रिसर्च का कहना है कि अगर एक कंपनी को सफल होना है, तो जेंडर डाइवर्सिटी होना बेहद ज़रूरी है, आज भी सीनियर मैनेजमेंट के रोल्स में महिलाओं की संख्या कम ही है। हम सभी जानते हैं कि मैनेजमेंट निर्भर करती हैं इंसान की काबिलियत पर, ना की उसके लिंग पर, लेकिन यह एक कड़वी सच्चाई है की 21वीं सदी में रह कर भी लिंग-भेद और सैलरी में भेदभाव होता है।

कुछ समय पहले, दलाई लामा ने भी कहा कि महिलाओं को ज़्यादा-से-ज़्यादा लीडरशिप रोल अदा करने चाहिए। उनका कहना है की “मैं महिलाओं को ज़्यादा-से-ज़्यादा लीडरशिप रोल्स लेने का आग्रह करता हूँ। प्यार व कम्पैशन को बढ़ावा देने के लिए हमें आपकी ज़रुरत है। मेरा सपना पूरा कीजिये – कि दुनिया के 200 देश महिलाएं चलाएंगी। युद्ध, हिंसा, इकनोमिक व सोशल अन्याय कम होगा क्योंकि प्यार और कम्पैशन में ही शक्ति वास करती है।”

तो हमे आखिर क्या रोक रहा है?

सांसद में महिलाएं

हालांकि अब महिलाएं पहले के मुताबिक ज़्यादा राज्यों में पावर लिए हैं, लेकिन अभी भी ज़्यादातर देशों की सरकार में वह अंडर रेप्रेसेंटेटेड हैं। फरवरी 2019 में लिए गए डाटा के अनुसार सभी नेशनल पार्लिअमेंट्स की सिर्फ 24.3 प्रतिशत ही महिलाएं थी।

कॉर्पोरेट्स में महिलाएं

एक रिसर्च का कहना है कि “फार्च्यून 500 सीईओस में से केवल 4.9 प्रतिशत व एसएंडपी 500 सीईओस के दो प्रतिशत महिलाएं हैं, और यह आंकड़ा ग्लोबली कम होता जा रहा है।” हार्वर्ड बिज़नेस रिव्यु के एक रीसर्च का भी यह कहना है की “लीडरशिप रोल्स में महिलाओं को – अगर उनसे ज़्यादा नहीं – तो पुरुषों के जितना ही कम्पीटेंट माना जाता है।” इस रिसर्च के लिए महिलाओं को लीडरशिप रोल्स के लिए ओवरॉल परफॉरमेंस व अलग-अलग कम्पेटेन्सीस पर आँका गया था।

महिलाएं अपने आप को कम आंकती हैं

यह दुःख की बात है की जब उसी रिसर्च में खुद को रेटिंग्स देने की बारी आई, तो महिलाऐं सबसे ज़्यादा रेटिंग्स नहीं देतीं। महिलाऐं एक पोस्ट के लिए तब ही अप्लाई करती हैं जब उन्हें लगता है की वे पूरी तरह क्वालिफाइड हों, जबकि पुरुष तब भी कर देते हैं अगर वे उसके आसपास हों।

महिलाएं लीडरशिप को एक अलग नज़रिये से देखती है

65 प्रतिशत महिलाऐं मानती हैं की लीडर वह होता है जो अपनी नॉलेज शेयर करते हैं और कलीग्स से जुड़ते हैं ताकि बिज़नेस की मदद हो। जब महिलाऐं यह एट्टीट्यूड बिज़नेस में लाएं,वह ज़्यादा स्ट्रांग व इफेक्टिव लीडर बनती हैं।

महिलाएं अपने करियर अम्बिशन्स के बारे में बताने से हिचकिचातीं हैं

49 प्रतिशत महिलाओं के सामने 60 प्रतिशत पुरुष यह बताते हैं कि वह अपने करियर के लिए कंपनी से क्या एक्सपेक्ट करते हैं।

मीडिया अलग तरीके से रियेक्ट करती है

रिसर्च से सामने आया है कि 80 प्रतिशत मीडिया कंपनी फ़ैल हो जाने पर सीईओ को ब्लेम करती है, अगर वह महिला हो तो।

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