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1 अप्रैल से कुल 577 बच्चे हो चुके हैं कोविड के कारण अनाथ: स्मृति ईरानी

Published by
Ritika Aastha

मंगलवार को अपने एक ट्वीट सन्देश में महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने बताया की 1 अप्रैल से लेकर अब तक इस कोविड महामारी के कारण कुल 577 बच्चे अनाथ हो चुके हैं। उन्होंने बताया की ये रिपोर्ट उन्हें सभी स्टेट्स और यूनियन टेरिटरीज के द्वारा प्राप्त हुई है। इन बच्चों की सहायता करने के अपने संकल्प को दोहराते हुए उन्होंने ये भी कहा की भारत सरकार ऐसे बच्चों को हर तरह की सुरक्षा पहुँचाने के लिए खड़ी है।

1. ट्वीट करके बताया कोविड के कारण अनाथ हुए बच्चों के बारे में

महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इस बात की ख़बर अपने ट्विटर पर एक ट्वीट के ज़रिए दी। साकार की इन बच्चों की सही देखभाल करने की तत्परता को दोहराते हुए उन्होंने ये भी बताया की सभी बच्चे फ़िलहाल अपने-अपने डिस्ट्रिक्ट अथॉरिटीज के निगरानी में हैं। उन्होंने बच्चों से भी ये अपील की कि वह इस परिस्थिति में ख़ुद को अकेला ना समझें क्योंकि उनके मदद के लिए मंत्रालय और भारत सरकार हमेशा मौजूद है।

2. बच्चों के लिए बनायीं है काउंसलिंग टीम

स्मृति ईरानी ने ये भी बताया कि जो अनाथ बच्चे अभी भी ख़ुद को मेन्टल ट्रामा का शिकार समझते हैं उनके लिए महिला एवं बाल विकास मत्रालय ने नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेन्टल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज (NIMHANS) में एक काउंसलिंग टीम का भी गठन किया है। उन्होंने ने ये भी बताया कि इन बच्चों के वेलफेयर के लिए सेंट्रल गवर्नमेंट के पास फंड्स कि कोई कमी नहीं है। उन्होंने इस बात कि भी जानकारी दी कि मंत्रालय इस काम में और हितधारकों कि मदद ले रहा है और UNICEF से भी लगातार समपर्क बना कर रख रहा है।

3. 10 देशों में होगा वन स्टॉप सेंटर्स का गठन

इसी कार्य को आगे बढ़ते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव राम मोहन मिश्रा ने बताया कि कोविड महामारी के कारण घरेलु हिंसा कि शिकार हुई औरतों और बच्चों के लिए भारत सरकार 10 देशों में वन स्टॉप सेंटर का भी निर्माण करेगी। इन देशों में हैं कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, कुवैत और सऊदी अरेबिआ।

4. पहले भी जारी कर चुका है मंत्रालय कोविड के कारण अनाथ बच्चे के लिए एडॉप्शन के निर्देश

कोविड के कारण अनाथ हुए बच्चों कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय पहले ही उनके एडॉप्शन के निर्देश जारी कर चूका है। इसके तहत मंत्रालय ने सभी सोशल मीडिया साइट्स को इन बच्चों के एडॉप्शन के लिए काम करने से मन कर दिया था क्योंकि इससे उनके ट्रैफिकिंग में भी जाने का ख़तरा है। मंत्रालय ने कहा था कि अगर किसी कि नज़र में कोई भी अनाथ बच्चा को हो तो उसका पंजीकरण तुरंत डिस्ट्रिक्ट ऑफिस में करवानी चाहिए।

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