ऐसे ना जाने कितने ही कंटेंट क्रिएटर्स होंगे जिनको टिकटोक के थ्रू ब्रांड हायर करते होंगे लेकिन अब क्यूंकि टिकटोक इंडिया में बैन हो गया है , तो उन क्रिएटर्स का क्या? उनका revenue फिरसे जीरो पे आ जायेगा। भारत में में एम्प्लॉयमेंट वैसे भी लॉकडाउन के चलते कम होती जा रही थी, अब टिकटोक समेत 58 और चाइनीज़ एप को बैन करने से अनएम्प्लॉयमेंट रेट भी बढ़ जायेगा। ऐप  जैसे शीन की वजह से इंडिया में कई लोगों को डिलीवरी , पैकेजिंग वगरह से इम्प्लीमेंट मिला, उनका क्या ?

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टिकटोक ने भारत में कंटेंट क्रिएटर्स का एक नया सेट बना दिया था, जो 15 सेकंड में दर्शकों का मनोरंजन करते थे, और खुद से मेहनत करके स्टार, उर्फ ​​इन्फ्लुएंसर्स बन जाते थे।

मनी कंट्रोल के अनुसार एक टिकटोक यूजर बरखा व्यास,जो मेकअप, लुक, ग्रूमिंग और बहुत कुछ के आसपास कंटेंट बना रही थी। ने कहा “मैंने 40,000 फॉलोवर्स पाने के लिए बहुत मेहनत की थी। टिकटोक सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा ट्रेंड करने वाला प्लेटफॉर्म था और ज्यादातर कैंपेन मुझे टिकटोक से लिए मिल रहे थे, ”

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एंटरटेनमेंट में गिरावट 

टिकटोक का यूज़ लोग सिर्फ कंटेंट क्रिएट करने के लिए ही नहीं , कंटेंट देखने मतलब एंटरटेनमेंट के लिए भी करते थे। हालाँकि, इंडिया की भी ऐसी ही कुछ एप्स हैं जो बिलकुल टिकटोक जैसा ही एंटरटेनमेंट देंगी , लेकिन अब वो एंटरटेनमेंट कई एप्स में बँट जायेगा। कोई रोपोसो इस्तेमत करेगा तो कोई, कोई और एप। टिक टोक इकलौता ऐसा एप था जिसपे हर कोई था ।

रेवेन्यू 

एक इन्फ्लुएन्सिएल मार्केटिंग प्लेटफार्म , बज़ोका के सीईओ और सीओ – फाउंडर, आशुतोष हरबोला ने कहा कि लॉकडाउन के कारण, इन्फ्लुएंटीएल लोग कम चार्ज कर रहे थे क्योंकि ब्रांड विज्ञापन से दूर भाग रहे थे।

“उदाहरण के लिए, अगर टिक्टोक के टॉप इन्फ्लुएंसर ने एक वीडियो से 5 लाख रुपये कमाए, तो उसे अब इंस्टाग्राम पर कंटेंट के लिए एक लाख मिलेंगे। कीमत में गिरावट ज्यादातर इंगेजमेंट में कमी के कारण होगी। अन्य प्लेटफार्मों पर इंगेजमेंट में 90 प्रतिशत की कमी आने की संभावना है।” उन्होंने बोला.

“ये निराशाजनक बात है कि आम आदमी ने पान्डेमिक के दौरान एक और प्लेटफार्म खो दिया जब नेपोटिस्म और बाहरवालों के साथ सौतेले व्यवहार जैसे रेजिंग टॉपिक पर डिबेट चल रही है।” – 25 साल की एक्ट्रेस निकिता कुमार

टिकटोक यूज़र्स

25 साल की एक्ट्रेस निकिता कुमार कहती हैं कि टिकटोक पर बैन कंटेंट क्रिएटर्स, एक्टर्स और डांसर्स के लिए एक बड़ा लॉस है। टिकटोक एक ऐसा प्लेटफार्म था जहां लोग कास्ट और क्लास के भेदभाव के बिना अपना टैलेंट शोकेस कर सकते थे।

“ये निराशाजनक बात है कि आम आदमी ने पान्डेमिक के दौरान एक और प्लेटफार्म खो दिया जब नेपोटिस्म और बाहरवालों के साथ सौतेले व्यवहार जैसे रेजिंग टॉपिक पर डिबेट चल रही है।”

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