तलाक रेट में इंडिया आखिरी नम्बर पर आता है जहां महज 1% शादियां ही डिवोर्स तक जा पाती है। इंडिया में जहां ज्यादातर कपल्स तलाक फ़ाईल नहीं करते और अलग नहीं होते, वहीं जो फ़ाईल करते हैं वो इस लीगल सिस्टम से बिल्कुल अंजान होते है। फैमिली कोर्ट में तलाक के केस सालों साल चलते रहते हैं और रोजाना सॉल्व होने की जगह बढ़ते ही जाते है। इसके अलावा एक और कारण है जिसकी वजह से महिलायें डिवोर्स नहीं लेतीं, वो है की सोसाइटी कभी उन्हें हौंसला ही नहीं देती कि आप तलाक भी ले सकतीं है और जिस शादी से आप नाखुश(unhappy) हैं, उन्हें पीछे छोड़कर आगे बढ़ सकती हैं।

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शीदपीपल.टीवी की बात मुंबई में रह रहीं डिवोर्स लॉयर वंदना शाह से हुई, जिसमें वह बतातीं हैं की डिवोर्स लेने से पहले अपने लिये एक सर्कल औफ सपोर्ट का बनाना क्यों जरूरी है?

अपने लिये एक सर्कल औफ सपोर्ट (Circle Of Support) को बनाना

जैसे की हमेशा होता आया है, अगर फैमिली आपके लिये खड़ी नहीं होती तो आप अपने दोस्तों का सहारा लीजिये, उनसे हिम्मत मिलेगी। एक सर्कल औफ सपोर्ट का होना जरूरी है ताकि आप हिम्मत ना हारें जब लोग आप पर तंज कसने लगें या आपको ब्लेम करने लगें, क्योंकि आज भी इंडियन सोसाइटी में तलाक को एक धब्बा (stigma) के रुप में देखा जाता है। शाह कहती हैं “महिलाएं अक्सर अपने जेवर और प्रॉपर्टी को सिर्फ अपना नहीं समझतीं और तलाक के दौरान वह उनसे छीन लिया जाता है, इसलिए तलाक फ़ाईल करने से पहले यह जरूरी है की आपके प्रॉपर्टी और जेवर आपके पास रहें क्योंकि एक बार कोर्ट की कार्यवाही शुरु होने पर यह बहुत मुश्किल हो जाता है।” 

शाह ने यह भी कहा “जब आप डिवोर्स फ़ाईल करने का सोचतीं है और जब तक आप फ़ाईल कर नहीं लेतीं, इस दौरान आप अपने पति के बारे में जितनी जानकारी हो सके इकट्ठा कर लें।” 

आज जब महिलाओं के पास आर्थिक आजादी (financial independence) है, तो उनके पास अपनी शादियों को छोड़ने की चॉइस भी है अगर उन्हें उनमें खुशी नहीं मिलती है तो। वह दिन चले गए जब सभी महिलाओं को अपने पति पर डिपेंड रहना पड़ता था चाहे वे खुश हो या ना हों। भले ही डिवोर्स को आज भी नीची नज़र से देखा जाता हो लेकिन आजकल हाई क्लास के अलावा भी और भी डिवोर्स केस आने लग गए हैं जो दिखाता है की आज महिलायें अपने लिए कितनी जागरुक हुई हैं। 

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