“आज पूरा देश कोविड – 19 संक्रमण से लड़ रहा है” ये लाइन हमे अब तो रोज़ाना ही सुनने को मिलती है। और ये सच भी है, आंकड़ों के अनुसार अभी तक लगभग देश के 80 % लोगों को ये संक्रमण हो चुका है। अब तो वैसे भी मौसम बदल रहा है तो हमे कोरोना के साथ साथ सर्दी-ज़ुखाम से भी निपटना पड़ेगा। इस बीच मुझे और मेरे परिवार को भी इस संक्रमण से झूझना पड़ा। हालाँकि हम ‘असिम्पटोमैटिक’ (asymptomatic ) मतलब हमारे अंदर उसका कोई लक्षण नहीं दिखाई दिया, पर टेस्ट पॉजिटिव था ।

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शुरुआत के दिन

जब हमारा कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया तब हम सबने खुद को घर में अलग कर लिया था । ऑनलाइन क्लासेस की वजह से मेरी आँखों में दर्द था इसलिए डॉक्टर ने मुझे कोई भी स्क्रीन वाली चीज़ यूज़ करने से मना की थी। इसकी वजह से मैं न तो मोबाइल यूज़ कर सकती थी, न लैपटॉप और ना ही टीवी देख सकती थी। मैंने अपने कॉलेज से भी छुट्टी लेली थी। इन सबके बीच कोरोना होने की वजह से शुरुआत के दिन मेरे लिए काफी डिप्रेशन से भरे थे । पूरा दिन लगता था कि मैं अकेली हूँ और मेरे पास कोई नहीं है । ये सिर्फ मेरे साथ ही नहीं, मेरे परिवार वालो के साथ भी हुआ । वो मोबाइल यूज़ कर सकते थे पर वो भी एक इंसान कितना करे ?

कोरोना से कैसे सही हुई ?

गवर्नमेंट की बताई हुई दवाइयां तो चल ही रही थी, पर साथ में मैंने योग भी शुरू करी। इससे मुझे काफी फायदा हुआ। योग की वजह से मेरी बॉडी का ऑक्सीजन लेवल मैनटैनेड रहा जिससे मुझे ज़्यादा परेशानी नहीं हुई। कुछ दिनों के अंदर ही मेरे पूरे परिवार ने और आई ने इससे रिकवर कर लिया था ।

आस-पड़ोस के लोगों का बर्ताव

पोस्टर न लगने की वजह से ये बात ज़्यादा लोगों को नहीं पता चली लेकिन जिनको पता चली उनमे से कुछ तो बहुत ही अच्छे रहे और वहीँ कुछ हमे हीं भावना से देखने लगे। ये कोरोना संक्रमण को झेलना और भी मुश्किल कर देता है । ठीक होने के बाद जब हमने घर से बाहर निकलना शुरू किया लोग हमसे बात नहीं करना चाह रहे थे और ये भी कह रहे थे कि इनको कोरोना हुआ था इनसे दूर रहो। ये सब चीज़ें लोगों की सोच के बारे में बताती हैं । पर इन्हीं के बीच अच्छे लोग भी होते हैं जो आपकी मदद करना चाहते हैं.

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