माइथोलॉजिकल फेमिनिस्ट कैरेक्टर – हम सब कहीं ना कहीं बचपन से ही धार्मिक कहानियां या मिथ्स सुनते आ रहें हैं। उनमें से ऐसे कई करैक्टर है जिन्होंने हमें प्रेरित किया है। हालांकि पहले भी महिलाओं की आवाज को और उन्हें दबा कर रखा जाता था। लेकिन कई एक्टिविस्ट और फिलोसोफर ने दावा किया है कि इतिहास और लिटरेचर में भी ऐसी कई महिलाएं थी, जिन्होंने गलत के खिलाफ आवाज उठाई है। जानिए 5 मेट्रोलॉजिकल फेमिनिस्ट कैरेक्टर्स के बारे में और उनके नाम।

1. सीता

जब कभी भी आदर्श पत्नी या औरत की बात की जाती है तो सीता का नाम पहले आता है। सीता जिन्हें राम भगवान की पत्नी का दर्जा दिया गया है, वह हमेशा से पवित्रता और बलिदान का प्रतीक मानी जाती है। लेकिन इसके अलावा सीता एक बहादुर महिला भी थी जिन्होंने डटकर रावण का सामना किया था। साथ ही गलत के खिलाफ आवाज उठा कर अपनी आधी से ज्यादा जिंदगी अकेले अपने दो बेटों के साथ जंगलों के बीच आश्रम में बिताई थी।

2. शूर्पणखा

रावण की बहन शूर्पणखा को हमेशा से राक्षस के रूप में माना जाता है। शूर्पणखा सीता के अपरहण और रावण और राम के बीच हुए युद्ध का कारण भी है। लेकिन शूर्पणखा विलन नहीं थी बल्कि वह बस राम और लक्ष्मण से अपनी शादी रचाना चाहती थी। लेकिन इसके लिए उसे कठोर सजा मिली।

सूप नखा हमें स्टीरियोटाइप्स की याद दिलाती है जो हमारा समाज आज भी फॉलो करता है। किसी भी महिला की पूजा करने से पहले समाज उसके चरित्र को देखता है। इसके अलावा जो महिला समाज की प्रथा का उल्लंघन कर अपनी जिंदगी जीना चाहती है, उन्हें समाज डरा धमका कर काबू में करना चाहता है। धार्मिक कहानियां हो या आज का जमाना महिलाओं के मामलों में कुछ भी नहीं बदला है।

3. द्रौपदी

सभी को पता होगा कि महाभारत में द्रौपदी की शादी पांच पांडवों से हुई थी। महाभारत में सब कुछ हार जाने के बाद युधिष्ठिर ने द्रौपदी को दांव पर लगा दिया था, जिसके बाद द्रोपदी का चीरहरण सबके सामने किया गया था। लेकिन द्रौपदी तब भी झुकी नहींं थी बल्कि न्याय पाने के लिए उन्होंने अपनी आवाज उठाया था।

द्रोपदी ने हार ना मानते हुए बदला लेने के लिए प्रण लिया था कि वह अपना बाल तब तक नहीं बांधगी जब तक दुशासन की खून से अपना बाल धो ना लें। इसके अलावा द्रौपदी को पांच पांडवों से शादी करने के लिए आलोचना कभी सामना करना पड़ा था। जबकि हमने इतिहास में देखा है कि राजा के पास तीन या चार पत्नियां हुआ करती थी।

4. काली माता

काली माता अपने गुस्से और शक्ति के लिए जानी जाती है जिन्होंने राक्षस रखताबीज का अंत किया था। पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं से हमेशा से उम्मीद की जाती है कि अच्छे से बर्ताव, कपड़े और बैठे। मिलाओ कामेश्वर कहा जाता है कि वह ढके हुए अनकंफरटेबल कपड़े पहने जैसे कि साड़ी या लहंगा और सुंदर दिखे। लेकिन काली माता इसका विरोध करती है।

वह समाज के अनुसार ढके हुए कपड़े या सुंदर नहीं दिखती हैं। समाज के खिलाफ जाकर वह डेरिंग मन और अपने मुताबिक जीती है।

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