इंडिया में आज भी divorce (तलाक़ पाना) बेहद मुश्किल है। डिवोर्स आज भी एक सोशल taboo बना हुआ है जिससे लड़कियों और महिलाओं को जज किया जाता रहा है। और जब पैसों की बात आती है तो मुश्क़िलें और भी बढ़ जाती है, खासकर जब आप वर्किंग ना हो तो।

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तो आज हम डिवोर्स राइट्स और Alimony से जुड़ी वो सारी बातें जानते हैं जो हर किसी को जानना जरूरी है।

Alimony (गुज़ारा भत्ता) क्या होता है? (Alimony meaning in Hindi)

Alimony एक आर्थिक सहारा (financial help) है जो आप अपने पार्टनर से अलग होने से पहले या बाद में क्लेम कर सकती हैं और आपका पार्टनर उसे देने के लिए कानूनी तौर पर committed होता है। आपका Alimony पाने का अधिकार डिवोर्स और शादी के क़ानून के अंदर आने वाले सबसे ज़्यादा important Rights में से एक है। हिन्दू मैरिज ऐक्ट(1955) में पति और पत्नी दोनों के इंटरेस्ट को ध्यान में रखा गया है और ऐक्ट के अनुसार कुछ मामलों में Alimony मिलना जरूरी नहीं है। 

कब आप Alimony के लिये क्लेम कर सकते हैं

1.अगर आप कमा रही हैं, तब भी आपको आपके पति से Alimony मिल सकती है, अगर आप अपने पति के मुकाबले उसी तरह की लाइफ स्टाइल एफोर्ड नहीं कर पा रहीं है तो।

2.अगर आप नहीं कमा रही हैं तो कोर्ट आपकी शिक्षा, उम्र, और एबिलिटी को ध्यान में रखते हुए Alimony के बारे में फैसला करता है।

3.अगर एक couple का बच्चा है तो Alimony के अलावा पिता को अलग से पैसे देने होंगे बच्चे की देखभाल के लिये। अगर मां कमा रही है तो उसे भी अपनी कमाई का कुछ हिस्सा बच्चे की देखभाल के लिए देने होंगे।

4.अगर पति शारीरिक(Physically) रूप से काम करने लायक नहीं रह जाता है और पत्नी कमा रही है तो पति को भी Alimony मिल सकती है। और अगर पति या पत्नी की दूसरी शादी हो जाती है तो वे Alimony को रोकने के लिये Petition दे सकते हैं। 

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