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Photograph: (freepik)
वर्क-लाइफ बैलेंस आज की Gen Z पीढ़ी के लिए सिर्फ़ एक ट्रेंडिंग शब्द नहीं है; यह जीने का एक तरीका है। जहाँ पहले "ज़्यादा काम = ज़्यादा सफलता," होता था, वही आज Gen z ऐसा नहीं सोचते। उनके लिए काम ज़रूरी हैं, लेकिन वे अपनी पर्सनल लाइफ़, मेंटल हेल्थ और प्राइवेसी को भी महत्व देते हैं। Gen Z को लगता है कि अगर ज़िंदगी बैलेंस्ड नहीं है, तो प्रोफ़ेशनल सफलता पूरी नहीं होगी।
Gen Z के लिए वर्क-लाइफ बैलेंस का मतलब क्या है
काम ज़िंदगी का हिस्सा है, पूरी ज़िंदगी नहीं
Gen Z का मानना है की काम उनकी पहचान का एक हिस्सा है, उनकी पूरी पहचान नहीं । वे खुद को सिर्फ़ अपनी नौकरी या प्रोफेशन से नहीं जोड़ते। उनके लिए दोस्त, परिवार, हॉबीज़ और खुद के लिए समय उतना ही मायने रखता है। इसी वजह से वे ओवरटाइम और हमेशा "अवेलेबल" रहने के कल्चर का विरोध करते हैं। उनका मानना है कि काम खत्म होने के बाद ज़िंदगी शुरू होती है, न कि उल्टा।
मेंटल हेल्थ को प्राथमिकता देना
Gen Z खुलकर मानती है कि मेंटल हेल्थ भी उतनी ही ज़रूरी है जितनी सैलरी या प्रमोशन। लंबे वर्किंग आवर्स, लगातार स्ट्रेस और बर्नआउट उन्हें मंज़ूर नहीं है। अगर उनका काम इमोशनली थकाने वाला हो तो वे ब्रेक लेने, छुट्टी मांगने या नौकरी बदलने में भी नहीं हिचकिचाते। ऐसा काम जो दिमाग और दिल पर भारी न पड़े, उसे वे वर्क-लाइफ बैलेंस कहते हैं।
फ्लेक्सिबिलिटी ज़रूरी है, मजबूरी नहीं
Gen Z के लिए फिक्स टाइम और फिक्स सिस्टम से ज़्यादा ज़रूरी है फ्लेक्सिबिलिटी। रिमोट वर्क, हाइब्रिड मॉडल और अपने हिसाब से काम करने की आज़ादी उन्हें बैलेंस महसूस करती है। उन्हें लगता है कि काम पर प्रोडक्टिविटी, बैठे रहने के समय से ज़्यादा मायने रखती है। जब वे यह तरीका अपनाते हैं तो वे ज़्यादा प्रोडक्टिव और फोकस्ड भी होते हैं।
पैसे के साथ-साथ सुकून भी मायने रखता है
Gen Z के लिए अच्छी सैलरी अहम है, लेकिन सुकून की कीमत पर नहीं। ऐसा करियर जो लोगों को खालीपन महसूस कराए, वह उन्हें नहीं चाहिए। उनके लिए, ऐसा करियर जो उनकी ज़िंदगी से कुछ छीने बिना उनकी ज़रूरतों को पूरा करे, वही वे वर्क-लाइफ बैलेंस समझते इसी वजह से वे पैशन, साइड हसल और मीनिंगफुल वर्क की तरफ़ भी खिंचे चले आते हैं।
अपनी सीमाएँ तय करना सीखना
जेनरेशन Z के लिए "नहीं" कहना आसान होता जा रहा है। उन्हें पता है कि हर चीज़ मान लेना उनके साथ नाइंसाफ़ी है। काम और पर्सनल लाइफ के बीच बाउंड्री बनाना उनके लिए वर्क-लाइफ बैलेंस का सबसे ज़रूरी हिस्सा है। वे मानते हैं कि जब सीमाएँ साफ़ होती हैं, तभी रिश्ते और काम दोनों बेहतर चलते हैं।
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