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Photograph: (freepik)
आज की तेज़ रफ्तार लाइफ में एंग्जायटी एक कॉमन लेकिन सीरियस प्रॉब्लम बनती जा रही है। काम का प्रेशर, रिश्तों में कम्प्लीकेशन, सोशल मीडिया का ओवरलोड और अनसर्टेन फ्यूचर—ये सब मिलकर मंद को लगातार एक्टिव रखते हैं। ऐसे में जब मन बेचैन हो, और हार्टबीट तेज़ हो जाए, तो बॉक्स ब्रीदिंग टेक्नीक एक आसान लेकिन असरदार टूल बनकर सामने आती है।
एंग्जायटी में राहत का न्यू टूल—जानिए बॉक्स ब्रीदिंग टेक्नीक कैसे करती है मदद
क्या है बॉक्स ब्रीदिंगटेक्नीक टेक्नीक?
बॉक्स ब्रीदिंग एक सिंपल ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ है, जिसमें सांस लेने और छोड़ने के प्रोसेस को चार इक्वल पार्ट्स में बाटा होता है—ठीक एक बॉक्स की तरह। यही वजह है कि इसे बॉक्स ब्रीदिंग कहा जाता है। यह तकनीक मंद और बॉडी दोनों को शांत करने में मदद करती है और एस्पेशल्ली एंग्जायटी के टाइम इमीडियेट रिलीफ देने के लिए जानी जाती है।
बॉक्स ब्रीदिंग कैसे करती है मदद?
एंग्जायटी के दौरान हमारा नर्वस सिस्टम ‘फाइट या फ्लाइट’ मोड में चला जाता है। बॉक्स ब्रीदिंग इस सिचुएशन को कंट्रोल करने में मदद करती है। जब हम डीप और कंट्रोल्ड सांस लेते हैं, तो हार्टबीट धीरे-धीरे नॉर्मल होने लगती है और मंद को ये संकेत मिलता है कि खतरा टल चुका है। इससे स्ट्रेस हार्मोन कम होते हैं और मन को सुकून मिलता है। इसके अलावा, यह टेक्नीक फोकस बढ़ाने और नेगेटिव थॉट्स को ब्रेक देने में भी इम्प्रेससिवे मानी जाती है।
कैसे करें बॉक्स ब्रीदिंग टेक्नीक
बॉक्स ब्रीदिंग टेक्नीक को आप कहीं भी और कभी भी आसानी से कर सकते हैं—चाहे ऑफिस में हों, घर पर या सोने से पहले। इसके लिए सबसे पहले आराम से बैठ जाएँ या सीधे खड़े हो जाएँ और अपने बॉडी को रिलैक्स करें। अब धीरे-धीरे चार सेकंड तक गहरी सांस लें, फिर चार सेकंड तक उसी सांस को रोककर रखें।
इसके बाद चार सेकंड में आराम से सांस छोड़ें और फिर अगले चार सेकंड तक बिना सांस लिए रुकें। इस पुरे प्रोसेस को लगातार चार से पाँच बार रिपीट करे। कुछ ही मिनटों में आपको अपनी सांसें नॉर्मल होती फील होंगी, मन हल्का लगेगा और बॉडी में शांति का एहसास आने लगेगा।
क्यों बन रही है यह टेक्नीक इतनी पॉपुलर
आज के टाइम में लोग ऐसी टेक्नीक की तलाश में रहते हैं, जो मेडिकेशन पर निर्भर हुए बिना राहत दें। बॉक्स ब्रीदिंग इसी वजह से तेजी से पॉपुलर हो रही है। इसे न तो किसी स्पेशल इक्विपमेंट की ज़रूरत होती है और न ही लंबी ट्रेनिंग की। यह बच्चों से लेकर एडल्ट्स तक, सभी के लिए बेनेफिशियल है।
एंग्जायटी मैनेजमेंट में एक सिंपल स्टेप
बॉक्स ब्रीदिंग कोई मैजिक नहीं है, लेकिन यह एंग्जायटी को मैनेज करने का एक स्ट्रांग स्टेप ज़रूर है। अगर इसे डेली की हैबिट बना लिया जाए, तो यह न सिर्फ़ एंग्जायटी, बल्कि ओवरथिंकिंग और स्लीपिंग प्रॉब्लम में भी मदद कर सकती है।
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