Mokshada Ekadashi 2022: मोक्षदा एकादशी कब है? जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

हर एकादशी का अपना महत्व होता है। और सभी एकादशियों में से एक मोक्षदा एकादशी है। मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। आइए जानते पपूरी जानकारी इस ब्लॉग में -

Vaishali Garg
29 Nov 2022
Mokshada Ekadashi 2022: मोक्षदा एकादशी कब है? जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Mokshada Ekadashi

Mokshada Ekadashi 2022:  इस एकादशी को हिंदुओं के लिए सबसे खास माना जाता है। हर एकादशी का अपना महत्व होता है। और सभी एकादशियों में से एक मोक्षदा एकादशी है। मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

हिंदी धर्म ग्रंथों में इसे पितरों को मोक्ष दिलाने वाली एकादशी कहा जाता है। मान्यता के अनुसार, इस एकादशी के दिन व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। द्वापर युग में इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र में गीता का ज्ञान दिया था। इसलिए इस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। इस बार मोक्षदा एकादशी 03 दिसंबर 2022, शनिवार को मनाई जाएगी।

Mokshada Ekadashi 2022: मोक्षदा एकादशी शुभ मुहूर्त

हिन्दू पंचांग के अनुसार, यह एकादशी मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी में मनाई जाती है। इस एकादशी की शुरुआत 03 दिसंबर 2022, शनिवार को सुबह 05 बजकर 39 मिनट पर होगी और इसका समापन 04 दिसंबर को सुबह 05 बजकर 34 मिनट पर होगी। इस एकादशी का पारण 04 दिसंबर को अगले दिन सुबह होगा। उदयातिथि के अनुसार यह एकादशी 03 दिसंबर को मनाई जाएगी।

Mokshada Ekadashi 2022:  मोक्षदा एकादशी का महत्व

मोक्षदा एकादशी के दिन पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के लिए पूजा की जाती है। वहीं इस दिन व्रत रखने से मनुष्य के पापों का नाश होता है। मान्यता यह है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का संदेश दिया था, इसलिए, मोक्षदा एकादशी पर गीता जयंती भी मनाई जाती है। वहीं इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता, भगवान श्रीकृष्ण और महर्षि वेद व्यास का विधिपूर्वक पूजन किया जाता है।

Mokshada Ekadashi 2022:  मोक्षदा एकादशी पूजन विधि

मोक्षदा एकादशी व्रत से एक दिन पहले दशमी तिथि को दोपहर में सिर्फ एक बार ही खाना खाना चाहिए। इस एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर नहा लें और व्रत का संकल्प लें। व्रत का संकल्प लेने के बाद भगवान श्री कृष्ण की पूजा करें। उन्हें धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें, इसके बाद रात में पूजा और फिर जागरण करें, अगले दिन द्वादशी के दिन पूजा करें और उसके बाद जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाएं और फिर दान दक्षिणा दें या किसी ब्राह्मण को खाना खिलाएं और उसके बाद ही आप कुछ खाएं।

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