जैसा की हम सब जानते हैं की नवरात्रि का शुभ नौ दिवसीय त्योहार चल रहा है और सोमवार यानी 19 अक्टूबर को नवरात्री का तीसरा दिन है। दुर्गा पूजा के तीन दिन, यानी तृतीया, माँ चंद्रघंटा को समर्पित है। इस दिन सभी भक्त माँ चंद्रघंटा की पूजा कर उन्हें खुश करने की कोशिश करते है।

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उसके सिर पर अर्धचंद्र चंद्रमा से सुशोभित, चंद्रघंटा वह है जो दुनिया में न्याय और धर्म की स्थापना के लिए जिम्मेदार है।

क्यों करते हैं माँ चंद्रघंटा की पूजा ?

दस-सशस्त्र देवी, माता चंद्रघंटा बुराई का नाश करने वाली और अच्छी भावना और नैतिकता की प्रतीक हैं। कुछ भक्तों के अनुसार, वह अपने हाथ में अर्धचंद्र की तरह घंटी के आकार का रखती है और इसलिए उनका नाम – चंद्रघंटा है। देवी दुर्गा का यह रूप दुनिया में न्याय (धर्म) की स्थापना के लिए जिम्मेदार है। एक बाघ पर बैठे, देवी चंद्रघंटा को दशभुजा या दस हाथों से दर्शाया गया है।

ऐसा माना जाता है कि मां चंद्रघंटा अपने भक्तों पर कृपा, बहादुरी और साहस का परिचय देती हैं। इसलिए, भक्तों के सभी पाप, शारीरिक कष्ट, मानसिक कष्ट और भूत बाधाएं मिट जाती हैं।

मां चंद्रघंटा की पूजा विधी

भगवान गणेश (विघ्नहर्ता) का नाम लेकर पूजा शुरू करें और उनका आशीर्वाद लें। मंत्रों का जाप करके मां चंद्रघंटा को प्रसन्न करें। गन्धम, पुष्पकम, दीपम, शक्करधाम और नैवेद्यम अर्पित कर पंचोपचार पूजा करें। देवी को शृंगार सामग्री (सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां) चढ़ाएं।

इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करें और प्रसाद के रूप में दूध, मखाना और शक्कर से तैयार की हुई उनकी खीर अर्पित करें।

कहा जाता है की ऐसी मान्यता है की जो कोई भी दिल से माँ चंद्रघंटा की पूजा और आरती करता है  माँ चंद्रघंटा उनसे प्रसन्न होकर उन्हें खूब सारा आशीर्वाद देती है और उनकी सारी मनोकामना पूरी करती हैं।

नवरात्र में तीसरे दिन की पूजा का खासा महत्‍व बताया गया है।  इस दिन खासतौर से माँ चंद्रघंटा की पूजा और आराधना की जाती है। शास्त्रों में कहा गया है की माँ चंद्रघंटा की पूजा से भक्तों में वीरता ,सौम्यता और  विनम्रता का विकास होता है।

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