Pride Month: प्राइड मंथ क्या है और क्यों मनाया जाता है?

Pride Month: प्राइड मंथ क्या है और क्यों मनाया जाता है? Pride Month: प्राइड मंथ क्या है और क्यों मनाया जाता है?

Monika Pundir

04 Jun 2022

प्राइड एक अंग्रेजी शब्द है जिसका सीधा अर्थ है गर्व, पर प्राइड मंथ में, प्राइड शब्द का अर्थ और थोड़ा काम्प्लेक्स है। आज के दुनिया में LGBTQ+ कम्युनिटी को लगभग सभी जानते हैं, और लोग इस कम्युनिटी को लोगो ने बुरी नज़र से देखना कम कर दिया है, पर कुछ साल पहले तक ऐसा नहीं था। प्राइड का इस कॉन्टेक्स्ट में अर्थ है की LGBTQ+ का सदस्य होना शर्म की बात नहीं। अपने आइडेंटिटी पर गर्व करें। 

1999-2000 से अमेरिकी प्रेसिडेंट बिल क्लिंटन ने जून के महीने को LGBTQ प्राइड मंथ घोषित किया था। तब से लेकर 2016 तक हर प्रेजिडेंट ने यह घोषित किया है। अब यह इतना फ़ैल गया है की जिन देशों में ऐसा कुछ घोषित नहीं होता या हुआ है, वहाँ भी प्राइड मंथ मनाया जाता है। भारत में भी लोग इसे मानते हैं। इस साल फिर से प्रेजिडेंट जो बिडेन ने जून को प्राइड मंथ घोषित किया है। अमेरिका में शुरू यह मूवमेंट अब पूरे विश्व में फ़ैल गया है।

प्राइड मंथ में क्या होता है?

प्राइड मंथ में लोग परेड में निकलते हैं, LGBTQ के बारे में जागरुकता बढ़ने की कोशिश करते हैं, LGBTQ के लोगों को इन्क्लुडेड महसूस करवाने का प्रयास करते हैं। स्कूल, कॉलेज जैसे इंस्टीट्यूशन में LGBTQ लोगों को परेशानी न हो, इसके लिए जागरुकता बढ़ने के प्रयास होते हैं। ज़रूरी नहीं की एक LGBTQ सदस्य ही इसे मन पाए या इसके बारे में बात करे।


LGBTQIA+ क्या होता है?


LGBTQIA+ का मतलब लेस्बियन, गे, ट्रांसजेंडर, क्वीर, इंटरसेक्स, एसेक्सुअल, प्लस अन्य लिंग और सेक्सुअलिटी जिससे लोग आइडेंटिफाई कर सकते हैं। इससे समझने के लिए हमे 3 चीज़ों का समझना ज़रूरी है:

1.सेक्स: सेक्स बायोलॉजिकल है। यह क्रोमोसोम, हार्मोन और गेनेटिलिआ द्वारा निर्धारित किया जाता है। यह 3 प्रकार के होते हैं, पुरुष (xy क्रोमोसोम), मादा (xx क्रोमोसोम) और इंटरसेक्स (xxy या xyy क्रोमोसोम)। इंटरसेक्स स्टेराइल हैं (रिप्रोड्यूस नहीं कर सकते)। वे LGBTQIA+ का 'I' और 'Q' बनाते हैं। क्रोमोसोम के अलावा, लिंग का निर्धारण सेकेंडरी सेक्सुअल विशेषताओं जैसे शरीर के बाल की अनुपस्थिति/उपस्थिति, मांसपेशियों, स्तनों, आवाज (उच्च/निम्न पिच) आदि द्वारा किया जा सकता है। ये विशेषताएँ सेक्स हार्मोन के कारण दौरान विकसित होती हैं।

2.जेंडर: जेंडर एक सामाजिक रचना है। यह मर्दानगी और स्त्रीत्व को परिभाषित करता है। यह "महसूस" के बारे में अधिक है। यह पारंपरिक अपेक्षाएं और नियम हैं जो प्रत्येक लिंग को क्या करना चाहिए, इसके लिए निर्धारित किया जाता है। यह मूल रूप से है कि लड़कियों को मृदुभाषी, शांत, विनम्र, शांत खेल खेलना, घरेलू होना आदि से जोड़ता है, और लड़कों को विपरीत होना चाहिए, अर्थात लाउड और ऑउटस्पोकेन, डोमिनेटिंग होने, आदि से जोड़ता है। 

परंपरागत रूप से केवल 2 लिंगों को मान्यता दी गई थी (बाइनरी), लेकिन ऐसे लोग हैं जो उस लिंग के साथ की आइडेंटिफाई नहीं करते हैं जिससे उन्हें जन्म के समय सौंपा गया। इन लोगों को नॉन बाइनरी खा जाता है, जिससे ट्रांसजेंडर, जेंडर फ्लूइड, आदि में काटेगोराइस किया जा सकता है। वे LGBTQIA+ समुदाय का 'T', 'Q' और '+' बनाते हैं। अधिकांश ट्रांसजेंडर (उदाहरण- एक बायोलॉजिकल पुरुष जो एक महिला होने से आइडेंटिफाई करता है, या एक बायोलॉजिकल महिला जो एक पुरुष होने के साथ आइडेंटिफाई करती है) सेक्स-चेंज ट्रीटमेंट के लिए जाना पसंद करते है, जो उनके लिंग को उनके शरीर के  से मिलता है।

2. सेक्सुअलिटी: सरल शब्दों में सेक्सुअलिटी या सेक्सुअल ओरिएंटेशन से तात्पर्य है कि आप किसके साथ सेक्सुअल संबंध बनाना चाहते हैं। इसका मतलब उन लोगों का जेंडर या सेक्स है, जिनसे आप सेक्सूअल रूप से आकर्षित होते हैं। सेक्सुअलिटी कई प्रकार की होती है- हेट्रोसेक्सुअल, जिसका अर्थ विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित होना, समलैंगिक या होमोसेक्सुअल (गे, लेस्बियन) का अर्थ अपने ही लिंग के प्रति आकर्षित, बाइसेक्सुअल, जिसका अर्थ समान और साथ ही विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित होना, पैनसेक्सुअल, अर्थ किसी भी जेंडर से आकर्षण, एसेक्सुअल, जिसका अर्थ है सेक्सुअल आकर्षण का न होना, चाहे रोमांटिक संबंध कितने भी हों, इत्यादि। 

भारत में 2018 में समलैंगिकता को गुनाह मानना बंद कर दिया गया मगर आज भी समाज में इससे खुली रूप से स्वीकार नहीं किया जाता। कुछ लोग सोचते हैं कि यह बीमारी है तो कुछ सोचते हैं की शादी से ठीक हो जाएगा। सच तो यह है कि यह न ही बीमारी है, न किसी का इस पर कंट्रोल है। और सबसे ज़रूरी बात, यह जानवरों में भी पायी जाती है, अर्थात यह बिलकुल नेचुरल है।

हमारे समाज को लोगों के बीच डिफरेंस को स्वीकार करने की आवश्यकता है। 

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