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कश्मीर की रुपाली स्लैथिया बीसीसीआई-प्रमाणित महिला क्रिकेट कोच है

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STP Team

रुपाली स्लैथिया, एक शारीरिक शिक्षा निदेशक और लेवल -2 (बीसीसीआई) क्रिकेट कोच और जिन्हें  जम्मू-कश्मीर के क्रिकेट मंडल में सभी जानते है. फिलोसफी में डॉक्टरेट, स्लैथिया (34) ने हाल ही में महिलाओं के क्रिकेट पर एक पुस्तक लिखी है,  जिसका शीर्षक- राइज़िंग स्पेल इन वुमेनस क्रिकेट. यह सचिन तेंदुलकर की प्रशंसक एक दशक से भी ज्यादा समय से क्रिकेट खेल रही है और अब एक कोच के रूप में उभरते क्रिकेटरों को मार्गदर्शन और प्रेरणा देती है.  SheThePeople.TV  ने रुपाली से बात की. साक्षात्कार के कुछ अंश

क्रिकेट खेलने के लिए आपको प्रेरणा कहाँ से मिली?

मेरे पिता एक क्रिकेट प्रेमी हैं और मेरी बहन एक क्रिकेट खिलाड़ी है और कभी-कभी मैं उनके साथ ग्राउंड पर जाती थी. तो, आप मेरे सपने के स्रोत को समझ सकती हैं, लेकिन यह 1996 का विश्व कप था जिसने मुझे क्रिकेट में जाने का रास्ता दिखाया.

आप बीसीसीआई-प्रमाणित महिला क्रिकेट कोच और एक व्याख्याता हैं. यह दोनों कैसे मुमकिन होता है?
विश्वकप 1996 के दौरान,  विशेष रूप से भारत बनाम पाकिस्तान गेम में मैंने इस खेल के लिए अपने जुनून को महसूस किया. घर पर, मेरे भाई और इलाके के अन्य लड़के मेरे साथ खेलते थे.  मेरे परिवार ने मुझे क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया, क्योंकि मेरी बहन पहले से ही खेल रही थी और एक प्रशंसक की तरह, मैं उनके खेल का आनंद ले रही थी. मैं बल्लेबाजी में अच्छा थी.

जम्मू में स्टेडियम में खेलना शुरु करने के बाद, मेरा सेलेक्शन उप-जूनियर राष्ट्रीय खेल के लिए हुआ. एक साल बाद, मैंने सभी प्रारूपों (उप-जूनियर, जूनियर और सीनियर) में खेला. 15 साल के लंबे करियर में, मुझे चयन भारत के शिविर के लिए हुआ. साथ ही जूनियर और सीनियर ग्रुप दोनों के कई जोनल मैचों में खेला और लगभग 10 वर्षों तक जम्मू-कश्मीर टीम का नेतृत्व किया. मेरे कोच ने मुझे क्रिकेट में एनआईएस करने का सुझाव दिया, 2006 में मैंने कोर्स पूरा किया। 2008 में, मैंने एनसीए बैंगलोर में स्तर-ए और 2011 स्तर-बी में पूरा किया.

रूपाली जम्मू-कश्मीर की पहली महिला क्रिकेट कोच हैं जिन्होंने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) के सहयोग से बीसीसीआई द्वारा आयोजित स्तर-बी पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया है.

आपने कोच बनने का फैसला कब किया?

एनआईएस के बाद, मैंने कोचिंग शुरू की, लेकिन 2010 तक मेरे राज्य के लिए खेला. मैं 2011 में पेशेवर कोचिंग में आ गई और जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ के साथ काम करना शुरू कर दिया. मुझे उसी वर्ष बीसीसीआई द्वारा क्षेत्रीय शिविरों के लिए असाइनमेंट मिला.

जम्मू-कश्मीर अभी भी खेल खेलने वाली महिलाओं के विचारों को स्वीकार कर रहा है.  और आपका कैरियर इससे काफी पहले शुरु हो चुका था. सामाजिक बाधाओं के बावजूद इस स्तर तक आप कैसे पहुंची?

हां, जम्मू-कश्मीर अपने पारंपरिक मूल्यों के लिए जाना जाता है, एक लड़की के लिए क्रिकेट बल्ले के साथ अकेले बाहर जाना कभी आसान नहीं था.  लेकिन मेरे पिता हमेशा सहयोग करते थे और उन्होंने हमें अपने करियर चुनने की इजाजत दी. इसलिये मैंने क्रिकेट को चुना.

खेलने वाले दिन चुनौतियों से भरे थे. हमारा खेल का बुनियादी ढांचा अच्छा नही है और उस वक्त ज़ोन टीम में जगह बनाना बहुत मुश्किल था. यदि आप इसमें कामयाब हो गई तो अगली चुनौती 11 खिलाड़ियों में जगह बनाने की थी. लेकिन खेल और कड़ी मेहनत के जुनून ने मुझे सभी चुनौतियों से निपटने में मदद की और मैंने उत्तर क्षेत्र टीम के लिए कई बार खेला.

जब मैंने लोगों को खेलना शुरू किया तो महिलाओं के क्रिकेट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी. प्रायोजकों को ढ़ूंढना मुश्किल नही था और आज भी यह आसान नहीं है.

क्या राज्य में कोई अकादमी है जहां बच्चों को प्रशिक्षण मिलता है? वहां कितनी लड़कियां हैं?

