98.5 घंटे में मनाली-लेह दूरी तय करके, सूफिया सूफी ने रचा गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड

98.5 घंटे में मनाली–लेह डिस्टेंस तय कर गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना न सिर्फ़ सूफिया की पर्सनल विक्ट्री है, बल्कि यह कंट्री के लिए भी प्राउड का मोमेंट है।

author-image
Dimpy Bhatt
New Update
Sufia Sufi created a Guinness World Record by covering the distance from Manali to Leh

Photograph: (Instagram / Sufiya Sufi Runner)

हौसले, जुनून और जज़्बे की जब बात होती है, तो सूफिया सूफी का नाम अपने आप सामने आ जाता है। अजमेर की रहने वाली सूफिया सूफी ने 98.5 घंटे में मनाली से लेह का चल्लेंजिंग डिस्टेंस तय कर गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रच दिया है। ये जर्नी सिर्फ़ किलोमीटर नापने की नहीं थी, बल्कि यह सेल्फ कॉन्फिडेंस, मेन्टल स्ट्रेंथ और महिलाओं की लिमितलेस कैपेसिटी का सिंबल बन गया है।

Advertisment

98.5 घंटे में मनाली-लेह दूरी तय करके, सूफिया सूफी ने रचा गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड

डिफिकल्ट जर्नी, लेकिन अटूट हौसला

मनाली–लेह हाईवे को वर्ल्ड के सबसे चल्लेंजिंग रुट्स में गिना जाता है। ऊँचाई, कम ऑक्सीजन, बदलता मौसम और डिफिकल्ट ज्योग्राफिकल कंडीशंस इस रास्ते को बहुत मुश्किल बना देती हैं। ऐसे में 98.5 घंटे में इस दूरी को पूरा करना किसी एक्स्ट्राऑर्डिनरी अचीवमेंट से कम नहीं है। सूफिया ने यह साबित कर दिया कि अगर डेडिकेशन स्ट्रांग हों, तो हर डिफिकल्ट रास्ता भी आसान हो सकता है।

एविएशन से एंड्योरेंस तक

सूफिया सूफी का सफर उनके रिकॉर्ड्स की तरह ही इम्प्रेससिवे है। सूफिया ने 1987 में राजस्थान के अजमेर में जन्म लिया था, उन्होंने अपनी फिटनेस को इम्प्रूव करने और रूटीन को बेहतर करने के लिए लॉन्ग डिस्टेंस रेस शुरू करने से पहले एविएशन इंडस्ट्री में लगभग एक डिकेड बिताया। जो एक पर्सनल काम के तौर पर शुरू हुआ, उसने जल्द ही उनकी लाइफ और आइडेंटिटी को बदल दिया।

Advertisment

अल्ट्रा-रनिंग में उनकी एडवांसमेंट में कई गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स शामिल हैं। 2018 में, उन्होंने एक साल में किसी महिला द्वारा सबसे ज़्यादा मैराथन दौड़ने का रिकॉर्ड बनाया, इसके बाद कश्मीर से कन्याकुमारी तक 87 दिनों में लगभग 4,000 km की दौड़ और 110 दिनों में 6,002 km की गोल्डन क्वाड्रिलेटरल दौड़ लगाई। इन कामयाबियों के लिए ज़बरदस्त फिजिकल एंड्योरेंस, मेंटल स्ट्रेंथ और डिटेल्ड प्लानिंग की ज़रूरत थी, जिसमें उनके फॅमिली, स्पॉन्सर्स और एक डेडिकेटेड सपोर्ट क्रू का सपोर्ट था।

महिलाओं के लिए एक नई मिसाल

सूफिया सूफी की यह अचीवमेंट खास इसलिए भी है क्योंकि यह महिलाओं को अपनी लिमिट्स से आगे बढ़ने का संदेश देती है। उन्होंने यह दिखाया कि महिलाएँ सिर्फ़ ड्रीम्स देखने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें पूरा करने की पावर भी रखती हैं। उनका यह रिकॉर्ड उन सभी लड़कियों और महिलाओं के लिए उम्मीद बन गया है, जो सोसाइटी की तय की गई लिमिट्स के कारण अपने सपनों को पीछे छोड़ देती हैं।

सूफिया का मानना है कि इस सफ़र का असली मकसद सिर्फ़ रिकॉर्ड बनाना नहीं था, बल्कि यह बताना था कि महिलाएँ हर फील्ड में बराबरी से आगे बढ़ सकती हैं—चाहे वह गेम्स हो, एडवेंचर हो या कोई और चल्लेंजिंग फील्ड।

Advertisment

गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड और नेशनल प्राइड 

98.5 घंटे में मनाली–लेह डिस्टेंस तय कर गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना न सिर्फ़ सूफिया की पर्सनल विक्ट्री है, बल्कि यह कंट्री के लिए भी प्राउड का मोमेंट है। इस अचीवमेंट ने इंडिया का नाम इंटरनेशनल स्टेज पर रोशन किया हैं।

सूफिया सूफी की यह स्टोरी हमें ये सिखाती है कि असली जीत रास्ते की मुश्किलों में नहीं, बल्कि उन्हें पार करने के जज़्बे में होती है। उनका यह रिकॉर्ड आने वाली जनरेशन के लिए इंस्पिरेशन बनेगा और ये याद दिलाएगा कि अगर सपनों के साथ मेहनत और हिम्मत जुड़ जाए, तो इतिहास रचना तय है।

इंस्पिरेशन मनाली