Myths About IVF: कैंसर का है खतरा? जानें क्या है मिथ और क्या सच्चाई

Myths About IVF: कैंसर का है खतरा? जानें क्या है मिथ और क्या सच्चाई Myths About IVF: कैंसर का है खतरा? जानें क्या है मिथ और क्या सच्चाई

Sanjana

13 Aug 2022

भारतीय समाज में ऐसी बहुत सी चीजे हैं जिन्हें आदर्श माना जाता है। और उनके विरुद्ध काम करने पर आलोचना की जाती है। यहां तक कि बच्चा पैदा करना भी एक ऐसा ही आदर्श बन चुका है। भारत में अपने खून यानि खुद के बच्चे को प्राथमिकता दी जाती है। यहां तक कि कुछ लोग गर्भधारण न करने के कारण ज़िंदगी भर बिना बच्चे के रहने के लिए तैयार हो जाते हैं लेकिन बच्चा गोद लेने के लिए नहीं मानते हैं।

रूढ़िवादी समाज के लोग शादीशुदा जोड़ो पर अपना खुद का बच्चा करने के लिए दबाव बनाते हैं। इतने सब के बाद भी रिप्रोडक्टिव हैल्थ के बारे में खुलकर बात नहीं की जाती हैं। इन बातो को शर्मनाक माना जाता है। यह आज तक एक गुप्त विषय बना हुआ है जिसके बारे मे खुले आम बात करने से लोगों को झिझक होती है।

टेक्नोलॉजी इतनी आगे बढ़ चुकी है कि अब हर समस्या का हल मुमकिन है। गर्भधारण करने में असमर्थ लोग अब इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) की मदद से अपना खुद का बच्चा पैदा कर सकते हैं। इस विषय पर खुलकर चर्चा न किए जाने के कारण इसके बारे में कई मिथक प्रचलित हैं जिन पर लोग भरोसा करके भ्रमित हो जाते हैं। IVF के सही प्रयोग और बहतर परिणामों के लिए आपको इससे जुडे मिथकों की सच्चाई के बारे मे पता होना चाहिए।

IVF से जुडे मिथक 

1. एक से अधिक बच्चे पैदा होते है

कई लोग ऐसा मानते हैं कि IVF एक से अधिक बच्चे पैदा हो जाते हैं। लेकिन सच तो यह है कि अगर अंतरराष्ट्रीय निर्देशानुसार इस प्रक्रिया को किया जाए मल्टीपल प्रेग्नेंसी की संभावना 20% होती है। जब प्रेग्नेंसी एक नही होती है तो प्रेगनेंट महिलाओं के लिए मुश्किलें बढ़ जाती हैं। जिन मामलों में महिलाओं की उम्र 30 से अधिक हो जाती है और IVF बार बार असफल होता है तो ऐसे मे एक से ज़्यादा या मल्टीपल एंब्रियो प्लांट करने की सलाह दी जाती है। 

2. केवल infertile जोड़ो के लिए है

अनेक लोगों को यही लगता है कि IVF का प्रयोग केवल वही लोग करते हैं जो गर्भधारण करने में असमर्थ होते हैं। यह बिल्कुल गलत है क्योंकि IVF की मदद और भी कई लोग ले सकते हैं। लोग इसकी मदद अपने होने वाले बच्चे को जेनेटिक डिसऑर्डर से बचाने के लिए भी के सकते हैं। डॉक्टर आपके एग लेकर लैब में टेस्ट करते हैं और हल्दी एंब्रियो को ट्रांसफर करते हैं। इससे डिसऑर्डर वाली जीन दूर हो जाती हैं। वे आपके हेल्थी एंब्रियो को आगे वाली प्रेग्नेंसी के लिए भी रख सकते हैं।

3. हर उम्र में मददगार है IVF

कुछ लोग इस बात से भ्रमित हैं कि IVF की मदद से किसी भी उम्र में आप अपना बच्चा पैदा कर सकते हैं। जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ती है उसका रिप्रोडक्टिव सिस्टम भी विकास करता है। हो सकता है कि IVF की मदद से भी आपका रिप्रोडक्टिव सिस्टम प्रचुर मात्रा में एक हल्दी एंब्रियो के लिए एग रिलीज ना कर पाए।

आप IVF के अच्छे परिणाम पाएंगे या नहीं, यह कई चीजों पर निर्भर करता है। कुछ शादीशुदा जोड़ो को प्रेगनेंट होने में इतनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है कि वे बार बार IVF की प्रक्रिया दोहराते हैं। इस बात की कोई गारंटी नहीं होती है कि  IVF के बाद भी आप प्रेग्नेंट होंगे या नहीं।

4. हमेशा सफलता मिलती है

कई लोग यह सोचते हैं कि IVF की मदद से वे निश्चित ही प्रेगनेंट हो जायेंगे और गर्भधारण करने में समर्थ होंगे। लेकिन ऐसा नहीं है क्योंकि यह एक ऑप्शन है गारंटी नहीं। IVF से 100% बच्चा होने की गारंटी नहीं मिलती है। पर अधिकतर इसके सफल होने की संभावना होती है। इसकी सफलता कई कारकों पर निर्भर करती है जैसे आपकी उम्र, इनफर्टिलिटी का कारण, आपकी रिप्रोडक्टिव हैल्थ, हार्मोनल बैलेंस, आदि। 

5. लाइफस्टाइल और हेल्थी डाइट से सफलता नहीं मिल सकती है

ऐसा देखा गया है कि अधिक स्ट्रेस लेने से फर्टिलिटी कम हो जाती है। तो वहीं जो महिलाएं 8 घंटे की पुरी नींद लेती हैं उनके IVF सफलता की संभावना ज्यादा होती है। अस्वस्थ डाइट, बेकार नींद, अस्वस्थ लाइफस्टाइल, धूम्रपान और शराब का सेवन करने से infertility बढ़ जाती है और IVF के विफल होने की संभावना बढ़ जाती है। 

कुपोषित महिलाओ के इनफर्टिलिटी अनुभव करने की संभावना अधिक होती है। इन सभी तथ्यों से यह साबित होता है कि अगर लाइफस्टाइल और डाइट हेल्थी हो तो फर्टिलिटी बढ़ सकती है और IVF के सफल होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

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