बहुत इंतज़ार के बाद साल 2020 में विद्या बालन की बहुचर्चित फिल्म “शकुंतला देवी” रिलीज़ होनेवाली है । इस फिल्म में विद्या बालन एक बहुत ही रोमांचित किरदार निभाते हुए नज़र आनेवाली है । इस बार विद्या बालन लेडी कंप्यूटर शकुंतला देवी का किरदार निभाते हुए नज़र आएँगी ।

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विद्या ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट इंस्टाग्राम और ट्विटर पर फिल्म की रिलीज़ डेट के बारे में जानकारी देते हुए फिल्म के लिए अपनी उत्सुकता ज़ाहिर की है । उन्होंने सोशल मीडिया पर बड़े मज़ेदार तरीके से अपनी फिल्म की रिलीज़ डेट की घोषणा की । विद्या ने दर्शकों को रिलीज़ डेट बताई तो है पर लोगो के दिमाग की पूरी एक्सरसाइज़ करवाने के बाद।

एक्ट्रेस ने ट्विटर और इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर किया है जिसमें वो बोल रही हैं ‘शकुंतला देवी की रिलीज़ डेट डिसाइड कर ली गई है, फिल्म आज से ठीक 148 दिन बाद रिलीज की जाएगी’। इसके बाद विद्या दर्शकों को फिल्म की रिलीज़ डेट का अंदाजा लगाने का एक और मौका देती हैं। एक्ट्रेस अलग तरह की इमोजी दिखाती हैं और उसके हिसाब से लोगो से रिलीज़ डेट गेस करने को कहती हैं। फैंस से पूरी मेहनत करवाने के बाद विद्या बताती हैं कि फिल्म 8 मई 2020 को रिलीज होगी।

विद्या बालन की फिल्म शकुंतला देवी 2020 में रिलीज़ होने को तैयार

शकुंतला देवी भारत की अब तक की सबसे बेहतरीन माथेमैटिशिएंस में से एक थीं। वह अपने दिमाग  में 13 अंकों की संख्याओं को मल्टीप्लाई और जोड़ने में सक्षम थी। इसके अलावा वह अपने दिमाग में विभिन्न बड़ी संख्याओं की क्यूब रुट निकालने में सक्षम थी। उन्होंने कभी किसी कॅल्क्युलेशन के लिए कैलकुलेटर का इस्तेमाल नहीं किया।

यह गणित की जादूगर थी। वह अपने दिमाग में मुश्किल से मुश्किल कैलकुलेशन करने बहुत सक्षम थी।

कोई औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं करने के बावजूद, वह 1982 के गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम लिखवाने में कामयाब रही हैं।

5 साल की उम्र में, वह 18 साल के बच्चों के लिए मैथ्स की प्रॉब्लम्स को सॉल्व करके लोगो को चौंका देती थी।

वास्तव में, 1990 में वह लंदन के इंपीरियल कॉलेज में सभी को आश्चर्यचकित करने में भी सक्षम रही थी। शकुंतला देवी केवल 28 सेकंड के समय  में दो, 13 अंकों की संख्या को सही ढंग से मल्टीप्लाई करने में सक्षम थी। इस बार 26 अंकों के उत्तर को सबसे तेज़ सॉल्व के लिए लिया गया समय शामिल था।

एक शानदार माथेमैटिशन होने के अलावा, वह समलैंगिक लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले भारत के पहले लोगों में से एक थीं। उन्होंने किताब – समलैंगिकों की दुनिया भी लिखी। उन्हें एक समय पर पता चला था कि उनके पति समलैंगिक थे । उसके बाद, उन्होंने  एक समलैंगिक के जीवन को समझने के लिए लोगों का इंटरव्यू लिया। फिर उन्होंने एक पुस्तक में अपने एक्सपीरियंस और विचारों को इकट्ठा किया।

जब लोगों ने समलैंगिकता पर उनकी  किताब पर सवाल उठाये तो उन्होंने  बस इतना ही कहा, “इस किताब को लिखने के लिए मेरी एकमात्र योग्यता यह है कि मैं एक इंसान हूँ”।

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