आज भी हमारे देश में पेरेंट्स अपने बच्चों से सेक्स के बारे में खुलकर बात नहीं करते हैं। जिसके चलते बच्चे इंटरनेट की दुनिया की ओर की भागते हैं और अपनी जिज्ञासाएं शांत करते हैं। ऐसे में बच्चों को सेक्स की सही जानकारी नहीं मिल पाती है और वह अपने दिमाग में सेक्स की अलग इमेज बना देते हैं। इसलिए जरूरी है कि बच्चों को सही समय पर सही तरीके से सेक्स एजुकेशन (sex education) देनी चाहिए।

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नियति शाह सेक्सुअलिटी एजुकेटर हैं जिन्होंने हमें बताया कि कैसे हम अपनी बेटियों को सेक्स एजुकेशन (sex education) देनी चाहिए

जानिए किस तरह अपने बच्चों को सेक्स एजुकेशन (sex education) दें

1. सेक्‍स जैसे सेंसिटिव टॉपिक पर बच्‍चों से बात करते समय उनकी उम्र और समझ को जरूर ध्‍यान रखें। जरूरी नहीं कि आप अपने बच्‍चे को सेक्‍स के बारे में सारी जानकारी दें, लेकिन फिर भी उसे जागरुक करने लायक बातें तो बतानी जरूरी होती हैं।

2. सेक्स से रिलेटेड बच्चों के सवालों को टालने की कोशिश न करें। बच्चे हर चीज जानना चाहते हैं और इसलिए उनमें curiosity बनी रहती हैं।

3. बच्चों  के साथ फ्रेंडली रिलेशन रखें। बच्चों को होमोसेक्शुएलिटी, masturbation , पीरियड्स आदि के बारे में जानकारी देनी चाहिए। उन्हें सेफ‌ सेक्स और एड्स जैसी बीमारियों के बारे में भी बताना न भूलें।

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4. न्यूज़पेपर की स्टोरीज एक बहुत अच्छा तरीका हो सकती हैं अपनी बात को शुरू करने के लिए। आप उस टॉपिक पर emphasize कर सकती नहीं है।

5.आजकल के समय में बच्चों को सेक्स को लेकर जागरूक करना बेहद जरूरी है, नहीं तो वे गलत दिशा में भटक सकते हैं। इसलिए बिना किसी हिचकिचाहट के बच्चों से खुलकर बात करें।

6. मूवीज भी एक बहाना होती है प्यार,रिलेशनशिप्स और सेक्स रिलेटेड कन्वर्सेशन को शुरू करने के लिए। मूवी देखते समय या मूवी देखने के बाद आप मूवी सीन को अपनी बेटी के साथ डिस्कस कर सकती हैं।

सेक्स एजुकेशन (sex education) के लिए कौन सी उम्र सही है?

इसकी शुरुआत 4 साल की उम्र के बाद करनी चाहिए। इस उम्र में बच्चों को खेल-खेल में प्राइवेट पार्ट्स के बारे में बताएं।
10-12 साल की उम्र  में इस‌ बारे में खुलकर बात करें क्योंकि इसके तुरन्त बाद प्यूबर्टी आएगी।

याद रखिये सेक्स एक टैबू नहीं है। एक माँ होने के नाते सबसे पहले आपको इस बात से कन्विंस्ड होना चाहिए।एक हेल्थी कन्वर्सेशन होनी चाहिए सिर्फ सेक्सुअल एक्ट के बारे में ही नहीं बल्कि उसके outcomes के बारे में भी। एक प्रोग्रेसिव एप्रोच आपकी बेटी को ज़्यादा अच्छे से एजुकेट होने में मदद करेगी।

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