Champa Shashti 2022:चंपा षष्ठी व्रत कब है? जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

चंपा षष्ठी के दिन भगवान शिव और उनके बड़े पुत्र भगवान कार्तिकेय की पूजा करने का विधान है। इस दिन व्रत और पूजा करने से पाप मिटते हैं। आइए जानते हैं पूरी जानकारी आज के इस ब्लॉग में -

Vaishali Garg
26 Nov 2022
Champa Shashti 2022:चंपा षष्ठी व्रत कब है? जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

Champa Shashti 2022

Champa Shashti 2022: अगहन माह या मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को चंपा षष्ठी का व्रत रखा जाता है। चंपा षष्ठी का व्रत मुख्यत: महाराष्ट्र और कर्नाटक में रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और उनके बड़े पुत्र भगवान कार्तिकेय की पूजा करने का विधान है। इस दिन व्रत और पूजा करने से पाप मिटते हैं, कष्ट दूर होते हैं, संकटों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूरी होती है।

रवि और द्विपुष्कर योग में चंपा घड़ी इस साल चंपा षष्ठी के दिन रवि योग और द्विपुष्कर योग बना हुआ है। इस दिन ध्रुव योग सुबह से लेकर दोपहर 02 बजकर 55 मिनट तक है। रवि योग सुबह 06 बजकर 55 मिनट से सुबह 08 बजकर 38 मिनट तक है, वहीं द्विपुष्कर योग सुबह 11 बजकर 04 मिनट से अगले दिन 30 नवंबर को सुबह 06 बजकर 55 मिनट तक है।

Champa Shashti 2022: चंपा षष्ठी का महत्व

चंपा षष्ठी के अवसर पर भगवान शिव के खंडोबा स्वरूप की पूजा की जाती है। किसान भगवान खंडोबा को अपने देवता के रूप में पूजा करते हैं। इस दिन भगवान शिव के मार्कंडेय स्वरूप की भी पूजा होती है। पूजा के समय शिवलिंग पर बाजरा, बैंगन, खांड, फूल, अबीर, बेलपत्र आदि चढ़ाया जाता है। इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा में चंपा का फूल चढ़ाते हैं। इस व्रत को करने से सुख, शांति और मोक्ष प्राप्त होता है।

Champa Shashti 2022: चंपा षष्ठी 2022 तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि का प्रारंभ 28 नवंबर दिन सोमवार को दोपहर 01 बजकर 35 मिनट से हो रहा है। यह तिथि अगले दिन 29 नवंबर मंगलवार को सुबह 11 बजकर 04 मिनट पर समाप्त हो रही है। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, चंपा षष्ठी का व्रत 29 नवंबर मंगलवार को रखा जाएगा।

पौराणिक कथा के अनुसार एक समय मणि - मल्ह नाम के दो राक्षस थे। वो दोनो सगे भाई थे। वो ब्रह्मा जी से वरदान पाकर बहुत शक्तिशाली और निरंकुश हो गये थे। उन्होने अपनी शक्ति के अभिमान में आकर ऋषि - मुनियों का जीवन दूभर कर दिया था। तब ऋषियों ने देवताओं से सहयता मांगी पर कोई लाभ ना हुआ। मणि - मल्ह दोनों भाइयों की शक्ति के सामने उनकी एक ना चली तब सभी मिलकर भगवान शिव की शरण में गये। तब भगवान शिव ने उनकी सहायता का वचन दिया।


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