डाउन सिंड्रोम क्या है – कई बार कुछ समस्या या बीमारी के कारण प्रेग्नेंट महिला को दिक्कत होती है या बच्चा विकलांग पैदा होता है। उसी में से एक है डाउन सिंड्रोम। कई नवजात शिशु डाउन सिंड्रोम के साथ पैदा होते हैं। 35 साल से अधिक उम्र के महिलाओं में डाउन सिंड्रोम वाले बच्चे को जन्म देने की संभावना ज्यादा होती है। एनडीएसएस के अनुसार यूनाइटेड स्टेट्स में 700 में से एक बच्चा डाउन सिंड्रोम के साथ पैदा होता है।

डाउन सिंड्रोम क्या है?

यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें शिशु का मानसिक और शारीरिक विकास अच्छे से नहीं हो पाता है। इसमें शिशु 21 वें क्रोमोजोम की एक्स्ट्रा कॉपी के साथ पैदा होता है। इसे ट्रिसोमी 21 भी कहा जाता है। इसमें बच्चें के शारीरिक विकास में देरी होती है या विकलांग पैदा होता है।

 

कई डिसेबिलिटीज जीवन भर रहती हैं। इसके कारण बच्चे की लाइफ एक्सपेक्टेंसी कम हो जाती है। हालांकि मेडिकल में तरक्की होने के कारण ऐसी स्थिति को ओवरकम किया जा सकता है।

डाउन सिंड्रोम का कारण

रिप्रोडक्शन के समय माता-पिता दोनों की क्रोमोजोम बच्चे तक पहुंचते हैं। जब बच्चे की कोशिकाएँ विकसित होती हैं, तो हर सेल्स को कुल 46 क्रोमोजोम्स के लिए 23 पियर क्रोमोजोम प्राप्त करने होते हैं। आधे माता के और आधे पित्ता के क्रोमोसोम बच्चे को मिलते हैं। लेकिन कई बार क्रोमोसोम सही से अलग नहीं हो पाता है। इसके कारण बच्चे में दो के बजाय तीन या एक्स्ट्रा कॉपी आ जाती है। यह एक्स्ट्रा क्रोमोजोम के कारण बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकार के साथ पैदा होता है।

इसके लक्षण क्या है?

  • छोटा सर या कान होना
  • फेशियल फीचर सही नहीं होना
  • छोटा गर्दन होना
  • उभरी हुई जीभ
  • बच्चे का कद, हाथ, पेड़, उंगलियां छोटा होना

इसके अलावा भी बच्चों को कई तरह के समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे कि सुनने में दिक्कत, कानों में संक्रमण, आंखों को कमजोर होना, अजीब तरह से बर्दाश्त करना, चबाने में दिक्कत होना और इत्यादि।

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