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पांच महिला डूडलर और उनके प्रशंसनीय डूडल

Published by
Aastha Sethi

डूडलिंग एक शांतिपूर्ण कार्य है – यह मस्तिष्क को आराम देता है, एकाग्र रखता है. साथ ही, यह चिकित्सीय भी है. बाकी कलाओं की तरह, इसके लिए भी समर्पण, प्रतिभा और रचनात्मकता की आवश्यकता होती है. डूडलिंग अभिव्यक्ति का एक शक्तिशाली माध्यम है.

यहां पांच ऐसी महिला डूडलर्स सूची दी गई है.

तंज़ीला

डूडल्स द्वारा नारीवाद और परिवर्तन के संदेशों के साथ, तंज़ीला ने समाज में अपना रास्ता बनाया. उनका इंस्टा बायो “ए हिजाबी डूडलर” है जिसका अर्थ चित्रों के माध्यम से अपनी दुनिया दर्शाने वाली है.

“उच्च शिक्षा के दौरान था कि मैंने डूडल करना शुरू किया था. अब यह मेरा शौक बना गया।” डूडलिंग पर, तंज़ीला कहती हैं, “डूडलिंग मेरे लिए चमत्कार करता है. यह ध्यान की तरह है. जब भी मैं चिंतित महसूस करती हूं, मैं हमेशा डूडलिंग से ही मन शांत करती हूं! ”

 

चित्रा अय्यर

सुंदरता के साथ, चित्रा अपने इंस्टाग्राम खाते पर किताबों के लिए अपने प्यार को अपनी कला से व्यक्त करती है. एक डूडलर होने पर, वह कहती है, “जब मैं छोटी थी तब मैंने चित्रकारी शुरू कर दी. मैंने एक चित्रकरि कोर्स किया और मेरा परिवार काफी सहायक और उत्साहित था। ” डूडलिंग ने उन्हें मुश्किल समय में मदद की है.

चित्रा ने कहा, “यह मुझे बचाता है. हाल ही में, जब मैं डिप्रेशन में थी, डूडलिंग ने इसके इलाज में मदद की. यह मेरे लिए चिकित्सक या ध्यान से अधिक प्रभावकारी है.”

 

पूनम मुंशी

उनकी कला और डूडल, सामान्य चीजों से हस्तियों तक के चित्रों का सम्मलेन हैं. पूनम ने कुछ साल पहले ही डूडलिंग शुरू की है. “इसकी शुरुआत सामान्य डूडलिंग और ज़िन्दगी से कुछ पल खुद के साथ बिताने से हुआ.” पूनम डूडलिंग को ध्यान के समान मानती है.

“डूडलिंग से मुझे शांति मिलती है. मैं खुश महसूस करती हूं. नया डूडल पूरा करने पर अपार आनंद मिलता है,” पूनम कहते हैं।

 

कीर्ति जयकुमार

कीर्ति जयकुमार चेन्नई की एक्टिविस्ट, कलाकार, उद्यमी और लेखिका हैं. कीर्ति “ज़ेन डूडलिंग” नाम से प्रसिद्ध डूडलिंग को अपनाया, इससे वह सामाजिक मुद्दों को बखूबी व्यक्त करती है.

Femcyclopedia – एक अभियान है जो कि कीर्ति द्वारा स्थापित रेड एलिफेंट फाउंडेशन का हिस्सा है. इस परियोजना ने ज़ेन डूडलिंग और ऐतिहासिक कथाओं को जोड़, मशीलाओं को इतिहास से परीजाद करवाने का प्रयास किया है.

 

रश्मी तिवारी

रश्मि आहान ट्राइबल फाउंडेशन फाउंडेशन (एटीडीएफ) की संस्थापक और न्यूरो लिडरशिप इंस्टीट्यूट से प्रमाणित लीडरशिप कोच हैं. वह पिछले पांच सालों से, तस्करी के नक्सली-वर्चस्व वाले इलाकों में ,आदिवासी लड़कियों और महिलाओं के साथ काम कर रही है. तिवारी के पास डूडलिंग के लिए भी एक जूनून है. अपने नए डूडल ‘लाइफ’ में, वह दर्शाती है: “जीवन एक उपहार है, द्रव, कठोर या गन्दा, सबकुछ वर्थी है.”

 

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