सेक्सिज्म और बॉलीवुड फिल्मों के बीच का संबंध बहुत रियल और पुराना है। Problematic dialogues, महिलाओं की stereotyping, टॉक्सिक मस्क्युलिनिटी – बॉलीवुड की ज़्यादातर फिल्मों में यह सब होता है। इनमें ऐसी फ़िल्में भी शामिल हैं जिन्हें सुपरहिट ब्लॉकबस्टर और यहां तक ​​कि क्लासिक्स के रूप में घोषित किया गया है, लेकिन अगर आप एक फेमिनिस्ट की तरह इन्हे देखे, संभावना है कि यह सब आपको बहुत चुभेंगी। आज मैं आपको बताउंगी कुछ कुछ होता है फिल्म एक फेमिनिस्ट होने के नाते मुझे पसंद क्यों नहीं है

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1 सबसे पहले, कुछ कुछ होता है वही पुराने सेक्सिस्ट धारणा को फिर से सबके सामने लाता है कि एक महिला सिर्फ एक पुरुष के लिए ही तैयार होती है, मेक अप करती है और पता नहीं क्या क्या । सच तो यह है कि हम सिर्फ अपने लिए तैयार होते हैं, मेक अप करते हैं, हेयरस्टाइल चेंज करते हैं और जो मन में आए वो करते है । लेकिन ये सब कुछ हम सिर्फ खुद के लिए करते हैं और लोगों को ये स्वीकार करना स्टार्ट करना पड़ेगा ।

2. यह कैट कालिंग को नॉर्मलाइज़ करता है. याद कीजिए कि राहुल ने सुश्री ब्रिगेंज़ा पर पे किस तरह सीटी मारी थी और “प्यार दोस्ती है” के दृश्य से ठीक पहले उनके सामने कैसे बर्ताव किया था? ये सब हरकतें कैट कालिंग के अंडर आती हैं जो आज के टाइम पे सबसे बड़ी प्रॉब्लम है । लड़कियों को सड़क पे चलते हुए सीटी मारना, उनको अजीब अजीब नामों से पुकारना, उनके सामने अजीब तरह से बर्ताव करना और ये मानना कि हर लड़की तुम में इंटरेस्टेड है – यह सब बहुत ही पुराना हो चुका है और आज के टाइम की सबसे बड़ी प्रॉब्लम भी।

3. तीसरा, यह एक तरह की महिला को दूसरी के खिलाफ खड़ा करता है: टीना (रानी मुखर्जी) सेक्सीनेस और संस्कार का प्रतीक है, क्योंकि वह छोटी स्कर्ट पहनती है और फिर भी ‘ओम जय जगदीश’ गा सकती है, जबकि अंजलि (काजोल), एक महिला जो ढीले-ढाले कपड़े पहनना पसंद करती है और मेकअप करना बिलकुल पसंद नहीं पसंद करती है, वह केवल एक झल्ली है जिसे कभी भी एक पार्टनर नहीं मिलेगा।

डियर गर्ल्स, याद रखिये अगर एक इंसान सिर्फ आपके ड्रेसिंग की वजह से आपसे दूर जाता है और बाद में आपके ‘stereotypical लड़की ‘ बनने के बाद आपके पास वापिस आता है तो उससे दूर रहना।

4 संस्कारी लड़की की परिभाषा: इस मूवी ने ऑडियंस को ये बताया है कि क्यूंकि आपने देखने में टॉम बॉय लगती हैं इसलिए कोई भी आपके प्यार में नहीं पड़ सकता। लेकिन फिर आप किसी संस्कारी महिला में चेंज हो जाते हैं और अचानक राहुल आपको प्यारा लगता है। अंजलि ने कभी मेकअप नहीं किया, कभी लड़कियों से एक्सपेक्ट किये जाने वाली ड्रेस नहीं पहनी, इसलिए उसे ब्रो-ज़ोन किया गया। सिर्फ एक नार्मल कॉलेज गर्ल होने में क्या गलत है? समाज किसी महिला को उसके खुद के रूप में क्यों नहीं स्वीकार कर सकता है? क्या उसे वास्तव में पुरुष का ध्यान आकर्षित करने के लिए ‘ठीक’ से कपड़े पहनने ’की आवश्यकता है?

फिल्म कुछ कुछ होता है असल में लड़कियों को अधिक लेडी – लाइक होने के लिए प्रेरित करती है। कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं है और खुद को बदलना कभी भी आपकी समस्याओं का जवाब नहीं होता है। किसी ऐसे व्यक्ति की तरह बनने की कोशिश न करें जो आप नहीं हैं। इसलिए अंजलि की तरह मत बन ना और कभी भी समाज के अप्रूवल या आप जिसे प्यार करते हैं, उसके लिए अपना अस्तित्व मत छोड़ना ।

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