Symptoms Of Depression: आपकी उदासी कहीं डिप्रेशन का संकेत तो नहीं?

Symptoms Of Depression: आपकी उदासी कहीं डिप्रेशन का संकेत तो नहीं? Symptoms Of Depression: आपकी उदासी कहीं डिप्रेशन का संकेत तो नहीं?

Sanjana

09 Aug 2022

किसी भी बीमारी या डिसऑर्डर के लक्षण जाने से पहले हमें उस बीमारी के बारे में पता होना चाहिए। वह क्या है और हमारे लिए कैसे हानिकारक है। डिप्रेशन के लक्षणों की बात करने से पहले हम आपको यह बताएंगे कि आखिर डिप्रेशन क्या है।

डिप्रेशन क्या है?

डिप्रेशन को आप एक मूड डिसऑर्डर समझ सकते हैं। यह तब होता है जब हमारा दिमाग अत्यधिक नेगेटिविटी से भर जाता है। इसमें व्यक्ति हमेशा उदास रहता है और उसे दुख गुस्से और डर की भावनाएं महसूस होती है। डिप्रेशन लोगों को एक ऐसी स्टेट में पहुंचा देता है जहां उन्हें लगता है कि अब उनकी जिंदगी में कुछ बाकी नहीं है और इसका खत्म हो जाना ही बेहतर है। इसलिए डिप्रेशन कई लोगों की आत्महत्या की वजह भी बन जाता है।

कुछ लोगों को लगता है कि अगर व्यक्ति को डिप्रैशन है तो आपको उन्हे देखकर ही पता चल जाएगा। लेकिन अब डिप्रेशन का रूप भी बदल रहा है। हो सकता है कोई व्यक्ति आपके सामने ठहाके ले लेकर हंस रहा हो लेकिन असल में वह डिप्रेशन से गुजर रहा हो। डाटा के मुताबिक अब यह काफ़ी आम हो गया है। लेकिन इसके लक्षण और इसके परिणाम बिलकुल आम नहीं हैं।

दुख और उदासी से कैसे अलग है डिप्रेशन?

दुख और उदासी अच्छी भावनाएं और इनका जिंदगी में होना जरूरी है। लेकिन इन दोनों में बेहद फर्क है। डिप्रेशन में आप अपना सेल्फ कॉन्फिडेंस और आप स्वाभिमान खो बैठते हैं जबकि उदासी में ऐसा नहीं होता है। दुख का समय केवल थोड़े वक्त का होता है और इसके बाद आप वापस अपनी पॉजिटिव भावनाओं को महसूस कर पाते हैं और खुश हो पाते हैं। लेकिन डिप्रेशन में निराशा आपके मस्तिष्क को बिल्कुल नहीं छोड़ती है।

डिप्रेशन के लक्षण

डिप्रेशन अलग-अलग लोगो के लिए अलग-अलग रूप में सामने आ सकता है। आप अभी तक समझ गए होंगे कि यह आपके दिमाग और मूड से कितनी गहराई में संबंधित है। लेकिन आपके लिए यह जानना भी जरूरी है कि यह केवल हमारे मूड को ही नहीं बल्कि हमारे शरीर को भी प्रभावित करता है। इसके लक्षण हो सकते हैं -

1. उदासी या चिंता

डिप्रेशन का सबसे पहला लक्षण उदासी या चिंता होता है। जब आप किसी नकारात्मक विचार के बारे में सोचते रहते हैं या चिंता करते रहते हैं तो हो सकता है कि यह आपके डिप्रेशन का संकेत हो। क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि आप भाई लोगों के साथ एक मेज पर बैठे हैं लेकिन आप उन्हें सुन नहीं रहे हैं? या फिर आपको ऐसा महसूस हुआ हो कि आप अंदर से खोखले हो चूके हैं या अब आपके पास अब जीने के लिए कोई कारण नहीं बचा है? 

अगर हां, तो सावधान हो जाएं क्योंकि ये डिप्रेशन का लक्षण हो सकता है जिसके परिणाम आपके लिए घातक साबित हो सकते हैं।

2. निराशा

जब आप किसी बुरे वक्त या मेंटल डिसऑर्डर से गुजर रही हो और आपको निराशा ही निराशा नजर आए। डिप्रेशन के मुख्य लक्षणों में निराशा भी शामिल है। आशा और उम्मीद पर तो दुनिया कायम है लेकिन जब यह आशा ही समाप्त हो जाए तो कोई व्यक्ति कैसे डिप्रेशन का शिकार नहीं होगा।

3. अत्यधिक रोना

कहते हैं रोना सेहत के लिए अच्छा होता है। इससे दिल हल्का हो जाता है। यह हमारी भावनाओं का अभिन्न हिस्सा है। लेकिन जब यह अपनी हद पार कर जाता है यानि जब आप चाह कर भी रोना बंद नहीं कर पाते हैं और लगातार रोते रहते हैं तो यह डिप्रेशन का रूप भी ले सकता है।

4. मनपसंद काम मे मन न लगना

जब आपका दिमाग खुश नहीं होता है और नकारात्मक विचारों की ओर अग्रसर होता है तो आप चाहकर भी अपने मनपसंद काम में मन नहीं लगा पाते हैं। जिस काम को करने के लिए आप सबको छोड़ सकते थे वह काम भी अचानक से आपको ना पसंद आने लगता है। केवल काम ही नहीं बल्कि आपका मनपसंद फूड भी आपको भाता नहीं है।

5. ध्यान केंद्रित न कर पाना

डिप्रेशन के दौरान आपका मस्तिष्क अपने आप नेगेटिविटी की तरफ खिंचा चला जाता है। आप कोशिश करते है कि आप अपना ध्यान उस से हटाकर किसी और चीज पर केंद्रित करें लेकिन आप ऐसा कर नहीं पाते हैं। यह भी डिप्रेशन का एक लक्षण साबित हो सकता है।

6. अधिक थकान

हमारा मस्तिष्क हमारे पूरे शरीर को कंट्रोल करता है। जब हमारा दिमाग थका हुआ होता है और अंदर से खालीपन महसूस करता है तो हमारे शरीर को भी ऐसे ही सिग्नल मिलते हैं। हम थोड़ा सा काम करके ही जल्दी थक जाते हैं क्योंकि हमारा मस्तिष्क शरीर को सिग्नल देता है कि अब वह थक चुका है।

7. आत्महत्या के खयाल

डिप्रेशन का सबसे घातक लक्षण और परिणाम आत्महत्या होता है। कभी-कभी लोग इतने ज्यादा दुखी और डिप्रेस्ड हो जाते हैं कि उन्हें जिंदगी को जीने का कोई मकसद ही नहीं नजर आता है। वे भूल जाते हैं कि उन्हें अपनी जिंदगी में इतना कुछ हासिल करना है और अपने परिवार के लिए जीना है। 

नकारात्मक विचार उनके मस्तिष्क को इतनी बुरी तरह घेर लेते हैं कि उन्हें अपनी जिंदगी बद से बदतर महसूस होती है। और ऐसे में भी इस जिंदगी को खत्म करने के बारे में सोचते हैं। कभी-कभी तो डिप्रेशन का परिणाम आत्महत्या होती है।

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