अगर आप सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं, तो कई बार आपको हैरेसमेंट का सामना भी करना पड़ता होगा। भारत में महिलाओं को हमारी सामाजिक संरचना के कारण अधिक यौन शोषण (sexually demeaning) और अवैध टिप्पणियों (illict comments) के अधीन किया जाता है। इनमें से कई ट्रोल विशेष रूप से महिलाओं पर और हमेशा ऑनलाइन दुनिया में तय किए जाते हैं।

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यहां नाॉन लीगल मेकैनिज्म दिए गए हैं, जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए ताकि आप ऑनलाइन खुद को बचा सके।

नाॅन लीगल मेकैनिज्मस

1. सोशल मीडिया के उपयोग के लिए एक ईमेल-आईडी दूसरों के साथ शेयर करने पर विचार करें।

2.  फोटोज अपलोड करने से बचें जिससे आपकी आईडेंटिटी और लोकेशन का पता चल सकता है।

3. यदि आपकी ऑनलाइन एक्टिविटीज में गुमनामी प्रासंगिक है, तो pseudonym का उपयोग करें।

ऐसे ऑर्गेनाइजेशन तक पहुंचें जो भारत में साइबर क्राइम से  बचाव के लिए लोगों की मदद करने के लिए काम करते हैं। वे ऐसे लोगों को सहायता प्रदान करते हैं – जिन्होंने इन सब चीजों का सामना किया होता है जैसे साइबर हैरेसमेंट, हेट स्पीच, साइबरस्टॉकिंग / बुलिंग, आईडेंटिटी की चोरी, सोशल नेटवर्किंग हेरेसमेंट के शिकार, महिलाओं और टीन विक्टिम।

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4. अन्य लोगों द्वारा आपकी इंफॉर्मेशन शेयर करने पर नजर रखें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आपकी कोई भी पर्सनल आईडेंटिफिएबल इनफॉरमेशन (Identifiable Information) किसी गलत हाथों में ना पढ़ सके।

5. ऑनलाइन दिखाई देने वाली अनऑथराइज्ड इंफॉर्मेशन (Unauthorised information) की निगरानी के लिए अपने आपको इंटरनेट पर मॉनिटर करें।

6. स्ट्रांग पासवर्ड या पासवर्ड मैनेजर का उपयोग करें, और अपने सर्विस प्रोवाइडर ‘प्राइवेसी पॉलिसी’ काे रिव्यू करें।

7.  लोगों को ब्लॉक करने में  हिचकिचाए नहीं, ऐसे किसी भी कमेंट्री को सुनने की ज़रूरत नहीं है जो आपको अनकंफरटेबल या खतरे में महसूस कराता है।

8. सर्विस प्रोवाइडर या प्लेटफ़ॉर्म कंपनियों को घटनाओं की रिपोर्ट करें।

9. अपराधियों, सर्विस प्रोवाइडर्स और लॉ एनफोर्समेंट की सारी कम्युनिकेशन का रिकॉर्ड रखें।

लोगों को ब्लॉक करने में  हिचकिचाए नहीं, ऐसे किसी भी कमेंट्री को सुनने की ज़रूरत नहीं है जो आपको अनकंफरटेबल या खतरे में महसूस कराता है।

10. फिजिकल सेफ्टी पर वास्तविक खतरे होने पर लॉ एनफोर्समेंट को अप्रोच करें।

11.हमेशा दोस्तों और परिवार का सपोर्ट लेना चाहिए।

12. ऐसे ऑर्गेनाइजेशन तक पहुंचें जो भारत में साइबर क्राइम से  बचाव के लिए लोगों की मदद करने के लिए काम करते हैं। वे ऐसे लोगों को सहायता प्रदान करते हैं – जिन्होंने इन सब चीजों का सामना किया होता है जैसे साइबर हैरेसमेंट, हेट स्पीच, साइबरस्टॉकिंग / बुलिंग, आईडेंटिटी की चोरी, सोशल नेटवर्किंग हेरेसमेंट के शिकार, महिलाओं और टीन विक्टिम।

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