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Photograph: (freepik)
आज के दौर में बच्चों की दुनिया सिर्फ़ स्कूल, प्लेग्राउंड या दोस्तों तक सीमित नहीं है। उनकी लाइफ का एक बढ़ा पार्ट ऑनलाइन बन चूका है, जहाँ सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम्स, वीडियो प्लेटफॉर्म और चैट ऐप्स शामिल हैं। ऐसे में पैरेंट्स के लिए यह समझना बहुत ज़रूरी हो गया है कि उनके बच्चे डिजिटल स्पेस में क्या देख रहे हैं, क्या सीख रहे हैं और किन बातों से इन्फ्लुएंस्ड हो रहे हैं। बच्चों की ऑनलाइन लाइफ को इग्नोर करना अब एक बड़ा रिस्क बन सकता है।
ऑनलाइन लाइफ
1. डिजिटल वर्ल्ड बच्चों की थिंकिंग बदल रहा है
आजकल बच्चे यंग ऐज में ही सोशल मीडिया ट्रेंड्स, रील्स और ऑनलाइन कंटेंटमें शामिल हो गए हैं। इससे उनकी थिंकिंग, लैंग्वेज और बिहेवियर पर डायरेक्ट असर पड़ता है। अगर पैरेंट्स यह नहीं समझेंगे कि ऑनलाइन वर्ल्ड कैसे बच्चों की माइंडसेट बना रही है, तो वे सही टाइम पर गाइड नहीं कर पाएंगे। ऑनलाइन लाइफ को समझना पैरेंट्स को बच्चों की बदलती सोच से जुड़े रहने में मदद करता है।
2. ऑनलाइन सेफ्टी ज़रूरी है
जैसे पैरेंट्स बच्चों को रोड पर केयरफुल रहना सिखाते हैं, वैसे ही इंटरनेट पर भी सेफ रहना सिखाना ज़रूरी है। ऑनलाइन फ्रेंड्स, अननोन मैसेज, साइबर बुलिंग और गलत कंटेंट बच्चों के लिए हार्मफुल हो सकता है। जब पैरेंट्स बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी को समझते हैं, तभी वे उन्हें सही और गलत के फर्क के बारे में बता सकते हैं।
3. सोशल मीडिया का इमोशनल असर
लाइक्स, कमेंट्स और फॉलोअर्स बच्चों के सेल्फ कॉन्फिडेंस पर असर डालते हैं। कई बार बच्चे खुद को दूसरों से कम्पयेर करने लगते हैं, जिससे उनमें इनसिक्योरिटी या स्ट्रेस बढ़ सकता है। पैरेंट्स अगर ऑनलाइन लाइफ को समझेंगे, तो बच्चों की इमोशनल स्टेट को बेहतर तरीके से पहचान पाएंगे और टाइम पर उनसे बात कर पाएंगे।
4. ट्रस्ट और ओपनली कम्युनिकेशन
अगर पैरेंट्स सिर्फ़ स्ट्रिक्ट रहेंगे , तो बच्चे अपनी ऑनलाइन लाइफ छुपाने लगेंगे। लेकिन जब पैरेंट्स समझने की कोशिश करते हैं, सवाल पूछते हैं और जज नहीं करते, तो बच्चों के साथ ट्रस्ट बनता है। इससे बच्चे अपनी ऑनलाइन प्रोब्लेम्स खुलकर शेयर कर पाते हैं।यह सिर्फ़ कंट्रोल की बात नहीं है, बल्कि टाइम, सपोर्ट और सही गाइडेंस देने की ज़रूरत है, ताकि बच्चे डिजिटल दुनिया में भी सेफ और बैलेंस्ड रह सकें।
5. फ्यूचर की तैयारी आज से शुरू होती है
डिजिटल स्किल्स, ऑनलाइन बिहेवियर और टेक्नोलॉजी की टाइम बच्चों के फ्यूचर का हिस्सा है। पैरेंट्स जब बच्चों की ऑनलाइन लाइफ को समझते हैं, तो वे उन्हें सही डायरेक्शन दे सकते हैं—जहाँ टेक्नोलॉजी डर नहीं, बल्कि एक पॉजिटिव टूल बन सके। आज के समय में बच्चों की ऑनलाइन लाइफ को समझना पैरेंटिंग का अहम पार्ट बन चुका है।
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