“खाना बनाना सीख लो, आगे काम आएगा” ये सलाह हमेशा लड़कियों को ही क्यों दी जाती है?

बचपन से ही लड़कियों ने यह लाइन कई बार सुनी होती है—“खाना बनाना सीख लो, आगे काम आएगा।” ये एडवाइस सुनने में सिंपल लगता है, लेकिन इसके पीछे छुपी सोच बहुत गहरी है।

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Dimpy Bhatt
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Why cooking advice always given to girls

Photograph: (freepik)

बचपन से ही लड़कियों ने यह लाइन कई बार सुनी होती है कि “खाना बनाना सीख लो, आगे काम आएगा।” ये एडवाइस सुनने में सिंपल लगता है, लेकिन इसके पीछे छुपी सोच बहुत गहरी है। सोसाइटी में हमेशा खाना बनाने को एक ज़रूरी लाइफ स्किल नहीं, बल्कि लड़की की ज़िम्मेदारी माना है। यही वजह है कि यह बात ज़्यादातर बेटियों से कही जाती है, बेटों से नहीं। यह एडवाइस तभी सही है जब यह सभी के लिए हो। लड़कियों को सिर्फ़ फ्यूचर वाइफ नहीं, बल्कि एक इंडिपेंडेंट इंसान की तरह तैयार करना ज़रूरी है। जब खाना बनाना जेंडर नहीं, बल्कि लाइफ की स्किल बनेगा, तभी असली बदलाव आएगा।

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“खाना बनाना सीख लो, आगे काम आएगा” ये सलाह हमेशा लड़कियों को ही क्यों दी जाती है?

खाना बनाना स्किल है, लेकिन रिस्पांसिबिलिटी क्यों?

खाना बनाना एक ज़रूरी स्किल है, इसमें कोई शक नहीं। हर इंसान को अपने लिए खाना बनाना आना चाहिए। लेकिन जब यही स्किल सिर्फ़ लड़कियों से उम्मीद के तौर पर जुड़ जाए, तो सवाल उठता है। लड़कों के लिए कुकिंग एक हॉबी या टैलेंट मानी जाती है, जबकि लड़कियों के लिए इसे “आगे की लाइफ की तैयारी” बना दिया जाता है।

शादी को सेंटर में रखकर दी जाने वाली एडवाइस 

अक्सर यह एडवाइस शादी के कॉन्टेक्स्ट में दी जाती है—जैसे लड़की का फ्यूचर सिर्फ़ घर और किचन तक ही सीमित हो। बचपन से ही लड़कियों को यह रीलाइज़ कराया जाता है उन्हें एक दिन किसी और के घर जाना है, इसलिए अभी से किचन में परफेक्ट होना ज़रूरी है। यह थिंकिंग लड़की की आइडेंटिटी को धीरे-धीरे सीमित कर देती है। 

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लाइफ स्किल vs. जेंडर रोल

प्रॉब्लम खाना बनाना सीखने में नहीं है, बल्कि इसे जेंडर रोल बना देने में है। जैसे एजुकेशन, फाइनेंसियल मैनेजमेंट और डिसिशन मेकिंग ज़रूरी है, वैसे ही खाना बनाना भी हर इंसान के लिए ज़रूरी होना चाहिए। लेकिन सोसाइटी ने इस स्किल को महिलाओं के हिस्से बना दिया है, जिससे इक्वलिटी की थिंकिंग पीछे छूट जाती है।

लड़कों से ये बात क्यों नहीं कही जाती?

अगर खाना बनाना “आगे काम आने वाली” स्किल है, तो यह सलाह लड़कों को क्यों नहीं दी जाती? क्यों लड़कों के लिए यह माना जाता है कि कोई और उनके लिए खाना बना देगा? यही सोच महिलाओं पर अननेसेसरी प्रेशर डालती है और पुरुषों को रिस्पांसिबिलिटी से दूर रखती है।

चेंज की ज़रूरत

आज की दुनिया में महिलाएँ हर फील्ड में आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में उन्हें सिर्फ़ किचन तक सीमित करना न तो सही है और न ही ज़रूरी। खाना बनाना सीखना अच्छा है, लेकिन इसे लड़की की आइडेंटिटी या फ्यूचर से जोड़ देना गलत है। इक्वलिटी की शुरुआत तब होगी, जब घर की रिस्पांसिबिलिटी और स्किल्स दोनों बराबर बँटें।

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