नई जिंदगी शुरू करने की प्रेरणा देता है। ये एक ओपन एंडेड मूवी है और फिल्म का मतलब निकालना ऑडियंस पर छोड़ देती है

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