अब हमारे पास बहुत सारी अकादमियां हैं, लेकिन जब मैंने खेलना शुरू किया तो शायद दो ही केंद्र थे. आज, 100 से अधिक लड़कियां क्रिकेट खेल रही हैं, लेकिन यह केवल जम्मू और श्रीनगर जिलों में है.  अन्य राज्यों में यह नहीं है.

खेल के प्रति आपको क्या प्रेरित करता है?

क्रिकेट, मेरे लिए, ऑक्सीजन है. जब मैं क्रिकेट ग्राउंड में प्रवेश करती हूं तो मेरी ऊर्जा दोगुना हो जाती है. मैं एक परिश्रम करने वाली लड़की हूं. और खेल पर आपकी मेहनत और प्यार से आपको जल्द ही परिणाम मिलता है. क्रिकेट, मेरे लिए, ऑक्सीजन है. जब मैं क्रिकेट ग्राउंड में प्रवेश करती हूं तो मेरी ऊर्जा दोगुनी हो जाती है.

आप जीवन कैसे संतुलित करती हैं? काम, परिवार और पेशे के साथ?

अपने परिवार और पेशे को संतुलित करने के लिए आपको अपने परिवार का सहयोग चाहिये होता है. मुझे मेरी सास का पूरा सहयोग मिलता है. वह मुझे बहुत प्रेरित करती है.

आपको सबसे ज्यादा छू लेने वाला मौका क्या रहा?

जब मैं इंटर-जोनल टूर्नामेंट में भारतीय रेल के खिलाफ खेल रही थी. पहली गेंद पर, मैंने उस समय की मौजूदा भारतीय टीम की ऑफ स्पिनर की गेंद को बाउंड्री के बाहर पहुंचाया. उस पल ने मुझे और अधिक आत्मविश्वास दिया और तब से मैंने अपने खेल में काफी सुधार किया.

आपको क्या लगता है कि भारत में सभी प्रकार के खेल को बढ़ावा देने में कहा कमी है?

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारत में खेल के लिये बुनियादी ढांचे की कमी है. असल में, खेल के बुनियादी ढांचे में राज्यों में कोई समानता नहीं है. कुछ राज्यों में उच्च श्रेणी की सुविधाएं हैं और कश्मीर जैसे राज्यों में उचित जमीन भी नहीं है.

आपका सपना क्या है ?

खैर, मेरी दीर्घकालिक कोशिश है राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बनना. लेकिन वर्तमान में, मैं अपनी राज्य की टीम पर ध्यान केंद्रित कर रही हूं क्योंकि मैं अपनी राज्य की लड़कियों को ज्ञान और अनुभव के साथ क्रिकेट की मदद करना चाहती हूं.  मैं चाहती हूं कि मेरे राज्य की टीम बीसीसीआई टूर्नामेंट में खेलें.

राज्य से लड़कियों को क्रिकेट लेने की संभावना क्या है? क्या उन्हें उतना एक्सपोजर मिलता जिसके वे लायक हैं?

कश्मीर में, लड़कियों के लिए बहुत गुंजाइश है. अगर अधिकारी महिलाओं के क्रिकेट पर आवश्यक ध्यान देते हैं, तो इनमें से कुछ लड़कियां राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बन सकती हैं. उनके लिए एक उचित कार्यक्रम तैयार किया जाना चाहिए.

सामान्य रूप से, इस क्षेत्र में खेल ने महिलाओं को कैसे मुक्त किया है? क्या महिलाएं अब इसे पेशेवर रुप से अपनाने के लिये तैयार हैं?

आज, महिलाएं पेशे के रूप में खेल चुन रही हैं क्योंकि यह एक सुरक्षित भविष्य की पेशकश कर रहा है. वे प्रसिद्धी प्राप्त करती हैं और पैसे कमाती है और सम्मान प्राप्त करती हैं. खेल आनंद, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, पारस्परिक नेटवर्क, नए अवसर और आत्म-सम्मान में वृद्धि को बढ़ावा देता है. यह शिक्षा के लिए और संचार, टीमवर्क, नेतृत्व और वार्ता जैसे विभिन्न आवश्यक जीवन कौशल के विकास के अवसरों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है.

निश्चित रूप से चीज़ें महिलाओं के लिए सुधारी है, लेकिन खेल में महिलाओं का नंबर आज भी बहुत कम है.

आज देश में महिला क्रिकटरों को अवसर प्रदान किए जाते हैं. भविष्य में आपके राज्य में इच्छुक महिला क्रिकेटरों के लिए भविष्य कैसा दिखता है?

भविष्य उज्ज्वल दिखता है. अधिक से अधिक लड़कियां अपने सपनों को चुन रही है. इसे देखते हुये हमारे राज्य का भविष्य निश्चित रूप से उज्ज्वल होगा. युवा लड़कियों को इस तरह के आत्मविश्वास और कठोरता के साथ प्रगति करना प्रेरणादायक है. सभी चीज़ों से पहले, किसी को एक व्यक्ति के रूप में और पेशेवर के रूप में अपना मूल्य पता होना चाहिए.

लड़कियों को आपकी सलाह क्या होगी?

सभी चीज़ों से पहले, आप को एक व्यक्ति के रूप में और पेशेवर के रूप में अपना मूल्य पता होना चाहिए. सामने देखे और अपने मानकों को उपर रखें. एक महिला के करियर में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण उसका आत्मविश्वास होता है. अपने आप पर विश्वास रखें. चुनौतियों और परिवर्तनों को गले लगायें.

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