Importance of consent- शुरुवाती दौर में ही बच्चो को सिखा देना चाहिए की किसी की निजी सीमाओं का आदर कैसे करते हैं। इनको नॉन-सेक्सुअल उदाहरण के साथ सिखाना चाहिए जैसे की अपने खिलोने आपस मे बाटना या किसी से गले लगना। साथ ही साथ बच्चों को उनके प्राइवेट शरीर के पार्ट्स के बारें में भी बताएं की उनकी क्या ज़रूरत है और उनके प्रॉपर क्या नाम हैं।

कंसेंट होता क्या है ?

सहमति/कंसेंट की सबसे जरुरी बात ये होती है कि हर कोई इंसान जो भी कर रहा हो उसमें आरामदायक हो। अगर कोई भी किसी भी समय अनकम्फर्टेबल होता है तो उसको अधिकार है कि वो वहीं रोके। वहीं दूसरी ओर अगर आप किसी के भी साथ कोई काम कर रहें और बात कर रहें हैं और वो आपको अनकम्फर्टेबल लग रहा है तो देखें कि क्या सामने वाला इंसान सच में वो काम करने के लिए इच्छुक है।

बच्चों को कंसेंट के बारे में कैसे समझाएं ?

बड़े बच्चों को बताएं कि सेक्सुअल प्रक्रिया हम किसी के साथ मिलकर करते हैं न कि किसी को करते हैं। सहमति किसी भी प्रोसेस के लिए सबसे जरुरी बात होती हैऔर ये हमेशा फ्री होकर आपस मे सोच समझ कर देनी चाहिए। बाद में कुछ साल बाद जब वो बड़े होजाए तब उनको डिटेल में बताएं जब वो समझने लायक हो जाते हैं। इसमें सहमति देना और ये डिजिटल जगह पर कैसे काम करता है बताएं।

कंसेंट को कैसे समझें ?

यंग लोगों को ये समझना चाहिए कि आपने किसी काम के लिए पहले सहमति दी थी इसका मतलब ये नहीं कि आपको अब सहमति देना भी जरुरी है।आपके पास अधिकार है की आप मन कर सकतें हैं और इससमे कोई बुराई नहीं है। कंसेंट का मतलब है सामने वाला खुश होकर यस बोले। अगर आपका पार्टनर यस बोलने में हिचकता है तो ये बहुत इम्पोर्टेन्ट हो जाता है की आप उनकी बॉडी लैंग्वेज और एक्सप्रेशंस से उनकी बात को समझें।

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