अब तक एक महीना हो चुका है संतोषी को अपने पति कर्नल संतोष बाबू को गाल्वन घाटी के संघर्ष में खोये हुए। टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने बताया कि अब कर्नल संतोष बाबू की पत्नी संतोषी को तेलंगाना सरकार ने डिप्टी कलेक्टर के रूप में नियुक्त किया है। संतोष बाबू 15 जून, 2020 को लद्दाख में हुई क्रूर लड़ाई में मारे गए 20 भारतीय सैनिकों में शामिल थे। संतोषी के परिवार के सदस्यों ने हाल ही में प्रगति भवन में मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव से अपॉइंटमेंट लेटर प्राप्त किया।

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“भारत-चीन सीमा पर शहीद हुए कर्नल संतोष बाबू की पत्नी श्रीमती संतोषी ने आज सीएम श्री केसीआर से मुलाकात की। माननीय मुख्यमंत्री ने डिप्टी कलेक्टर के रूप में उन्हें अपॉइंटमेंट लेटर सौंपा। बाद में सीएम ने संतोषी के साथ आए कर्नल संतोष बाबू के परिवार के सदस्यों के साथ दोपहर का भोजन किया।

उन्हें हैदराबाद में 711 square फ़ीट का एक घर उपहार में दिया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत 10 करोड़ रुपये है और पांच करोड़ रुपये की  राशि की भी घोषणा की गई थी। हैदराबाद की कलेक्टर श्वेता मोहंती ने संतोषी को प्लाट के कागज़ सौंपे। बाद में, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को संतोषी को हैदराबाद या आसपास के क्षेत्रों में अप्पोइंट करने का निर्देश दिया।

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संतोषी को है पति पर गर्व

संतोशी, जो शुरू में कमर्शियल टैक्स अफसर पोस्ट पर जाना चाहती थी उन्होंने बाद में अपना विचार बदल दिया और ग्रुप- I कैडर में डिप्टी कलेक्टर की नौकरी की मांग की, जिसे राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया। उसकी शादी 10 साल पहले संतोष बाबू से हुई थी और इस दंपति की एक बेटी अभिजना (अपने पिता की मृत्यु के समय नौ वर्ष की थी) और एक बेटा अनिरुद्ध (चार वर्ष की आयु) का था। “जब वह छुट्टी पर वापस आते थे , तो वह कई यात्राओं, मंदिरों और अन्य स्थानों पर परिवार को घुमाने ले जाते थे। जब वह एक कर्नल बन गए, तो उन्होंने मुझे एक सुंदर उपहार दिया, ”संतोषी ने याद करते हुए कहा कि उन्हें अपने बहादुर पति पर गर्व है, जिसने देश के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया, द प्रिंट ने बताया।

37 वर्षीय कर्नल संतोष बाबू 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग अवसर थे जो मुठभेड़ के दौरान लाइन ऑफ़ एक्चुअल कण्ट्रोल (LAC) की रखवाली कर रहे थे। “मैं एक माँ के रूप में दुखी हूं, लेकिन मुझे गर्व और खुशी भी है कि उन्होंने देश के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। उनकी शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी, ”उनकी मां मंजुला ने पहले द हिंदू को बताया था।

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