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Women In Sports: क्यों औरतों से ज्यादा खेलों में मर्दों का प्रोत्साहन किया जाता है?

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Swati Bundela
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National Sports Day 2022

Women In Sports: पहले समय में सिर्फ़ मर्दों को खेलो में भाग लेने दिया जाता था। स्पोर्ट्स सिर्फ़ पुरुषों के लिए होता है क्योंकि ये माना जाता था कि औरतें शारीरिक रूप से  मर्दों से कमज़ोर होती हैं। इसके साथ ही परिवार वाले या रिश्तेदार इसलिए भी औरतों को खेलों में भाग लेने नहीं देते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि अगर औरतें घर से बाहर जाकर खेलेंगी तो उनकी समाज में कोई इज़्ज़त नहीं रहेगी।

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आज भी स्थिति कुछ ज़्यादा नहीं बदली है।बहुत से भारतीय घरों में आज भी जब भी खेलने की बात होती है  घर के लड़कों को ही खेलों में जाने कि लिए प्रोत्साहित किया  जाता है।

आज भी लड़कियाँ खेलने के लिए इतना संघर्ष कर रही हैं। पहले तो ज़्यादातर लड़कियों को घर से परमिशन लेनी पड़ती है बहुत सी लड़कियों को तो वो भी नहीं मिलती। अगर परिवार मान भी जाएं फिर उनके लिए खेलों में इतने सीमित अवसर है कि फिर उन्हें उन्मे  से ही कोई विकल्प चुनना पड़ता है।

Women In Sports: समाज से नहीं मिलता साथ

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बहुत सी औरतें समाज के डर से खेलों में भाग नहीं ले पाती क्योंकि समाज  में आज भी लड़कियों को नहीं अच्छा नहीं मानता जो खेलों में भाग लेती हैं।

Women In Sports: महिला खिलाड़ियों को उनके कपड़ों से जज किया जाता है

कितनी शॉर्ट स्कर्ट पहनी है इसे  ज़रा भी शर्म नहीं है। मर्दों के सामने कैसे अपने शरीर का प्रदर्शन कर रही है। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी अगर कोई मां-बाप अपनी बेटियों को खेलने के लिए भेज भी दे लेकिन कहीं ना कहीं उनके मन में समाज का डर बना रहता है। जब भी आप किसी भी व्यक्ति को उसका पसंदीदा खिलाड़ी पूछेंगे तो सबसे पहले उसके दिमाग़ में किसी पुरष खिलाड़ी का नाम आएगा बहुत कम आसार है कि आपको पहली बार जवाब में किसी महिला खिलाड़ी का नाम सुनने को मिले।

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Women In Sports: महिला खिलाड़ी होती है लिंग भेद (sexism) का शिकार

भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तान रह चुकी मिताली राज भी इस लिंग भेद का शिकार हो चुकी हैं जब उनसे एक प्रेस  कांफ्रेंस के दौरान किसी रिपोर्टर से पूछा गया, “उनका फ़ेवरेट पुरुष खिलाड़ी कौन है? इस पर, मिताली राज ने बहुत ही कॉन्फिडेंट से जवाब देते हुए कहा, “कभी आप ने किसी पुरुष खिलाड़ी को यह पूछा है, उनकी पसंदीदा महिला खिलाड़ी कौन है?

Women In Sports: शादी या अपने परिवार बनाने को ही सेटल्ड माना जाता है

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इसके अलावा सानिया मिरज़ा को भी ये पूछा गया  कि वो अपनी ज़िंदगी में कब सेटल्ड होगी? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा सानिया  ने कहा, “आपको क्या लगता है मैं अभी सेटल्ड  नहीं हुई हूँ। आपको इस बात से बुरा  लग रहा है कि मैंने माँ बनने से ऊपर खेल को चुना।

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