Pitru Paksha 2022: पितृपक्ष में जरूर करें यह 3 उपाय

Pitru Paksha 2022: पितृपक्ष में जरूर करें यह 3 उपाय Pitru Paksha 2022: पितृपक्ष में जरूर करें यह 3 उपाय

Vaishali Garg

16 Sep 2022

Pitru Paksha 2022: पितृपक्ष या श्राद्ध एक 15 दिन की अवधि है जो हिंदू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद के महीने में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दौरान शुरू होती है। यह कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को समाप्त होता है। इस अवधि के दौरान, हिंदू अपने पूर्वजों की दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। 

पितृ पक्ष को श्राद्ध के अनुष्ठान और एक प्रतिबंधित जीवन शैली द्वारा चिह्नित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस अवधि के दौरान श्राद्ध के अनुष्ठान से पूर्वजों को मोक्ष या मोक्ष प्राप्त करने में मदद मिलती है। इस साल पितृपक्ष 10 सितंबर से शुरू होकर 25 सितंबर तक है। आज के इस ब्लॉग में हम आपको तीन ऐसी बातें बताएंगे जो आपको पितृपक्ष करनी ही चाहिए, साथ ही साथ कुछ ऐसी भी बातें बताएंगे जो कि पितृपक्ष में बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

Pitru Paksha 2022: पितृपक्ष में जरूर करें यह 3 उपाय

1. पीपल और बरगद के पेड़ की हर रोज पूजा करें। दोपहर के समय लाल फूल, अक्षत और काले तिल मिलाकर जल चढ़ाएं।

2. पितृपक्ष में हर रोज कौए के लिए एक हिस्सा भोजन छत पर रख दें। श्राद्ध पक्ष में कौए के द्वारा ही पितर अन्न ग्रहण करते हैं।

3. परिवार के हर सदस्य से 1 रुपए के 3। सिक्के लें और मंदिर में गुरुवार के दिन यह दान करें।

Pitru Paksha 2022: पितृपक्ष श्राद्ध में क्या नहीं करना चाहिए

1. पितृपक्ष में कोई भी शुभ कार्य करने से बचना चाहिए और नई वस्तु की खरीदारी भी नहीं करनी चाहिए।

2. पितृपक्ष में अगर पूर्वजों का श्राद्ध कर रहे हैं तो शरीर पर तेल का प्रयोग करने से बचना चाहिए  साथ ही अगर संभव हो सके तो दाढ़ी और बाल भी नहीं कटवाने चाहिए।

3. पितृपक्ष के समय हमेशा सात्विक भोजन करना उत्तम माना गया है। भूलकर भी प्याज व लहसुन से बने भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।

4. भूलकर भी पितृपक्ष में लोहे के बर्तनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

5. दूसरे की भूमि पर श्राद्ध नहीं करना चाहिए। वन, पर्वत , पुण्यतीर्थ एवं मंदिर दूसरे की भूमि नहीं माने जाते, क्योंकि इन पर किसी का स्वामित्व नहीं माना गया है। अत : इन स्थानों पर श्राद्ध किया जा सकता है।

6. केले के पत्ते पर श्राद्ध भोजन निषेध है। सोने, चांदी, कांसे, तांबे के पात्र उत्तम हैं। इनके अभाव में पत्तल उपयोग की जा सकती है। 

7. शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है की जो व्यक्ति पितृपक्ष के समय अपने पितरों को पानी देते हैं वह दूसरे के घर का खाना नहीं खाते हैं।

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