ब्लॉग

महिलाओं से हर वक़्त मुस्कुराने की उम्मीद क्यों की जाती है ?

Published by
Aastha Sethi

महिलाओं को मुस्कुराने के लिए पूछना या बताना, आमतौर पर सेक्सिस्म के हिस्से के रूप में समझा जाता है. कभी-कभी यह काम पर भी होता है. यह “थोड़ी सी मुस्कान” वाली बात हम सभी को प्रभावित करती है: एथलीट सेरेना विलियम्स (एक संवाददाता सम्मेलन में) और अभिनेत्री जैसी उच्च-प्रोफ़ाइल महिलाओं से लेकर हर महिला जिसे मैं जानती हूं.

पुरुषों का मानना ​​है कि उनका महिलाओं के शरीर पर नियंत्रण है

पुरुष महिलाओं को मुस्कुराने के लिए कहते हैं क्योंकि उन्हें को लगता है कि हम पुरुष की नज़र और उनके आनंद के लिए मौजूद हैं. पुरुषों का मानना ​​है कि उनका महिलाओं के शरीर पर नियंत्रण है. इसलिए हमें कैसे दिखना, सोचना और कार्य करना चाहिए, इस पर वह अवांछित निर्देश देते हैं.

इसे हल करना आसान है: पुरुष, महिलाओं को मुस्कुराने के लिए न कहें

महिलाओं को पुरुषों से अधिक, मुस्कुराने की अपेक्षा की जाती है. वार्ता में, महिला उपस्थिति को व्यक्त करने के लिए सिर हिलाती है और मुस्कुराती है. यदि कोई महिला मुस्कुराती नहीं है, तो उसे नाराज माना जाता है. क्यों?और जब हम पुरुषों को महिलाओं पर मुस्कुराने के लिए सबसे अधिक दबाव डालने वाला समझते हैं, पर सामाजिक दबाव उससे कहीं अधिक महिला ही महिला पर बनाती है. जब कोई व्यक्ति किसी महिला को मुस्कुराने के लिए कहता है, तो वो यह सोचता है कि हम उसे खुश करने के लिए मौजूद हैं और हमें अपनी उपस्थिति में बदलाव करना चाहिए, फिर चाहे हम वास्तव में क्या महसूस कर रहे हों.

हमारी संस्कृति सिखाती है कि मुस्कुराती हुई महिला सहज और सहमत लगती है.

महिलाओं के चेहरे “स्माइली” होते है

2009 के एक अध्ययन में पाया गया कि पश्चिम में मुस्कुराहट को “नारी” के रूप में सोचा जाने लगा है. मुस्कुराते हुए चहरों में अधिक स्त्री हैं, जबकि खाली या आक्रामक चेहरे पुरुष के होते हैं. महिलाओं के चेहरे को अधिक सहज रूप से “स्माइली” माना जाता है. महिलाओं को मुस्कुराने की मांग अजीब और डिमांडिंग है. और उनसे अपेक्षा की जाती है, जैसे विनम्र होने, स्वीकार्य होने, पुरुषों के लिए अनुकूल होना, निर्वाह होना, आदि.

अवश्य ही, मुस्कान खूबसूरत लगती है और जिस चेहरे पर मुस्कुराहट हो तो वो और सुंदर लगता है. पर जब आप अंदरूनी तनाव महसूस कर रहे है, और फिर भी आपसे मुस्कुराहट की अपेक्षा? यह मानसिक अत्याचार है. आप जैसे है वैसे रहिये, किसी और की ख़ुशी या मज़े के लिए, अपने आप को तकलीफ में न डालिये. हम रोबोट्स नहीं है, की हमें कुछ महसूस नहीं होता, या अपनी भावनाओं और इमोशंस को दूसरे के लिए छिपा ले.

कठपुतली नहीं है आप! जीती जागती इंसान है, जिसको कभी ख़ुशी होती है तो कभी निराशा व दुःख. और हर वक्त मुस्कुराकर , चीज़ों को अंदर न रखे. चिलाइये, रोइए, हसिये जोर जोर से और ज़िन्दगी अपने मुताबिक जीएं.

Recent Posts

शादी का प्रेशर: 5 बातें जो इंडियन पेरेंट्स को अपनी बेटी से नहीं कहना चाहिए

हमारे देश में शादी का प्रेशर ज़रूरत से ज़्यादा और काफी बार बिना मतलब के…

12 hours ago

तापसी पन्नू फेमिनिस्ट फिल्में: जानिए अभिनेत्री की 6 फेमस फेमिनिस्ट फिल्में

अभिनेत्री तापसी पन्नू ने बहुत ही कम समय में इंडियन एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपनी अलग…

13 hours ago

क्यों है सिंधु गंगाधरन महिलाओं के लिए एक इंस्पिरेशन? जानिए ये 11 कारण

अपने 20 साल के लम्बे करियर में सिंधु गंगाधरन ने सोसाइटी की हर नॉर्म को…

14 hours ago

श्रद्धा कपूर के बारे में 10 बातें

1. श्रद्धा कपूर एक भारतीय एक्ट्रेस और सिंगर हैं। वह सबसे लोकप्रिय और भारत में…

15 hours ago

सुष्मिता सेन कैसे करती हैं आज भी हर महिला को इंस्पायर? जानिए ये 12 कारण

फिर चाहे वो अपने करियर को लेकर लिए गए डिसिशन्स हो या फिर मदरहुड को…

15 hours ago

केरल रेप पीड़िता ने दोषी से शादी की अनुमति के लिए SC का रुख किया

केरल की एक बलात्कार पीड़िता ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख कर पूर्व कैथोलिक…

17 hours ago

This website uses cookies.