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Photograph: (freepik)
पिछले कुछ सालों में के-ड्रामा सिर्फ़ मनोरंजन का एक पॉपुलर ज़रिया ही नहीं बना, बल्कि उसने रिश्तों को देखने का नज़रिया भी बदल दिया है। इंडियन महिलाओं के बीच कोरियन ड्रामा की पॉपुलैरिटी ने प्यार, केयर और पार्टनरशिप की एक न्यू इमेज बना दि है। इन शोज़ ने महिलाओं को यह सोचने का मौका दिया है कि रिश्तों में वे क्या चाहती हैं और किन चीज़ों पर अब कोम्प्रोमाईज़ नहीं करना चाहतीं।
के-ड्रामा ने इंडियन महिलाओं की रिलेशनशिप एक्सपेक्टेशन कैसे बदल दी?
1. इमोशनल अवेलेबिलिटी की बढ़ती उम्मीद
कोरियन ड्रामा में मेल कैरेक्टर को अक्सर इमोशनली अवेलेबल दिखाया जाता है। वे अपनी फीलिंग्स को छिपाने के बजाय एक्सप्रेस करते हैं, समझते हैं और खुलकर बताते हैं। इसलिए, इंडियन महिलाएं रिश्तों में इमोशनल कनेक्शन को ज़्यादा इम्पोर्टेंस देने लगी हैं। सिर्फ़ फाइनेंशियल सिक्योरिटी या सोशल स्टेटस अब काफी नहीं माना जाता, पार्टनर का इमोशनली प्रेज़ेंट होना भी ज़रूरी है।
2. रिस्पेक्ट और इक्वालिटी का कॉन्सेप्ट
के-ड्रामा में रिश्तों को अक्सर एक्वाली पार्टनरशिप के तौर पर दिखाया जाता है। महिला कैरेक्टर्स की चोइसस, क / रियर और डिशन्स को इम्पोर्टेंस दी जाती है। इससे इंडियन महिलाओं के मिंडसेट में भी बदलाव आया है। अब उन्हें लगता है कि प्यार कंट्रोल या सैक्रिफाइस के बजाय रेस्पेक्ट और सपोर्ट पर बेस्ड है। रिश्ते में इक्वलिटी की उम्मीद अब ज़्यादा क्लियर दिखाई देने लगी है।
3. छोटे जेस्चर की अहमियत
के-ड्रामा ने यह भी सिखाया कि प्यार हमेशा बड़े प्रॉमिसेस या ड्रामैटिक सीन्स से नहीं दिखता। अटेंशन देना, साथ बैठना और मुश्किल समय में साथ रहना जैसे छोटे गेस्टर्स रिश्तों को और स्ट्रांग कर सकते हैं। इससे इंडियन महिलाओं की रिलेशनशिप एक्सपेक्टेशन और सेंसिटिव हो गई हैं।अब वे रोज़मर्रा की केयर और एफर्ट को ज़्यादा वैल्यू देने लगी हैं।
4. रेड फ्लैग्स की पहचान आसान हुई
के-ड्रामा देखने के बाद, कई महिलाओं को टॉक्सिक बिहेवियर के बारे में ज़्यादा पता चला। डिसरिस्पेक्ट, इमोशनल नेगलेक्ट, या मैनिपुलेशन जैसे पैटर्न अब "नॉर्मल" नहीं माने जाते। इन शो ने महिलाओं को सिखाया है कि प्यार के नाम पर उन्हें हर चीज़ सहने की ज़रूरत नहीं है।
5. परफेक्ट रोमांस बनाम रियल लाइफ
हालाँकि के-ड्रामा ने एक्सपेक्टेशंस बढ़ाई हैं, लेकिन इससे एक परफेक्ट इमेज भी बनी है, जो रियल लाइफ से अलग हो सकती है। हर रिश्ता ड्रामा जैसा नहीं होता, लेकिन इन शोज़ ने महिलाओं को यह हक़ ज़रूर दिया है कि वे कम से कम बेसिक रिस्पेक्ट, केयर और इमोशनल सेफ्टी की उम्मीद कर सकें। के-ड्रामा ने इंडियन महिलाओं के रिलेशनशिप स्टैंडर्ड को बढ़ाया है, जिससे वे ज़्यादा अवेयर और स्ट्रांग बन गई हैं।
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