Shardiya Navratri 2022: जानिए किस दिन कौन सी देवी की पूजा की जाती है

Shardiya Navratri 2022: जानिए किस दिन कौन सी देवी की पूजा की जाती है Shardiya Navratri 2022: जानिए किस दिन कौन सी देवी की पूजा की जाती है

Vaishali Garg

16 Sep 2022

Shardiya Navratri 2022: हिंदुओं के शुभ त्योहारों में से एक के रूप में, नवरात्रि को अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है और यह प्राचीन काल के सबसे पुराने त्योहारों में से एक है। यह भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में लगातार नौ दिनों और रातों में व्यापक रूप से मनाया जाता है। हालाँकि, नवरात्रि पूरे भारत में अलग-अलग महत्व रखती है और चंद्र कैलेंडर का अनुसरण करती है, यही वजह है कि इसे मार्च - अप्रैल में चैत्र नवरात्रि और सितंबर - अक्टूबर में शरद नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। आइए आज के इस ब्लॉग में जानते हैं कि नवरात्रि के 9 दिन में किस दिन किस देवी की पूजा की जाती है।

Shardiya Navratri 2022: शरद नवरात्रि की शुरू हो रही है और शुभ मुहूर्त

इस साल, शरद नवरात्रि 26 सितंबर 2022 से शुरू हो रही है और विजयादशमी 5 अक्टूबर 2022 को पड़ रही है। शारदीय नवरात्रि 2022 कलश शुभ मुहूर्त 26 सितम्बर 2022 को सुबह 06 बजकर 11 मिनट से 07 बजकर 51 मिनट तक 1 घंटे 40 मिनट।

Shardiya Navratri 2022: दिनांक और मां दुर्गा के नौ रुप

26 सितंबर 2022        

मां शैलपुत्री ( पहला दिन ) प्रतिपदा तिथि

27 सितंबर 2022

मां ब्रह्मचारिणी ( दूसरा दिन ) द्वितीय तिथि 

28 सितंबर 2022

मां चंद्रघंटा ( तीसरा दिन ) तृतीया तिथि 

29 सितंबर 2022

मां कुष्मांडा ( चौथा दिन ) चतुर्थी तिथि 

30 सितंबर 2022

मां स्कंदमाता ( पांचवा दिन ) पंचमी तिथि 

1 अक्टूबर 2022

मां कात्यायनी ( छठा दिन ) षष्ठी तिथि 

2 अक्टूबर 2022

मां कालरात्रि ( सातवां दिन ) सप्तमी तिथि 

3 अक्टूबर 2022

मां महागौरी ( आठवां दिन ) दुर्गा अष्टमी 

4 अक्टूबर 2022 
पारण

महानवमी ( नौवां दिन ) शरद नवरात्र व्रत परण

5 अक्टूबर 2022

मां दुर्गा विसर्जन , दशमी तिथि ( दशहरा ) 

Shardiya Navratri 2022: जानिए जौ क्यों बोई जाती है नवरात्र में

नवरात्रि में जौ बोने की परंपरा सनातन धर्म में सदियों से चली आ रही है। नवरात्रि के प्रथम दिन मिट्टी के बर्तन में जौ बोई जाती हैं। धर्मग्रन्थों के अनुसार सृष्टि की रचना के बाद जौ ही सबसे पहली फसल थी इसलिए देवी - देवताओं की पूजा व हवन में जौ चढ़ाई जाती है। वसंत ऋतु की पहली फसल जौ ही होती है, जिसे हम देवी को अर्पित करते हैं। नवरात्रि में जो जौ उगाई जाती है, वह भविष्य में आने वाले संकेतों को दर्शाती है। कहते हैं कि नवरात्र में बोई गई जौ यदि 2 से 3 दिन में ही अंकुरित हो जाए तो यह शुभ संकेत होता है। जौ जितनी हरी - भरी होगी। दुर्गा मां की कृपा से घर में उतनी ही सुख - समृद्धि आती है।


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