Som Pradosh Vrat 2022: जानिए सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि और मुहूर्त

5 दिसंबर को सोमवार है, ऐसे में इस दिन सोम प्रदोष व्रत का खास संयोग बन रहा है। शिव जी को खुश करने और उनकी कृपा पाने के लिए प्रदोष व्रत रखना चहिए। आइए जानते हैं इसके बारे में पूजा विधि इस ब्लॉग में -

Vaishali Garg
03 Dec 2022
Som Pradosh Vrat 2022: जानिए सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि और मुहूर्त

Som Pradosh Vrat 2022

Som Pradosh Vrat 2022: क्या आपको पता है हर महीने की त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को पूरी तरह से समर्पित है। ऐसा माना जाता है की इस दिन भगवान शिवजी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मार्गशीर्ष महिने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 5 दिसंबर को पड़ रही है। 5 दिसंबर को सोमवार है, ऐसे में इस दिन सोम प्रदोष व्रत का खास संयोग बन रहा है। शिव जी को खुश करने और उनकी कृपा पाने के लिए प्रदोष व्रत रखना चहिए। इसी माना गया है कि प्रदोष व्रत भगवान शिव को बेहद प्रिय है।

Som Pradosh Vrat 2022: प्रदोष पूजा शुभ मुहूर्त

06:00 pm से 08:36 pm तक अवधि - 02 घण्टे 36 मिनट्स दिन का प्रदोष समय - 06:00 पीेएम त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ - दिसम्बर 05.2022 को 05:57 am तक त्रयोदशी तिथि समाप्त - दिसम्बर 06,2022 को 06:47 am तक

Som Pradosh Vrat 2022: जानिए सोम प्रदोष की पूजा विधि

शास्त्रों के अनुसार जिन लड़के या लड़कियों की शादी में देरी हो रही है उन लोगों को प्रदोष व्रत के दिन महादेव का रुद्राभिषेक करना चाहिए। संतान की इच्छा रखने वाले लोगों को इस दिन पंचगव्य से महादेव का अभिषेक करना चाहिए। ऐसा करने से शिव-पार्वती अति प्रसन्न होते हैं और जल्द महिलाओं की सूनी गोद भर जाती है।

प्रदोष व्रत में शिवलिंग का बेलपत्र से श्रृंगार करने पर वैवाहिक जीवन में सुख की प्राप्ति होती है। जाने-अनजाने हुए पाप से मुक्ति पाने के लिए प्रदोष व्रत के दिन शाम के समय आटे का पांच मुखी घी का दीपक जलाएं और इस मंत्र का जाप करें  करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसंवापराधं। विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो।। इससे समस्त पाप का नास होता है.

Som Pradosh Vrat 2022: प्रदोष व्रत की विधि

व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले उठें। नित्यकर्म से निपटने के बाद सफेद रंग के कपडे पहने। पूजाघर को साफ और शुद्ध करें। गाय के गोबर से लीप कर मंडप तैयार करें। इस मंडप के नीचे 5 अलग अलग रंगों का प्रयोग कर के रंगोली बनाएं। फिर उतर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे और शिव जी की पूरे दिन किसी भी प्रकार का अन्य ग्रहण ना करें।

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