Films Breaking Motherhood Stereotypes : मां बनने के और भी हैं तरीके

Sanjana
09 Jun 2022
Films Breaking Motherhood Stereotypes : मां बनने के और भी हैं तरीके

पेरेंटिंग हमेशा से ही चर्चा का एक महत्वपूर्ण विषय रहा है। शादी से जुड़ा हुआ यह विषय बहुत पेचीदा भी है। शादी करने के बाद लोग कपल पर बच्चा करने के लिए दबाव बनाने लगते हैं। लेकिन कुछ लोग मदरहुड के सीमित तरीकों से सहमत नहीं होते हैं। वे अपने शरीर में एक बच्चे को जगह नहीं दे पाने के कारण दूसरे तरीकों को आजमाना चाहते हैं।

कुछ बॉलीवुड फिल्मों ने सेरोगेसी और एडॉप्शन जैसे पेरेंटिंग के मुद्दों को जनता के सामने दिखाया है। लेकिन वे इन मुद्दों का सही तरीके से खुलकर प्रदर्शन नहीं कर सकीं। यह फिल्में इन मुद्दों पर समाज की नजरों में सकारात्मक प्रकाश नहीं डाल पाईं। लेकिन हमें यह समझना चाहिए पेरेंट्स बनने के लिए अनेक रास्ते खुले हुए हैं। लेकिन इन पर खुलकर चर्चा नहीं की जाती। फिर भी कुछ नई फिल्मों ने इन मुद्दों की गहनता समझाने का प्रयास किया है।

मदरहुड के बारे में इन फिल्मों में खुलकर बात की गई है -

1. मिमी

2021 में रिलीज हुई फिल्म मिमी ने एडॉप्शन और सरोगेसी जैसे मुद्दों को खुल कर दिखाया है। इस फिल्म में कृति सेनन ने लीड रोल निभाया है। यह एक कॉमेडी ड्रामा फिल्म है जिसने बहुत ही संवेदनात्मक रूप से इस मुद्दे को उठाया है। इसमें कुछ इमोशनल सीन भी थे जिनमें अबॉर्शन की बात की गई। लेकिन यह चॉइस के ऊपर निर्भर करता है।

2. व्हाट द फॉक्स (what the folks)

यह डाइस मीडिया की एक मिनी वेब सीरीज है जिसमें मॉडर्न फैमिलीज की नॉर्मल लाइफ का जिक्र किया गया है। निखिल और अनीता पेरेंट्स बनने के लिए एडॉप्शन का तरीका चुनते हैं। इस सीरीज में एडॉप्शन से जुड़ी सभी परेशानियों और शकों (doubts) के बारे में पूरी पारदर्शिता के साथ बात की गई है।

3. माई

साक्षी तंवर की इस फिल्म में उन्होंने शीला का रोल निभाया है। यह फिल्म मदरहुड से जुड़े इमोशंस को गहराई से दिखाती है। इसमें शीला के बेटे अर्चित को उसकी बहन गोद ले लेती है। अर्चित का उसकी दोनों मांओं से अलग-अलग रिश्ता है। यह फिल्म दिखाती है कि किस तरह मदरहुड का मतलब दो औरतों के लिए अलग-अलग हो सकता है।

4. गुड न्यूज़

यह एक कॉमेडी ड्रामा फिल्म है जिसमें एडॉप्शन या सरोगेसी जैसे मुद्दे पर बात नहीं की गई। इसमें प्रेगनेंसी के अपरंपरागत तरीके IVF के बारे में बात की गई है। इंडियन रूढ़िवादी समाज में खुद का बच्चा होना यानि अपने खून को पालना ही आदर्श माना जाता है। ऐसे में हर लोगों पर प्रेशर बना देता है। इससे डील करने के लिए IVF एक अच्छा नया रास्ता है।

5. बधाई हो

फिल्म बधाई हो ने प्रेगनेंसी के किसी अपरंपरागत तरीके के बारे में तो बात नहीं की है। लेकिन इसमें ओल्ड एज में प्रेगनेंसी से जुड़ी परेशानियों की बात की गई है। इसमें दिखाया गया है कि किस तरह से ओल्ड एज में सेक्सुअलिटी का अनुभव किया जाता है।

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