कोरोना और डिप्रेशन – कोरोना महामारी जब से भारत में आयी है सभी लोग लगभग साल भर से अपने अपने घरों में बंद हो गए हैं। कोरोना की दूसरी लहर फ़िलहाल आ चुकी है और इसको लेकर सब बहुत डरे हुए हैं । कोरोना की वैक्सीन लगने की प्रक्रिया भी जोरो शोरों पर है। कोरोना से बचना अभी भी बहुत जरुरी है इसलिए मास्क लगाएं, सेनिटाइज़ करें और सामाजिक दूरी बनाकर रखें।

क्या सभी के मन में निराशा आ चुकी है ?

घरों में बंद रहकर और चारों तरफ नेगेटिव माहौल देखकर लोगों के मन में डर बैठ गया है। लोग हर चीज़ को लेकर निराश हो चुके हैं। कई लोगों की जॉब चली गयी हैं तो कई के बिज़नेस डूब गए हैं। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और घरों में कैद हैं। बच्चों को तो इतनी समझ भी नहीं होती है इसके कारण वो मन में ही कई गलत गलत बातें सोच लेते हैं जिस से कि उनके दिमाग पर बुरा असर पड़ता है।

इन सब चीज़ों का हमारे दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ता है क्योंकि हम हर समय यही सब सोचते रहते हैं। हम न्यूज़ में यही देखते रहते हैं और हमारे घरों में भी कोरोना की ही बातें चलती रहती हैं। इस से हमारे मन में नेगेटिविटी बैठ जाती है। हमें ऐसा फील होने लगता है कि कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा है। इस से हमें टेंशन होती है और पता भी नहीं लगता कब ये टेंशन डिप्रेशन का रूप ले लेती है।

नेगेटिव माहौल से बचने के लिए क्या कर सकते हैं ?

ध्यान रखें कि आप इन सब के बारे में ज्यादा न सोचें और घर में खुशनुमा माहौल रखें। बच्चों के सामने कोरोना कि ज्यादा बातें न करें और उन्हें अच्छी अच्छी चीज़ें ही बताएं। बच्चों को बैठकर समझाएं कोरोना क्या है और उनके सभी सवाल के जवाब दें। इस से उनके सभी डाउट क्लियर हो जाएंगे और उनकी टेंशन कम हो जाएगी।

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