पर्सनैलिटी डिसऑर्डर की पहचान करना आसान नहीं होता है। कई लोगों के पास है इसके बारे में सही जानकारी भी नहीं होती किसके कारण सही समय उपचार नहीं हो पाता है। इसीलिए उसके बारे में जानकारी होना जरूरी है।

क्या है पर्सनैलिटी डिसऑर्डर ?

पर्सनैलिटी डिसऑर्डर 11 तारीख के होते हैं। महिलाएं  सबसे ज्यादा बॉर्डर लाइन, हिस्ट्रोनिक डिसऑर्डर से ग्रस्त होती है। ऐसी समय में महिलाओं को परिवार का माहौल या किसी सदमे के कारण होती है।

बॉर्डर लाइन डिसऑर्डर में व्यक्ति या तो बहुत ज्यादा उत्साहित हो जाता है या पूरा निराश हो जाता है। ऐसे लोग कल्पना और हकीकत से दूर रहते हैं।

हिस्ट्रोनिक डिसऑर्डर में लोग दूसरों के लिए खुद को बदल लेते हैं। हमेशा सेंटर ऑफ अट्रैक्शन बनाना चाहते हैं। इसमें कई लोग बड़े भावुक हो जाते हैं और बच्चों की तरह हरकत करने लगते हैं।

 पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के खास लक्षण

  • इसमें व्यक्ति खुद को अंदर से खालीपन और अकेला महसूस करता है।
  • भक्ति कंफ्यूज रहता है, कोई निर्णय नहीं ले पाता है। एक चीज का चुनाव करना इनके लिए कठिन होता है।
  • ऐसे लोग रिश्ता बनाए रखने में असफल हो जाते हैं। वह अपनों से किसी भी बात पर लड़ने लगते हैं।
  • इसमें लोगों को अचानक से तेज गुस्सा आता है। साथ ही हमेशा डरे रहते हैं और असुरक्षित महसूस करते हैं।

इसके कुछ सामान्य लक्षण

  • खुद को कम समझना  या खुद बारे में अच्छी सोच ना रखना।
  • दूसरों के लिए सहानुभूति महसूस ना करना
  • तेजी से मूड बदल ना हमेशा हर चीज के लिए डरे रहना।
  • मन में आत्महत्या करने का ख्याल आना।

पर्सनैलिटी डिसऑर्डर का इलाज

इसमें मरीज को ठीक होने के लिए डॉक्टर के साथ-साथ घरवालों की भी जरूरत होती है। इसका उपचार करने के लिए मरीजों के भावों को संभालना जरूरी होता है। इसलिए जरूरी है कि परिवार मरीज को समझें, उसे अकेला महसूस ना करवाया या होने दे।

इसके अलावा काउंसलर की भी मदद लें। यह समस्या से दिमाग से जुड़ी होती हैं। कंस अरुण ठीक होने में मदद करता है साथ ही दवा भी प्रिसक्राइब करता है। इसे ठीक होने के लिए कई तरह की थरिएपी भी मरीज को दी जाती है।

 

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