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Photograph: (freepik)
मकर संक्रांति उन इंडियन फेस्टिवल्स में से एक है जो सिर्फ़ सीजन के चेंज होने का संकेत नहीं देता, बल्कि लाइफ में पॉज़िटिविटी और बैलेंस लाने का आइडिया भी देता है। इस दिन, सूरज मकर राशि में आता है, जो उत्तरायण की शुरुआत का संकेत है, जिसे एक शुभ समय माना जाता है। मकर संक्रांति पर दान को खास तौर पर ज़रूरी माना जाता है, लेकिन इस दिन यह इतना खास क्यों है? इसके पीछे धार्मिक ही नहीं, बल्कि सोशियोलॉजिकल और प्रैक्टिकल वजहें हैं।
जानिए मकर संक्रांति पर दान क्यों माना जाता है सबसे खास?
सूर्य का उत्तरायण
मकर संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण होता है, यह समय ज़िंदगी में प्रकाश और न्यू बेगिन्निन्ग्स का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान किए गए दान से कई बेनिफिट्स मिलते हैं, क्योंकि सूरज की किरणें धरती पर पॉज़िटिव एनर्जी भेजती हैं। इस दिन तिल, गुड़, अनाज और कपड़े दान करना शुभ माना जाता है। यह दान सिर्फ़ एक धार्मिक काम नहीं है, बल्कि यह लाइफ में अच्छे कामों की शुरुआत का भी प्रतीक है।
सर्दियों में ज़रूरतमंदों की हेल्प
मकर संक्रांति सर्दियों के मौसम में आती है, जब गरीबों और ज़रूरतमंदों को सबसे ज़्यादा खाने, कपड़ों और गर्मी की ज़रूरत होती है। इस दिन दान देने का ट्रेडिशन सोसाइटी को याद दिलाता है कि दूसरों की हेल्प करना ही सबसे बड़ी खुशी है। दान से सोसाइटी में दया और इंसानियत का नज़रिया बढ़ता है।
तिल और गुड़
मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का दान करना और खाना बहुत अच्छा माना जाता है। तिल बॉडी में गर्मी देते हैं, और गुड़ एनर्जी का सोर्स है। ये लाइफ में मिठास और गर्मी बनाए रखने की ज़रूरत को दिखाता है। इन्हें दान में देना यह दिखाता है कि हम अपने रिसोर्स दूसरों के साथ शेयर करने के लिए तैयार हैं।
ईगो छोड़ने और बैलेंस सीखने
दान का असली मतलब सिर्फ़ देना नहीं है, बल्कि अपना ईगो छोड़ना भी है। मकर संक्रांति पर दान देने का रिवाज़ हमें ज़िंदगी में बैलेंस की ज़रूरत सिखाता है। हमारे पास जो है, वह केवल हमारे लिए नहीं, बल्कि सोसाइटी के लिए भी है।
न्यू बिगनिंग
मकर संक्रांति को नई बेगिन्निन्ग्स का फेस्टिवल माना जाता है। इस दिन दान करना ये दिखता है कि हम आने वाले टाइम में अच्छे कर्मों को प्राथमिकता देना चाहते हैं। यह फेस्टिवल हमें याद दिलाता है कि किंडनेस से करे छोटे काम भी बड़ा इम्पैक्ट डाल सकते हैं। मकर संक्रांति पर दान करना सिर्फ़ एक रिचुअल से कहीं ज़्यादा है, यह एक ऐसी सोच है जो सोसाइटी, सेंसिटिविटी और होप को बढ़ावा देती है।
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